छांगुर बाबा तो बस मोहरा है, तार सादुल्लानगर से भी जुड़े हैं। शासन को भेजी गई रिपोर्ट में धर्मांतरण के लिए सादुल्लानगर क्षेत्र को बेहद संवेदनशील बताया गया है। तत्कालीन जिलाधिकारी अरविंद सिंह अपराधियों और पुलिस के गठजोड़ को बेनकाब कर चुके हैं।
छांगुर उर्फ जमालुद्दीन, नीतू उर्फ नसरीन और नवीन...बलरामपुर से पांच प्रदेशों में चल रहे धर्मांतरण के खेल के अब तक यही तीन अहम किरदार सामने आए हैं। पूरा आरोप इन्हीं पर मढ़ा गया और कार्रवाई भी इन्हीं पर केंद्रित रही, लेकिन कुछ जांच एजेंसियों के अनुसार ये तीनों तो बस मोहरे हैं। पूरे खेल का प्रमुख तार सादुल्लानगर क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। धर्मांतरण के मामले में सादुल्लानगर क्षेत्र करीब दस वर्ष से संवेदनशील रहा है। हाल में शासन को भेजी रिपोर्ट में भी इस क्षेत्र की स्थिति चिंताजनक बताई गई है।
12 जून 23 से 28 जून 2024 तक बलरामपुर के जिलाधिकारी रहे अरविंद सिंह ने तो यहां पुलिस और धर्मांतरण करने वालों के गठजोड़ को बेनकाब करते हुए कार्रवाई की संस्तुति भी की थी।
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Chhangur baba case
- फोटो : अमर उजाला
इसी बीच उनका तबादला कर दिया गया और जांच रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई। उनकी रिपोर्ट का असर तत्कालीन एसपी पर भी पड़ा। उन्हें भी हटाया गया। कुछ दिन साइडलाइन रहे। अब अयोध्या मंडल में फिर एक संवेदनशील जिले की जिम्मेदारी मिली हुई है।
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छांगुर बाबा
- फोटो : एएनआई
जांच एजेंसियों के अनुसार बलरामपुर में धर्मांतरण का मुख्य साजिशकर्ता छांगुर, नीतू और नवीन से इतर कोई दूसरा है। उसकी जड़ दुबई, कतर, सऊदी अरब और पाकिस्तान में भी मजबूती से जमी हुई है।
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छांगुर उर्फ जमालुद्दीन
- फोटो : ANI
भारत के साथ ही वह नेपाल में भी धर्मांतरण की मुहिम में शामिल रह चुका है। इस पूरी कहानी को समझने के लिए नेपाल से लगे उत्तर प्रदेश के सात जिलों की स्थिति देखनी और परखनी होगी। फिलहाल पूरा बलरामपुर जिला अब भी सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील बना हुआ है।
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नीतू उर्फ नसरीन व छांगुर।
- फोटो : amar ujala
तत्कालीनन थाना प्रभारी पर लगे गंभीर आरोप
वर्ष 2024 में सादुल्लानगर के तत्कालीन थाना प्रभारी पर गंभीर आरोप लगे। यहां पुलिस और अपराधियों के गठजोड़ की शिकायत अपर मुख्य सचिव गृह एवं गोपन विभाग के साथ ही अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री से भी की गई। 18 जून 2024 में दोनों अधिकारियों को पत्र लिखा गया।
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ईडी की 12 टीमों ने छांगुर के ठिकानों को 13 घंटे खंगाला...अहम दस्तावेज मिले
- फोटो : अमर उजाला
पत्रांक संख्या 2825/जेए/24 के अनुसार प्रभारी निरीक्षक ने तत्कालीन अधिकारियों से मिलीभगत करके पूर्व सपा विधायक और गैंगस्टर आरिफ अनवर हाशमी को संरक्षण प्रदान किया।
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बलरामपुर के मधपुर उतरौला में स्थित छांगुर का घर ईडी की टीम
- फोटो : संवाद
मजिस्ट्रेटी जांच में भी तत्कालीन थानाध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगे, लेकिन थानाध्यक्ष को न हटाया गया और न ही कार्रवाई ही की गई। वह अब भी अधिकारियों का चहेता बनकर दूसरे थाने की कमान संभाले हुए है।
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बलरामपुर के मधपुर उतरौला में स्थित छांगुर का घर ईडी की टीम
- फोटो : एएनआई
मजिस्ट्रेटी जांच का मजमून
अमर उजाला के हाथ लगी मजिस्ट्रेटी जांच रिपोर्ट के अनुसार एक अप्रैल 2024 को जब पुलिस ने आरिफ अनवर हाशमी व उसके भाई मारुफ अनवर हाशमी की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी तब आरिफ अनवर हाशमी भी घर पर मौजूद था, लेकिन उसे तब गिरफ्तार नहीं किया गया। तत्कालीन थानाध्यक्ष ने तब अपनी रिपोर्ट में बताया था कि आरिफ कार्रवाई के दौरान घर पर नहीं था।
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बलरामपुर के मधपुर उतरौला में स्थित छांगुर का घर ईडी की टीम
- फोटो : एएनआई
थाने की जमीन पर बना दी थी मजार
आरिफ अनवर हाशमी ने सादुल्ला नगर थाने की जमीन ही हथिया ली थी। उसने थाने शरीफ शहीदे मिल्लत अब्दुल कद्दूस शाह रहमतउल्लाह अलैह नामक समिति का गठन कर अपने सगे भाई मारूफ अनवर हाशमी को मुतवल्ली नियुक्त कर थाने की जमीन पर मजार बना दिया।
जमालुद्दीन उर्फ छांगुर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यही नहीं, थाने के नाम की जमीन को हटवाकर समिति का नाम भी दर्ज करा दिया। तत्कालीन एसपी चुप रहे, लेकिन मामले की जानकारी होने पर डीएम अरविंद सिंह ने जांच कराई तो पूरा खेल सामने आ गया।