जिस पटाखा फैक्टरी में सोमवार को विस्फोट हुआ, यह फैक्टरी करीब छह महीने पहले अतरासी कलां गांव से सटी आबादी में थी, लेकिन 14 जून 2024 को सूदनपुर स्थित पटाखा फैक्टरी में विस्फोट होने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की सख्ती के बाद इसे जंगल में शिफ्ट कराया गया था।
पटाखा फैक्टरी में धमाका कैसे हुआ, यह सवाल हर कोई जानना चाहता है। डीएम ने भी असलियत का पता लगाने के लिए मजिस्ट्रियल जांच के लिए कमेटी गठित की है लेकिन, पुलिस की प्राथमिक जांच में चौंकाने वाला सच सामने आया है। अफसरों की मानें तो पटाखे में विस्फोटक सामग्री ज्यादा भरने और ठोकने के कारण विस्फोट हुआ।
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मृत महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
अनुभवहीन थे मजदूर
इसका मुख्य कारण पटाखा बनाने वाले मजदूरों को अनुभव नहीं होना है। हर रोज नए मजदूर काम करने फैक्टरी में जा रहे थे। पुराने मजदूर बार-बार नए मजदूरों से पटाखे में ज्यादा विस्फोटक सामग्री नहीं भरने के लिए कहते थे। हादसे के समय भी यही हुआ कि पटाखे में ज्यादा सामग्री भरकर ठोकते समय अचानक चिंगारी निकली और विस्फोट हो गया। यह थ्योरी पुलिस की है, लेकिन डीएम की बनाई जांच कमेटी की रिपोर्ट से धमाके के राज से पर्दा उठेगा।
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अमरोहा पखाटा फैक्टरी हादसे
- फोटो : संवाद
हर दूसरे-तीसरे दिन फैक्टरी आता था मालिक
जिस पटाखा फैक्टरी में सोमवार को विस्फोट हुआ, यह फैक्टरी करीब छह महीने पहले अतरासी कलां गांव से सटी आबादी में थी, लेकिन 14 जून 2024 को सूदनपुर स्थित पटाखा फैक्टरी में विस्फोट होने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की सख्ती के बाद इसे जंगल में शिफ्ट कराया गया था। इस पटाखा फैक्टरी का लाइसेंस 2027 तक है। पटाखा फैक्टरी को संचालित करने वाले हापुड़ निवासी सैफ उर रहमान हर दूसरे तीसरे दिन फैक्टरी पर आते थे।
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अमरोहा पखाटा फैक्टरी हादसे
- फोटो : संवाद
15 दिन से रोज नए मजदूर आ रहे थे
बड़ी बात यह है कि फैक्टरी पर कुछ पुराने व अनुभवी लोग काम करते थे, जबकि पिछले 15 दिन से हर रोज एक-दो नए मजदूर काम करने जा रहे थे। सर्वेश भी सोमवार को पहली दिन काम करने गई थी, जिसकी भी फैक्टरी में हुए विस्फोट में मौत हो गई। इस फैक्टरी में फुलझड़ी के अलावा अनार बम समेत कई तरह की आतिशबाजी तैयार की जाती है। आतिशबाजी में विस्फोटक सामग्री भरते समय बड़ी सावधानी बरती जाती है। पटाखे में विस्फोटक सामग्री भरने के बाद उसे धीरे-धीरे ठोका भी जाता है, लेकिन बिना अनुभव वाले नए मजदूर पटाखे की क्षमता से ज्यादा विस्फोटक सामग्री भर रहे थे। इस संबंध में कई बार पुराने मजदूरों ने चेताया भी था।
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अमरोहा की पटाखा फैक्टरी में हादसा
- फोटो : संवाद
पुलिस की पूछताछ में खुलासा
एसपी अमित कुमार आनंद ने बताया कि पुलिस ने अस्पताल में भर्ती घायलों से पूछताछ की। इसमें सामने आया कि नए मजदूर पटाखे में क्षमता से ज्यादा सामग्री भर रहे थे। सोमवार दोपहर हादसे के समय भी यही हुआ। नए मजदूरों ने आतिशबाजी में सामग्री भरकर ठोकना शुरू किया तभी अचानक चिंगारी निकली और आस-पास में पड़ी विस्फोटक सामग्री को चपेट में ले लिया। इसके बाद पूरी फैक्टरी तेज धमाके के साथ उड़ गई। इस दौरान मजदूरों को खुद को बचाने का भी मौका नहीं मिला।
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अमरोहा पखाटा फैक्टरी में हादसे के बाद गमगीन परिजन
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अधिकांश घायलों के झुलस गए चेहरे
पटाखा फैक्टरी में विस्फोट के दौरान घायल हुए अधिकांश महिलाओं के चेहरे झुलस गए, जबकि कुछ के हाथ पैर बुरी तरह झुलसे हैं। एक महिला की आंख की रोशनी जाने का खतरा बना हुआ है। कोई भी बोलने की स्थिति में नहीं है। डॉक्टरों की मानें तो सभी घायल 40 से 80 प्रतिशत तक झुलसे हुए हैं।
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अमरोहा पखाटा फैक्टरी हादसे
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तेज धमाके के बाद कई मीटर तक फैला मलबा
तेज धमाके के साथ फैक्टरी में विस्फोट के बाद मलवा कई मीटर तक फैल गया। शेड उड़कर दूर जा गिरी, दीवारों की ईंटे इधर-उधर बिखर गईं। मौके पर जो भी पहुंचा, भयावह स्थिति को देखकर दंग रह गया।
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अमरोहा की पटाखा फैक्टरी में हादसा
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प्राकृतिक आपदाओं में मिलता है मुआवजा
डीएम निधि गुप्ता वक्त ने बताया कि दैवीय आपदा के दौरान होने वाली मौत या नुकसान के मामले में आर्थिक सहायता का प्रावधान है, लेकिन यह मानवीय दुर्घटना है। मृतक और घायलों के परिवारों के साथ हमारी संवेदनाएं हैं। परिवार के लोगों से आवेदन करा कर मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए भेजेंगे। जिससे परिवारों को आर्थिक सहायता मुहैया हो सके।
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अमरोहा पटाखा फैक्टरी में विस्फोट
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घायलों के पहुंचते ही फूले स्वास्थ्य कर्मियों के हाथ-पैर
फैक्टरी में विस्फोट के बाद घायलों को तुरंत जिला अस्पताल भेजा गया। जैसे ही एक के बाद एक एंबुलेंस घायलों को लेकर अस्पताल पहुंचीं तो स्वास्थ्य कर्मियों के हाथ-पैर फूल गए। घायलों की हालत देखकर स्वास्थ्य कर्मी दूर हटने लगे, लेकिन डॉक्टरों ने तुरंत घायलों को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया और प्राथमिक उपचार किया। एसपी ने सुरक्षा के लिहाज से वार्ड के बाहर पुलिस तैनात कर दी। इससे बाहर से आने वाले लोगों की भीड़ इकट्ठा न हो सके। सीएमओ डॉ. एसपी सिंह और सीएमएस एके भंडारी ने भी घायलों का हाल जाना। प्राथमिक उपचार के बाद तीन घायलों को जनरल वार्ड में शिफ्ट किया गया है, जबकि गंभीर रूप से घायल नाजरीन और सोनिया को मेरठ के लिए रेफर किया गया है।
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अमरोहा पखाटा फैक्टरी में हादसे के बाद गमगीन परिजन
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पहली बार फैक्टरी में काम पर गई थी सर्वेश
अमरोहा। होनी को कौन टाल सकता है। यह कहावत सर्वेश के परिवार पर सटीक बैठती है। पटाखा फैक्टरी में हुए विस्फोट में जान गंवाने वाली सर्वेश के पति सोविंदर भी मजदूरी करते हैं। उनके परिवार में एक बेटा और दो बेटी हैं। बड़ी बेटी हिमांशी विकलांग है। परिजनों के मुताबिक सर्वेश पहले अमरोहा के एक कारखाने में मजदूरी करती थी। पटाखा फैक्टरी में सोमवार को पहली बार मजदूरी करने गई थी। पहले ही दिन फैक्टरी में विस्फोट होने के कारण सर्वेश की जान चली गई। पत्नी की मौत के बाद पति सोविंदर का पोस्टमार्टम हाउस पर रो-रोकर बुरा हाल था।
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अमरोहा की पटाखा फैक्टरी में हादसा
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पुलिस ने भीड़ को हटाकर संभाले हालत
पटाखा फैक्टरी में धमाके की जानकारी मिलते ही अतरासी कलां समेत आसपास के गांवों के लोगों की भीड़ जमा हो गई। तुरंत ही एसपी अमित कुमार आनंद के अलावा पुलिस अधीक्षक, सीओ सिटी और छह थानों के इंस्पेक्टर फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और घटनास्थल से भीड़ को हटाया।
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अमरोहा पखाटा फैक्टरी में हादसे के बाद गमगीन परिजन
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तेज धमाका और मलबे के नीचे दब गई घायलों चीख
पटाखा फैक्टरी में विस्फोट होने के बाद तुरंत ईंटों की दीवारें धराशायी हो गईं। सभी मजदूर मलबे के नीचे दब गए। किसी को संभलने या चीखने-चिल्लाने का मौका भी नहीं मिला। मौके पर पहुंचे लोगों ने घंटे की मशक्कत के बाद मृतकों और घायलों को मलबे से बाहर निकाला।
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अमरोहा पखाटा फैक्टरी में हादसे के बाद गमगीन परिजन
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सपा विधायक समरपाल सिंह ने जाना हाल
अतरासी कलां के जंगल में पटाखा फैक्टरी में विस्फोट के बाद चार महिलाओं की मौत और नौ मजदूरों के घायल होने की जानकारी मिलते ही नौगांवा सादात विधानसभा सीट से विधायक समरपाल सिंह भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीण और पुलिस के अधिकारियों से हादसे के बारे में जानकारी हासिल की। इसके बाद मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
मेरे लोकसभा क्षेत्र अमरोहा में सोमवार को एक दर्दनाक हादसा हुआ है। एक पटाखा फैक्टरी में हुए धमाके में चार महिला मजदूरों की मौत और नौ गंभीर रूप से घायल अत्यंत विचलित करने वाली खबर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आग्रह है कि पीड़ित परिवारों को मुख्यमंत्री राहत कोष से हरसंभव आर्थिक सहायता दी जाए। - कुंवर दानिश अली, पूर्व सांसद अमरोहा लोकसभा सीट
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अमरोहा पखाटा फैक्टरी में हादसे के बाद गमगीन परिजन
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मारे गए लोगों के परिजनों को मिले एक-एक करोड़ मुआवजा घायलों को 50-50 लाख
भारतीय किसान यूनियन संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने पटाखा फैक्टरी में हुए धमाके में मारे गए मजदूरों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट मौन रखा। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने कहा कि इस घटना में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये और घायलों को 50 लाख रुपये मुआवजा दिलाया जाए। प्रदेश सरकार इस फैक्टरी की जांच करके ऐसी घटनाओं को अंकुश लगाने के लिए जरूरी कार्रवाई करे। इस दौरान राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विजय वीर सिंह, जिला अध्यक्ष राहुल सिद्धू, नितिन चौधरी, चंद्रपाल सिंह, अरुण सिद्धू आदि मौजूद रहे।
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अमरोहा पखाटा फैक्टरी में हादसे के बाद गमगीन परिजन
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मृतकों के परिजनों को मिलें 25-25 लाख : महबूब
सदर विधायक व पूर्व कैबिनेट मंत्री महबूब अली ने गांव अतरासी कलां में हुई पटाखा फैक्टरी में हुए विस्फोट में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त की। वह प्रदेश सरकार से मांग करते हैं कि इस भीषण दुर्घटना में मरने वाले लोगों को 25-25 लाख रुपए तथा सभी घायलों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए।
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अमरोहा की पटाखा फैक्टरी में हादसा
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एक साल पहले भी पटाखा फैक्टरी में हुआ था धमाका, एक की हो गई थी मौत
जिले में बड़े पैमाने पर पटाखा निर्माण का काम होता है। कहीं वैध तो कहीं अवैध तरीके से पटाखा फैक्टरी चल रहीं हैं। ठीक एक साल पहले अतरासी मार्ग स्थित पटाखा फैक्टरी में धमाका हुआ था। इसमें चार मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए थे, जबकि इलाज के दौरान हापुड़ निवासी एक मजदूर की मौत हो गई थी। मामले में हापुड़ के ही रहने वाले पटाखा फैक्टरी मालिक कामरान अहमद के खिलाफ लापरवाही के मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। पटाखा फैक्टरी में आए दिन हो रहे हादसों को लेकर न तो जिला प्रशासन गंभीर है और न काम करने वाले मजदूर।
यह फैक्टरी रजबपुर थानाक्षेत्र के सूदनपुर गांव के रहने वाले हाशिम के घर में चल रही थी। इसे हापुड़ के मोहल्ला शिवगढ़ी निवासी कामरान अहमद चला रहा था। हाशिम ने अपना मकान कामरान अहमद को किराये पर दे रखा था। करीब पांच साल से चल रही इस फैक्टरी में पटाखे तैयार करने के बाद भंडारण किया जाता था। फैक्टरी में हापुड़ के मोहल्ला शिवगढ़ी निवासी भोला, मंगूपुरा गांव निवासी ममता, रीता, देवपुरा गांव निवासी अनीता और मनीषा समेत आठ मजदूर काम कर रहे थे। 14 जून, 2024 को फैक्टरी में मजदूर काम कर रहे थे।
डेढ़ माह पहले रहरा क्षेत्र में भी हुआ था विस्फोट
करीब डेढ़ माह पहले रहरा क्षेत्र में चल रही एक पटाखा फैक्टरी में भी विस्फोट हुआ था। इसमें एक बच्चा झुलस गया था। जिसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, इस मामले में कोई कानूनी कारवाई नहीं हुई थी। यह हादसा तब हुआ था जब आठ साल का बच्चा अपनी मां के साथ फैक्टरी में गया था। उसकी मां 29 अप्रैल 2025 को गांव भावली में बाहरी छोर पर चल रही एक पटाखा फैक्टरी में मजदूरी करने गई थी। मां के साथ बच्चा भी जिद करके फैक्टरी में उसके साथ चला गया था। बच्चा वहां पर फुलझड़ी जलाने लगा था और हादसा हो गया था। अवैध रूप से संचालित इस पटाखा फैक्टरी में फुलझड़ी से लेकर कई तरह से पटाखों का निर्माण और पैकिंग करने का कार्य किया जा रहा था।