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Bareilly News: डकैत कल्लू के आतंक के 17 साल बाद फिर लहूलुहान हुई कटरी, अब भूमाफिया हुए हावी

Sun, 15 Jan 2023 03:10 PM IST
मुकेश कुमार अमित सक्सेना, अमर उजाला बरेली
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कल्लू डकैत का फाइल फोटो, हाल ही में हुई घटना के निशान - फोटो : अमर उजाला
डेढ़ दशक पहले तक बरेली, बदायूं व शाहजहांपुर जिलों की सीमा से लगी रामगंगा और गंगा की कटरी में डकैतों का आतंक था। इनमें सबसे दुस्साहसिक सरगना कल्लू यादव था, जिसके हाथ 19 पुलिसवालों और अनगिनत लोगों के खून से रंगे थे। 15 जनवरी 2006 की सुबह जब लोग सोकर उठे तो पता चला कि पुलिस मुठभेड़ में कल्लू को मार दिया गया। अब जब कटरी में विकास की बयार बह रही है, तो भू-माफिया गोलीबारी कर रहे हैं। इनसे निपटने के लिए बड़े ऑपरेशन की जरूरत है। कटरी में यूं तो कई डकैतों बड़े लल्ला, रानी ठाकुर, नरेशा धीमर, नरेशा चचुआपुर का राज रहा पर सबसे ज्यादा दहशत शाहजहांपुर के परौर क्षेत्र के पूरननगला निवासी कल्लू यादव उर्फ भूरा पहलवान उर्फ बाबूराम की रही। उस पर अपहरण, हत्या जैसे 71 मुकदमे दर्ज थे और गिरोह में 30 डकैत थे। कटरी के कई गांव काफी समय तक उसकी आपराधिक गतिविधियों का केंद्र रहे। 

चुनाव के वक्त भी इन इलाकों में कल्लू व अन्य डकैत गिरोहों की सक्रियता बढ़ जाती थी। राजनीतिज्ञों पर भी इनके संरक्षण के आरोप लगते रहे। एक लाख के इनामी कल्लू को पुलिस व एसओजी की संयुक्त टीम ने ढेर कर क्षेत्र में अमन कायम किया था। अब दोबारा कटरी का माहौल बिगड़ रहा है।
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एनकाउंटर स्पेशलिस्ट विजय राणा - फोटो : अमर उजाला

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राणा बोले- लोगों का भरोसा जीतकर मिली विजय

कल्लू यादव व नरेशा धीमर का एनकाउंटर करने वाली टीम में शामिल विजय राणा अब अमरोहा में सीओ सिटी हैं। उन दिनों इज्जतनगर एसओ के तौर पर वह संयुक्त टीम में शामिल थे। उन्होंने बताया कि जनता का भरोसा जीतने में बहुत वक्त लगा था। राणा के मुताबिक कल्लू यादव को मारने के लिए अधिकारियों ने टीम को पूरी छूट दे रखी थी। हमें आधुनिक हथियार भी मिले थे पर कटरी में नेटवर्क के मामले में कल्लू अक्सर पुलिस को गच्चा दे जाता था। 
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कटरी का इलाका (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
राणा ने बताया कि कटरी के गांवों के लोग कल्लू डकैत से खौफ खाते थे। उसे पुलिस के कटरी में उतरने की सूचना जितनी तेजी से मिलती थी, उसके बारे में उतना जल्दी इनपुट पुलिस को नहीं मिल पाता था। गांव के लोग जुबान नहीं खोलते थे। धीरे-धीरे पुलिसकर्मियों ने ग्रामीणों का भरोसा जीता। पुलिस का सूचना तंत्र मजबूत हुआ तो कल्लू का सफाया संभव हुआ। 

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कटरी की जमीनों पर खड़ी फसल - फोटो : अमर उजाला

बांध और सड़कें बनने के बाद लहलहाईं फसलें

कटरी अपराधमुक्त हुई तो बरेली व बदायूं के सीमा क्षेत्र में सन 2012 में पूर्व राज्यसभा सदस्य वीरपाल सिंह यादव के प्रयास से 15 किमी लंबा बांध बनाया गया। बदायूं सीमा में भी कई पुल व बांध बने। कटरी को कस्बों से जोड़ने के लिए कई सड़कें बनाई गईं। साथ ही स्वास्थ्य व शिक्षा की बयार बही तो कटरी के गांव भी मुख्य धारा से जुड़े। बरेली निवासी सीएल शर्मा ने सबसे पहले तजपुरा के ग्रामीणों की लगभग 400 बीघा जमीन खरीदी। इसे हरियाणा के फौजी ने लेकर खेती योग्य बनाकर लोगों को रोजगार से जोड़ा। फिर पंजाब से आए सरदारों ने झाले बनाए।

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किसान सत्येंद्र और गजेंद्र - फोटो : अमर उजाला
इलाके किसान सत्येंद्र का कहना है कि भूमि विवादों का जिक्र छोड़ दें तो यहां लोगों को उन्नत खेती से रोजगार मिला और उनकी आर्थिक दशा सुधरी। बरसों बाद यहां कीमती जमीनों पर कब्जे के लिए रक्तपात हुआ है। खेतों पर जाने से डरते थे लोग डकैतों के कहर से उन दिनों लोग खेतों पर जाने से बचते थे। आज इस तरह का कोई खतरा नहीं है। गांव के तमाम लोग अब फसलों की रखवाली खेतों पर रहकर ही करते हैं। गजेंद्र सिंह बताते हैं कि सड़कों ने खोला तरक्की का रास्ता गांवों के छिटपुट विवादों को छोड़ दें तो लोग मेहनत से खेती कर रहे हैं। यूपी 112 व 108 एंबुलेंस जैसी सेवाओं ने भी गांवों की कई समस्याएं निपटा दी हैं। सड़कों ने तरक्की के द्वार खोले हैं।
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बरेली जोन के एडीजी प्रेम चंद्र मीना - फोटो : अमर उजाला
बरेली जोन के एडीजी प्रेम चंद्र मीना ने कहा कि कटरी में कुछ लोग जमीन की खातिर इस तरह के अपराध कर रहे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। किसानों व जनता को भयमुक्त माहौल देने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। अपराधियों को भू-माफिया घोषित कर उनकी संपत्ति जब्त की जाएगी।
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