सरहद की हिफाजत से लेकर शिक्षा, चिकित्सा और न्याय के क्षेत्र में दखल रखने वाली महिलाएं धर्म-अध्यात्म में पुरुषों से आगे निकल गई हैं। इन दिनों इसका सबसे बड़ा उदाहरण संगम तट पर बसा माघ मेला बन गया है। इस माघ मेले में आए प्रमुख संतों के शिविरों में रामकथा, श्रीमद्भागवत या फिर पुराणों की कथाओं की व्यास युवतियां हैं। कथाएं इनके लिए रोजगार का अहम जरिया ही नहीं, गरिमा और सम्मान का माध्यम भी हैं। अलग-अलग संत परंपरा की ये कथा व्यास महिलाएं राम-कृष्ण के आदर्शों और उनकी लीलाओं से जुड़े प्रसंगों पर संगीतमय प्रवचन से समाज में प्रेम, करुणा, दया का भाव जगाकर भीड़ बटोर रही हैं।