prayagraj news
- फोटो : prayagraj
इसलिए स्वभाव हमेशा ठीक रखना चाहिए। उन्होंने अभावग्रस्त जीवन में आगे बढ़ने और जीने की भी सीख दी। बताया कि अभावों के बीच आने वाली परिस्थितियों को स्वीकार करना चाहिए। फिर तो रास्ते बन जाते हैं। मोरारी बापू का कहना था कि देखने के लिए आंखें होनी चाहिए। आंखें दिखाने के लिए नहीं निरखने के लिए होती हैं। आंखें हमें हमेशा दर्शन का बोध कराती हैं। इस दौरान कथा के संयोजक मिराज ग्रुप के एमडी मदन पालीवाल,रवींद्र जोशी, रूपेश व्यास, विष्णु कांत व्यास, मंत्रराज पालीवाल, महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा समेत तमाम लोगों ने व्यासपीठ की आरती की।