सत्यम, सुशीला और टिया के फाइल फोटो
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कान्हा जब डूबने लगा तो उसे बचाने के लिए सुशीला आई, उसके बाद सत्यम आ गया और फिर उर्वशी और बाद में नैनी पहुंच गई। किनारे पर खड़ी सत्यम की मां बबिता और बहन रिचा देख रही थी। उन लोगों ने जोर से चिल्लाना शुरू किया। आसपास के किसान और मछुआरे दौड़कर आए। सभी लोगों को नदी से बाहर निकाला, लेकिन सुशीला देवी, टिया उर्फ उर्वशी, सत्यम और कान्हा की सांसें थम चुकी थीं।