Valentine Day
आंखों ही आंखों में किया प्यार, फिर नंदी बने अभिलाषा के खेवनहार
-नंद गोपाल गुप्ता नंदी, स्टांप मंत्री
-अभिलाषा गुप्ता नंदी, महापौर, प्रयागराज
संघर्षरत व्यवसायी रहे नंद गोपाल गुप्ता को घर के सामने से रोज आने जाने वाली अभिलाषा मिश्रा से आंखों ही आंखों में प्यार हो गया। 1992 में इसका इजहार हुआ तो दोनों में रजामंदी हुई, पर जीवन साथी बनने के निर्णय में जातीय बंधन बाधा बन गया। चूंकि अभिलाषा के भाई नंदी के दोस्त थे इसलिए बात कुछ आगे बढ़ी, लेकिन विवाह के नाम पर रजामंदी में नानुकर होती रही। बस फिर क्या था दोनों ने जिंदगी साथ बिताने का साहसिक निर्णय लिया। 1994 में 11 अगस्त को दोनों ने जबलपुर में कोर्ट मैरिज कर नागपुर में नंदी के ताऊ के घर को ठिकाना बनाया। आखिर प्यार की जीत हुई। दोनों परिवारों ने विवाह की सहमति दी तो प्रेम विवाह करने वाली यह जोड़ी आज सफलता के मायने बताने की मोहताज नहीं है। संघर्षमयी व्यापारी नंदी ने अभिलाषा के साथ के बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। व्यापार के साथ राजनीति में उनकी सफलता बिरले ही पाते हैं। खुद तो विधायक और मंत्री बने ही, अभिलाषा को एक नहीं दो बार शहर का महापौर का चुनाव जीतना उनके प्यार वाले राजनीति कौशल का परिचायक है। शायद तभी शहर के हर तीसरे घर में लोग अपने साथ नंदी-अभिलाषा का फोटो लगाकर खुद को उनका नजदीकी बताने से नहीं चूकते।