लखनऊ-बरेली हाईवे पर रविवार को हुए हादसे में पांच लोगों की मौत के मामले में चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है। बोलेरो में बैठे चारों लोग बदमाश थे। इनमें से तीन की मौत हो गई। बोलेरो से मिले दोनों बच्चे गुरुग्राम में रह रहे ऑटो चालक मनोज के हैं। बदमाशों ने मनोज और उसके दोनों बच्चों को अगवा कर लिया था। बच्चों की जान बच गई है। पुलिस ने मनोज को भी बंधनमुक्त करा लिया है।
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बरेली में किडनैपिंग केस
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
बरेली में हादसे के बाद अपहरण की गुत्थी तो सुलझ गई, लेकिन पुलिस की पूछताछ में घटनाक्रम की पूरी कहानी अनैतिक संबंधों के मकड़जाल में उलझी नजर आई। मनोज वाल्मीकि ने मनमोहन और उसके परिवार की मदद की। बाद में दोनों मनोज की जान के दुश्मन बन गए।
बंधनमुक्त कराने के बाद पुलिस की पूछताछ में मनोज ने बताया कि वह टांडा सिकंदरपुर का मूल निवासी है। इसी गांव में मनमोहन कोरी का परिवार रहता था। मनमोहन का पिता नत्थूलाल आपराधिक प्रवृत्ति का है।
गांव के अधिकतर लोग मनमोहन के परिवार से कन्नी काटते हैं। हालांकि, उसके पिता के इस परिवार से संबंध रहे। मनोज ने बताया कि शादी के बाद वह रोजी रोटी की तलाश में गुरुग्राम चला गया था। वहां वह टैक्सी और फिर ऑटो चलाने लगा।
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परिवार संग मनोज
- फोटो : अमर उजाला
मनोज ने बताया कि नत्थूलाल एक केस में फंसा तो कानूनी पैरवी में उसकी बड़ी बहन उसके साथ कोर्ट आने-जाने लगीं। नत्थू ने इसका फायदा उठाकर उनकी बहन को प्रेम प्रसंग में फांस लिया। कई साल से दोनों पति-पत्नी के रूप में रह रहे हैं।
इससे पहले भी नत्थूलाल की दो शादियां हो चुकी थीं। उनके परिवार को ये बेमेल रिश्ता खराब लगा, लेकिन बहन की मर्जी सोचकर खामोश रहे। दोनों परिवार में फिर रिश्ते ठीक हो गए।
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मनोज के परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मनमोहन को घर पर रखा, नौकरी दिलाई
मनोज ने बताया कि वर्ष 2022 में मनमोहन हत्या के मामले में फंसा था। सालभर पहले वह जमानत पर छूटा तो बेरोजगार था। तब उन्होंने तीन महीने तक मनमोहन को अपने घर में रखा। फिर अपनी गारंटी पर उसकी एक पानी प्लांट में टैंकर ड्राइवर की प्रतिमाह 18 हजार रुपये की नौकरी लगवा दी।
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पीड़ित मनोज
- फोटो : अमर उजाला
मनोज ने बताया कि दिन में वह और पत्नी पूजा काम पर चले जाते थे। तब मनमोहन ने उनके घर पर रहने वाली रिश्तेदार लड़की को अपने जाल में फंसा लिया। इसकी जानकारी हुई तो मनोज ने विरोध किया। तब तक मनमोहन को वह नौकरी दिला चुके थे। मनमोहन उस लड़की को लेकर चला गया। उन्हीं की कॉलोनी में दो गली छोड़कर किराये पर रहने लगा था। दोनों अक्सर सामने भी पड़ने से कतराते थे।
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एसपी सिटी मानुष पारीक
- फोटो : अमर उजाला
ईश्वर ने किया इन्साफ : मनोज
बंधनमुक्त हुए मनोज पत्नी और दोनों बच्चों से मिले तो पहले दंपती की आंखें नम हो गईं, फिर सब मुस्कुराने लगे। पूजा ने एसपी सिटी मानुष पारीक से कहा कि वह समझ नहीं पा रही हैं कि मनमोहन ने पति व बच्चों का अपहरण क्यों किया? उनके पति के साथ मनमोहन व उसके पिता ने हमेशा विश्वासघात किया, लेकिन वह शांत रहे। बस अपने परिवार की दोनों महिलाओं से रिश्ता नहीं रखने का फैसला जरूर ले लिया था।
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पीड़ित मनोज और उसकी पत्नी
- फोटो : अमर उजाला
मनोज ने कहा कि मनमोहन उससे मन ही मन इतना बैर मानता था, ये भी उसे नहीं पता था। पुलिस ने भले ही उसे बंधनमुक्त करा दिया, लेकिन इस मामले में पूरा इन्साफ ईश्वर ने किया है। मनमोहन के साथ ही इस साजिश में शामिल दूसरे लोग भी काल के गाल में समा गए।
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हादसे में मारा गया आरोपी मनमोहन
- फोटो : अमर उजाला
वारदात से पहले सालासर दर्शन करने गए थे बदमाश
रामपुर जिले के नगरिया कला आनंदपुर से आईं कमलेश कमलेश ने बताया कि बेटा प्रिंस बिलासपुर में ही एक शीशा फैक्टरी में काम करता है। 29 मार्च को मनमोहन ने उसके बेटे को कॉल कर बताया था कि उसके माता-पिता मथुरा में हैं। उन्हें लेने चलना है।
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इसी टैंकर से टकराई कार
- फोटो : संवाद
30 मार्च को मनमोहन अपनी बोलेरो लेकर आया और प्रिंस को साथ ले गया। एक अप्रैल को प्रिंस को कॉल किया तो उसने बताया कि वह सालासर में बालाजी के दर्शन करने आया है, जल्द ही लौट आएगा। छोटे बेटे शनि ने चार अप्रैल को इंस्टाग्राम पर प्रिंस से बात की तो उसने रात में घर लौटने की बात कही थी। उसके बाद प्रिंस से कोई बात नहीं हुई थी।
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हादसे के बाद मौके पर जांच करती पुलिस
- फोटो : संवाद
पिता और बच्चों की बची जान, अपहरणकर्ताओं की हादसे में मौत
लखनऊ-बरेली हाईवे पर रविवार को हुए हादसे में पांच लोगों की मौत के मामले में चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है। बोलेरो में बैठे चारों लोग बदमाश थे। इनमें से तीन की मौत हो गई। बोलेरो से मिले दोनों बच्चे गुरुग्राम में रह रहे ऑटो चालक मनोज के हैं। बदमाशों ने मनोज और उसके दोनों बच्चों को अगवा कर लिया था। बच्चों की जान बच गई है। पुलिस ने मनोज को भी बंधनमुक्त करा लिया है।
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अस्पताल में भर्ती घायल बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि गुरुग्राम निवासी ऑटो चालक मनोज और उसके दो बेटे मयूर (6) व लक्ष्य (3) शनिवार शाम साढ़े सात बजे लापता हो गए थे। मनोज की पत्नी पूजा ने डीएलएफ फेज-वन थाने में रविवार को उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी। उसने बताया कि मनोज शनिवार शाम एक सवारी को छोड़ने के लिए पहाड़ी वाले हनुमान मंदिर गए थे। दोनों बच्चों को भी साथ ले गए थे।
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परिवार संग मनोज
- फोटो : अमर उजाला
एसपी सिटी के मुताबिक, हादसे में बोलेरो सवार तीन लोगों की मौत हो चुकी थी। चालक सीट पर मिला प्रिंस और दोनों बच्चे बेहोशी की हालत में थे। प्रिंस को होश आया तो उसके बयान से घटनाक्रम स्पष्ट हो गया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने फरीदपुर के एक मकान से मनोज को बंधनमुक्त कराया। यह मकान हादसे में जान गंवाने वाले मनमोहन के पिता नत्थूलाल का है। पुलिस ने नत्थूलाल को भी हिरासत में ले लिया। प्रिंस का भी पुलिस की निगरानी में इलाज चल रहा है।
हिरासत में लिया गया नत्थूलाल। मृत आरोपी मनमोहन का पिता।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस के मुताबिक, मनोज भी मनमोहन के गांव टांडा सिकंदरपुर का रहने वाला है। मनमोहन का पिता नत्थूलाल कई वर्षों से मनोज के परिवार की एक महिला के साथ सहमति संबंध में रहता है। इस बीच मनमोहन का संबंध मनोज के परिवार की दूसरी महिला से हो गया। मनोज इसका विरोध करता था। उसे रास्ते से हटाने के लिए मनमोहन ने अपहरण की साजिश रची थी। अपहरण के वक्त मनोज के साथ उसके बच्चे भी थे, तो उनको भी अगवा कर लिया।