बदायूं सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले में सच्चाई क्या है ये तो पुलिस की विवेचना पूरी होने के बाद ही पता चलेगा, लेकिन परिवार वालों ने जो बयान दिए हैं, वह एक-दूसरे के विरोधाभासी हैं। जहां बेटा लगातार ये कह रहा है कि जब आरोपी उसकी मां को घर के दरवाजे पर फेंककर गए थे तब उसकी सांसें थम चुकी थीं। वहीं पति का कहना है कि महिला करीब आधे घंटे तक जिंदा रही। दम तोड़ने से पहले उसने बताया था कि उसकी यह हालत कुंए में गिरने से हुई है। ऐसे में अब पुलिस की जांच दोनों दिशाओं में चल रही है।
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बदायूं पहुंचीं राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य
- फोटो : ANI
चार जनवरी को सुबह महिला का पति अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ थाने पहुंचा था। थाने में उसका कहना था कि पत्नी तीन जनवरी को शाम करीब पांच बजे जब पत्नी घर से निकली थी तब उसने बताया था कि वह मंदिर जा रही और अगले दिन सुबह लौटेगी। रात में मायके में मां के पास रुकेगी, लेकिन उसी रात करीब साढ़े 11 बजे पुजारी और उसके दो सहयोगी उसे घर लेकर पहुंचे थे। वह घायल अवस्था में थी। परिवार वालों से बोल भी रही थी तब उसने कहा था कि वह कुएं में गिर गई थी। इसके कुछ घंटे बाद यानी सोमवार दोपहर के समय उसके बेटे का बयान आया कि पुजारी और उसके सहयोग उसकी मां को मृत अवस्था में घर छोड़ गए थे। उसने दुष्कर्म के बाद हत्या का आरोप लगाया था।
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इसी धर्मस्थल की कोठरी में हुई थी घटना
- फोटो : अमर उजाला
जब से ये मामला सुर्खियों में आया है, तब से पुलिस भी कई बार उनसे जानकारी ले चुकी है। इसमें पिता-पुत्र ही नहीं महिला की दोनों बेटियों के बयान भी विरोधाभासी बताए गए हैं। इससे पुलिस इस दिशा में भी जांच कर रही है कि महिला जब घर आई थी, तब जीवित थी और उसने परिवार वालों को आपबीती भी बताई थी। चार जनवरी को सामने आए वीडियो में महिला का पति भी यह बता रहा था कि महिला को जब आरोपी रात में घर के दरवाजे पर डालकर गए थे, तब वह जिंदा थी।
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इसी धर्मस्थल की कोठरी में हुई थी घटना
- फोटो : अमर उजाला
सोमवार शाम से पति ने साध ली चुप्पी
घटना के बाद जब महिला का पति सुबह थाने पहुंचा था तो उसने यही कहा था कि महिला ने उसे बताया था कि वह कुएं में गिर गई थी, लेकिन जब शाम को पुलिस और अन्य लोगों का जमावड़ा लगा तो उसने चुप्पी साध ली। इसके बाद वह बोला ही नहीं। लोगों के साथ मीडिया ने भी उससे बात करने की कोशिश की लेकिन उसने किसी बात का जवाब नहीं दिया। कुछ भी पूछने पर उसकी जुबां से कुछ नहीं निकला। ऐसे में पुलिस यह भी मानकर चल रही है कि उस पर किसी का दबाव है।
रात में पुलिस को नहीं दी गई थी सूचना
बयानों के आधार पर और पुलिस की तफ्तीश में एक और बात का खुलासा हुआ है कि परिवार वालों ने उसी समय सूचना नहीं दी थी। अगर परिवार वाले उसी समय सूचना देते और पुलिस इसे गंभीरता से लेती तो शायद ये मामला इतना न बिगड़ता। आगे की कार्रवाई महिला के बयानों के ही आधार पर होती। यदि उसके जिंदा रहने की स्थिति में उस समय ही महिला के बयान ले लिए जाते तो फिर चाहे उसके साथ दुष्कर्म होता या नहीं, आरोपियों को बचने का मौका नहीं मिलता।