हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री ने रविवार को कहा कि पूंजीवाद और समाजवाद में कोई भी आधारभूत अंतर नहीं है। दोनों ही विचारधारा भौतिक वस्तुओं को मानव के सुख का मूल आधार मानती हैं। प्रो. अग्निहोत्री ने यह बातें अरुंधती वशिष्ठ अनुसंधान पीठ की ओर से दत्तोपंत ठेंगड़ी जन्म शताब्दी व्याख्यान माला ‘वैज्ञानिक समाजवाद-एक अवैज्ञानिक अवधारणा’ में कही।
हाशिमपुर रोड स्थित महावीर भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. अग्निहोत्री ने कहा मार्क्स के अनुसार उत्पादन के साधन सर्वहारा समाज के हाथ में आने पर राज्य का समापन हो जाएगा और उत्पादन के साधन राज्य में निहित होंगे। ऐसे में सभी बराबर श्रम करेंगे और पर्याप्त उत्पादन होने के साथ समान वितरण होगा। इससे खुशहाली आएगी और सभी की खुशहाली के साथ राज्य की कोई आवश्यकता ही नहीं रह जाएगी। लेकिन उसमें मानवीय मनोविज्ञान का अभाव होने के कारण वैज्ञानिक समाजवाद अर्थात कार्ल मार्क्स के सिद्धांत असफल साबित हुए। प्रो. अग्निहोत्री ने कहा कि समाजवाद में समाजवादी नेताओं ने हमेशा उन चीजों को व्यक्ति की खुशी का आधार माना है जो कि पूर्णतया भौतिक वस्तुएं हैं। यहां यह महत्वपूर्ण है कि जिसके लिए निर्णय लिया जा रहा है उसकी इच्छा को कोई महत्व ही नहीं दिया जाता है।