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वैलेंटाइन डे: शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारियों की प्रेम कहानी, पहले करियर, फिर किया प्यार का इजहार

Thu, 14 Feb 2019 10:34 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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Valentine Day - फोटो : Social Media
14 फरवरी यानि वैलेंटाइन डे। प्यार का दिन। इस मौके पर हम आज शीर्ष पदों पर बैठे कुछ ऐसे लोगों के अनुभव को साझा कर रहे हैं, जिन्होंने न सिर्फ प्यार किया बल्कि, उन्हें ही अपना जीवन साथी भी चुना। लेकिन प्यार से पहले उन्होंने करियर को तवज्जो दी। लक्ष्य हासिल करने के बाद ही प्यार का इजहार किया या अपने मीठे रिश्ते को पति-पत्नि का नाम दिया। युवाओं के लिए उनका साफ संदेश है कि हर काम का एक समय है। सच्चा प्यार है तो वह इंतजार कर लेगा, लेकिन समय की कीमत नहीं पहचानी तो सपने पीछे छूट जाएंगे।
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जिससे प्यार उसी से शादी 
प्यार, प्यार. प्यार... कहते हैं सच्चा प्यार पहली नजर में ही हो जाता है, ऐसे में उम्र की सीमा या अन्य बंधन बेमानी हो जाते हैं। हमारे बीच कई ऐसे जोड़े मिसाल बने हैं, जो प्यार, इकरार और विवाह के बंधन में बंधकर सफलता की सीढ़ियां चढ़ते गए। करियर में प्यार और विश्वास सहायक बना, सभी अपने-अपने क्षेत्रों के जाने माने नाम हैं। इन लोगों ने प्यार के न केवल सार्थक मायने बताए बल्कि करियर को साधते हुए समाज के लिए आदर्श बने हैं। 
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Valentine Day
ताज नगरी में प्यार, जेल के सामने किया इकरार
कॅरियर की पहली सीढ़ी चढ़े जिलाधिकारी सुहास एलवाई ट्रेनिंग पर आगरा पोस्ट हुए। वहीं ऋतु शर्मा एसडीएम थीं। काम की प्रतिस्पर्धा के दौरान दोनों के विचार मिले और प्यार की निशानी ताज नगरी में दोनों के आंखों ही आंखों में प्यार हो गया। विचारों के साथ कृष्ण भक्ति में समानता निकटता का कारण बनी। अचानक एक दिन चुनाव की तैयारियों के दौरान अंधड़ के कारण मौसम खराब हो गया। आगरा जेल के सामने पैदल जा रहे दोनों अफसरों को एक पेड़ की छांव में बचाव के लिए रुकना पड़ा। बस यहीं मौका देख सुहास ने प्यार का इजहार किया तो ऋतु ने इकरार भी किया।

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Valentine Day
इस प्यार में न भाषा बाधा बनी, न ही रीति रिवाज। दोनों परिवारों ने प्यार को परवान चढ़ाते हुए दोनों के विवाह की रजामंदी दे दी। चेन्नई में हुई शादी के बाद सुहास ऋतु दंपति आज सफल अफसरों में हैं। दोनों की खेल में रुचि है, एक दूसरे के वे प्रेरणास्त्रोत भी हैं। प्रतिकूल परिस्थितियों में व्यस्तता के बीच वह न केवल कर्म क्षेत्र में पूरा ध्यान देते हैं बल्कि परिवार और बच्चों के साथ समय बिताना नहीं भूलते। 

-सुहास एलवाई, जिलाधिकारी प्रयागराज
-ऋतु सुहास, अपर नगर अधिकारी नगर निगम
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आंखों ही आंखों में किया प्यार, फिर नंदी बने अभिलाषा के खेवनहार
-नंद गोपाल गुप्ता नंदी, स्टांप मंत्री
-अभिलाषा गुप्ता नंदी, महापौर, प्रयागराज

संघर्षरत व्यवसायी रहे नंद गोपाल गुप्ता को घर के सामने से रोज आने जाने वाली अभिलाषा मिश्रा से आंखों ही आंखों में प्यार हो गया। 1992 में इसका इजहार हुआ तो दोनों में रजामंदी हुई, पर जीवन साथी बनने के निर्णय में जातीय बंधन बाधा बन गया। चूंकि अभिलाषा के भाई नंदी के दोस्त थे इसलिए बात कुछ आगे बढ़ी, लेकिन विवाह के नाम पर रजामंदी में नानुकर होती रही। बस फिर क्या था दोनों ने जिंदगी साथ बिताने का साहसिक निर्णय लिया। 1994 में 11 अगस्त को दोनों ने जबलपुर में कोर्ट मैरिज कर नागपुर में नंदी के ताऊ के घर को ठिकाना बनाया। आखिर प्यार की जीत हुई। दोनों परिवारों ने विवाह की सहमति दी तो प्रेम विवाह करने वाली यह जोड़ी आज सफलता के मायने बताने की मोहताज नहीं है। संघर्षमयी व्यापारी नंदी ने अभिलाषा  के साथ के बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। व्यापार के साथ राजनीति में उनकी सफलता बिरले ही पाते हैं। खुद तो विधायक और मंत्री बने ही, अभिलाषा को एक नहीं दो बार शहर का महापौर का चुनाव जीतना उनके प्यार वाले राजनीति कौशल का परिचायक है। शायद तभी शहर के हर तीसरे घर में लोग अपने साथ नंदी-अभिलाषा का फोटो लगाकर खुद को उनका नजदीकी बताने से नहीं चूकते। 
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Valentine Day
चिड़ियाघर में देखा तो प्यार हो गया....
-डॉ. धनेश अग्रहरि, पीडियाट्रिक सर्जन
-डॉ. अमृता अग्रहरि, स्त्री प्रसूति रोग विशेषज्ञ
एक गंगा किनारे वाला छोरा और एक बिहार की बाला, है न अजीब लेकिन कहानी बिल्कुल सही है। ईसीसी के मेधावी छात्र रहे डॉ. धनेश शहर के इकलौते पीडियाट्रिक सर्जन हैं। वर्ष १९९५ में वह पटना गए थे। वहां चिडिय़ाघर घूमने गए तो डॉ. अमृता को देखकर दिल दे बैठे। ताज्जुब तब हुआ जब दोनों को बातचीत में पता चला कि वे एमबीबीएस के ही छात्र हैं। बस फिर क्या था, दोनों ने घर में प्यार की बात बताई तो बाजी जीत की हो गई। दोनों ने प्यार होने के कुल सात-आठ महीने बाद ही एक फरवरी 1996 में उनकी शादी हो गई। धनेश बताते हैं कि उनके कॅरियर को धार देने में अमृता की प्रेरणा काम आई, वहीं अमृता अपने डॉक्टरी कौशल को धनेश का प्रोत्साहन बताते हैं। दोनों में तकरार होती नहीं, कारण कोई हो मनुहार तो डॉ. धनेश करते हैं। उनका कहना है कि विश्वास भरे इस जीवन में बच्चों का भविष्य संवारना और मरीजों की सेवा करना लक्ष्य है। शायद तभी बड़ी बेटी डॉक्टरी के फाइनल इयर में है और बेटा राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी है। 
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Valentine Day
प्यार किया पर इजहार नहीं, सीनियर ने करा दिया ब्याह
-डॉ. मनोज भार्गव, एमडी मेडिसिन
-डॉ. नीरा भार्गव, एमडी मेडिसिन

80 के दशक में मेडिकल कॉलेज के दिनों की बात है। एमबीबीएस की कठिन पढ़ाई फिर घर परिवार की जिम्मेदारी। एक साल बैच के सीनियर डॉ. मनोज भार्गव जूनियर बैच की डॉ. नीरा की डायग्नोसिस से प्र्रभावित थे। मन में आकर्र्षण था प्यार का लेकिन इजहार करने का संकोच ऐसा कि होंठों तक बात ही न आ पाती। यह भांप लिया डॉ. मनोज की सीनियर और पारिवारिक डॉ. मनीषा द्विेदी ने और कहा, मनोज मां से बात करूं क्या, बस फिर क्या था, डॉ. मनोज को तो जैसे मुराद मिल गई, हां में सिर हिलाकर उनके चैंबर से बाहर होकर घर पहुंचे तो घर में डॉ. मनीषा मौजूद थीं और मां समेत सभी सदस्य अजीब सी नजरों से देख रहे थे। खैर बात बनी दोनों ने एमडी करने के बाद 1982 में बिना प्यार के इकरार के हुई शादी आज चिकित्सकों में तालमेल की मिसाल बनी है। व्यस्तता के बीच बेटा और बेटी की सही परवरिश ऐसी कि दोनों डॉक्टर बने हैं। बेटा मुकुल भार्गव डीएम कार्डियोलॉजी है जबकि बेटी मुदिता एमडी की प्रीपरेशन में है। पुत्रवधू आस्था भी बेटे के समकक्ष डॉक्टर है। 
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