पीलीभीत में असम हाईवे पर हुए हादसे में पांच लोगों की मौत से हर कोई हैरान है। हादसे के बाद दोनों परिवारों में मातमी सन्नाटा है। दोनों परिवारों के मुखिया की जान चली गई। इनके अलावा तीन बच्चे भी काल के गाल में समा गए। पांच घायलों में ज्यादातर की हालत नाजुक है। हादसे में मरने वाले अश्वनी और अमित के परिवार वाले आपस में गहरे दोस्त थे। जीवन भर तो दोनों ने दोस्ती निभाई ही, मरते दम तक भी साथ रहे।
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मौके पर एसपी अभिषेक दीक्षित
- फोटो : अमर उजाला
बहनोई के भतीजे की शादी का निमंत्रण अमित ने अपने दोस्त अश्वनी को भी दिया था। दोनों के पारिवारिक संबंध मधुर थे, इसलिए दोनों के परिवार एक ही कार से शादी में पीलीभीत आए थे। हंसी-खुशी वापस आ रहे थे कि रास्ते में हादसा हो गया और दोनों दोस्त समेत पांच की जान चली गई। कार अश्वनी की थी और वही चला रहे थे। अश्वनी की पूरनपुर में जूनियर हाईस्कूल रोड पर मोबाइल फोन की दुकान है। अमित कपड़े की दुकान पर नौकरी करते थे। दोनों परिवारों की कच्ची गृहस्थी है।
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मृतक बच्चों के फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
अश्वनी के साथ ही उनकी एक बेटी नोनी और बेटे लव की मौत हो गई, जबकि पत्नी रेखा, मां आशा और बड़ी बेटी मिनी घायल हैं। आशा बरेली में रुहेलखंड अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि रेखा और मिनी को इलाज के बाद स्वास्थ्य सुधार होने पर निजी अस्पताल से छुट्टी कराकर कराकर परिजन घर ले गए। अमित के परिवार में खुद अमित और उनके बेटे गोलू की मौत हुई। अमित परिवार का मुखिया था। वही घर का खर्च चलाता था। उनके दूसरे बेटे उदय और पत्नी सुषमा भी घायल हैं। सुषमा को पीलीभीत के प्राइवेट अस्पताल भर्ती कराया गया है, वहां उनकी हालत में सुधार बताया गया है। बेटे उदय के चेहरे की हड्डी टूटी है। उसे शहर के निजी अस्पताल में इलाज के बाद बरेली रेफर किया गया है। हालांकि उदय बातचीत कर रहा है।
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लव (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
हादसे के बाद पहुंचे पुलिस कर्मी भी क्षतिग्रस्त कार में फंसे घायलों को निकालने में लाचार नजर आए, क्योंकि कार की हालत ही ऐसी थी। एक घंटे बाद जब क्रेन पहुंची तो उससे कार खाई से बाहर निकाली गई और शीशे तोड़कर किसी तरह उनमें से घायलों को निकाला जा सका। घायलों को कार से बाहर निकालने-निकालने में एक घंटा लगा।
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अमित कश्यप (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
हादसे के बाद घायलों में से किसी की हालत ऐसी नहीं थी कि उनमें से कोई पुलिस को फोन से सूचना तक दे देता। वह तो खैर हुई कि गश्त करते हुए पुलिस कर्मी वहां पहुंच गए और उन्होंने यूपी-112 को सूचना देकर गाड़ी बुला ली। क्षतिग्रस्त कार और वहां का दर्दनाक मंजर देख पुलिस कर्मी भी सहम गए। कार पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। उसमें मृतकों के शव और घायल फंसे हुए थे। घायल दर्द से तड़प रहे थे, मगर पुलिस कर्मी भी कुछ करने की स्थिति में नहीं थे।
ऐसे में संसाधनों की जरूरत समझते हुए अफसरों को घटना की जानकारी दी। इस पर एसपी अभिषेक दीक्षित, सीओ सिटी धर्म सिंह मार्छाल समेत कई अफसर मौके पर आ गए। तब कहीं जाकर पुलिस ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। क्रेन बुलाई गई। एक हिस्सा क्रेन और दूसरा ट्रक में फंसाकर कार को खींचा गया। पुलिस ने कार के पीछे का शीशा तोड़कर घायलों को किसी तरह बाहर निकाला। फंसे लोगों को बमुश्किल बाहर निकालने में एक घंटे का समय लग गया। घायलों को तत्काल इलाज के लिए वाहनों की व्यवस्था कर जिला अस्पताल भेजा गया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम को पहले से ही अलर्ट रखा गया।