तब भी सितंबर का महीना था और अब भी। फर्क केवल तारीख और वर्ष का है। संत आसाराम को सलाखों के पीछे भिजवाने वाली लड़की भी शाहजहांपुर की थी और स्वामी चिन्मयानंद को जेल पहुंचाने वाली छात्रा भी शाहजहांपुर की है। यौन शोषण का शिकार हुईं इन बेटियों ने हौसले को नहीं तोड़ा। शोषण के खिलाफ लड़ाई लड़ी और जंग भी जीती।