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UP Board Result : सफलता के मामले में हाईस्कूल में भदोही और इंटर में लखनऊ जनपद प्रदेश में बना अव्वल

Thu, 23 Apr 2026 07:49 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

यूपी बोर्ड के 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणाम में सर्वाधिक छात्र-छात्राओं की सफलता के मामले में इस बार भदोही और लखनऊ का दबदबा है। 10वीं में प्रदेशभर के 75 जिलों में से भदोही के सर्वाधिक छात्र-छात्राओं को सफलता मिली है।
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यूपी बोर्ड परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद सेंट एंथाेनी इंटर कॉलेज में खुशी मनाती छात्राएं। - फोटो : अमर उजाला।

यूपी बोर्ड के 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणाम में सर्वाधिक छात्र-छात्राओं की सफलता के मामले में इस बार भदोही और लखनऊ का दबदबा है। 10वीं में प्रदेशभर के 75 जिलों में से भदोही के सर्वाधिक छात्र-छात्राओं को सफलता मिली है। 12वीं में राजधानी लखनऊ के परीक्षार्थी आगे रहे। वैसे तो हाईस्कूल में 90.42 प्रतिशत परीक्षार्थियों को सफलता मिली है लेकिन भदोही के 95.78 प्रतिशत परीक्षार्थियों ने बाजी मारी है।

इसी तरह इंटर में ओवरऑल उत्तीर्ण प्रतिशत 80.38 फीसदी रहा, लेकिन लखनऊ के 89.17 फीसदी परीक्षार्थियों को सफलता मिली। पिछले वर्ष 2025 में हाईस्कूल में आगरा सूबे में अव्वल था। इंटर में अमेठी में सबसे अधिक छात्र-छात्राएं पास हुए थे। इस वर्ष आगरा सूबे में दूसरे स्थान पर पहुंच गया। हालांकि, दूसरे स्थान पर होने के बावजूद आगरा का उत्तीर्ण प्रतिशत 2025 के मुकाबले अधिक रहा। वर्ष 2025 में आगरा में 94.99 फीसदी परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए।

इस बार यहां का उत्तीर्ण प्रतिशत 95.40 फीसदी रहा। इसी तरह इंटर में पिछले वर्ष अमेठी नंबर एक पर था। तब वहां 92.65 फीसदी परीक्षार्थी पास हुए थे। इस बार लखनऊ का उत्तीर्ण प्रतिशत 89.17 फीसदी रहा। खास बात यह रही कि इंटर में इस बार किसी भी जिले का उत्तीर्ण प्रतिशत 90 फीसदी को पार नहीं कर सका, जबकि 2025 में अमेठी एवं अमरोहा का उत्तीर्ण प्रतिशत 90 फीसदी के ऊपर था। इस बार अमेठी दूसरे एवं अमरोहा तीसरे स्थान पर रहा।

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यूपी बोर्ड परीक्षा का परिणाम जारी करते सभापति और निदेशक। - फोटो : अमर उजाला।

प्रयागराज का सफलता प्रतिशत गिरा

आबादी के लिहाज से सूबे के सबसे बड़े जिले प्रयागराज के सफलता प्रतिशत में इस बार बड़ी गिरावट आई है। इंटरमीडिएट के परीक्षा परिणाम में प्रयागराज 71वें पायदान पर आ गया। यहां का उत्तीर्ण प्रतिशत 74.29 फीसदी रहा। वर्ष 2025 में प्रयागराज सूबे में 37वें स्थान पर था। हालांकि, हाईस्कूल में उत्तीर्ण प्रतिशत 95.36 फीसदी के साथ सूबे में तीसरे स्थान पर है।


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यूपी बोर्ड परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद ज्वाला देवी इंटर कॉलेज में खुशी मनाते छात्र छात् - फोटो : अमर उजाला।

12वीं में देवरिया और 10वीं में ललितपुर सबसे पीछे

यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में प्रदेश के 75 जिलों में ललितपुर सबसे पीछे रहा। यहां 80.22 फीसदी परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए। वर्ष 2025 में भी ललितपुर का प्रदर्शन अच्छा नहीं था। तब वह सूबे में 74वें स्थान पर आया था। इसी तरह इंटर में इस बार देवरिया एकमात्र ऐसा जिला रहा जहां का उत्तीर्ण प्रतिशत 70 फीसदी से कम रहा। यहां 66.82 फीसदी ही परीक्षार्थी पास हो सके। 2025 में देवरिया 43वें स्थान पर आया था। तब यहां 81.80 फीसदी परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए थे। इसी तरह हाईस्कूल में लखीमपुर खीरी इस बार 72वें से 73वें स्थान पर पहुंच गया। यहां का उत्तीर्ण प्रतिशत 83.76 फीसदी रहा।

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यूपी बोर्ड परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद आर्य कन्या इंटर कॉलेज में खुशी मनाती छात्राएं। - फोटो : अमर उजाला।

हाईस्कूल के टॉप टेन जिले

  • जिला : उत्तीर्ण प्रतिशत
  • भदोही : 95.78
  • आगरा : 95.40
  • प्रयागराज : 95.36
  • कानपुर नगर : 95.20
  • कुशीनगर : 93.99
  • अमरोहा : 93.74
  • मेरठ : 93.59
  • गौतम बुद्ध नगर : 93.49
  • संत कबीर नगर : 93.34
  • मथुरा : 93.27
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यूपी बोर्ड परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद आर्य कन्या इंटर कॉलेज में खुशी मनाती छात्राएं। - फोटो : अमर उजाला।

इंटरमीडिएट में टॉप टेन जिले

  • जिला : उत्तीर्ण प्रतिशत
  • लखनऊ : 89.17
  • अमेठी : 88.96
  • अमरोहा : 88.87
  • गोंडा : 88.82
  • चित्रकूट : 88.39
  • फतेहपुर : 87.79
  • मुरादाबाद : 87.45
  • गाजियाबाद : 87.24
  • महाराजगंज : 87.11
  • हापुड़ : 87.10
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कम अंक या असफलता से न हों निराश, दोबारा मेहनत से पाएं सफलता

यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा में कम अंक पाने वाले या असफल हुए विद्यार्थियों को निराश होने की जरूरत नहीं है। माध्यमिक शिक्षा परिषद के उप सचिव व मनोवैज्ञानिक डॉ. आनंद त्रिपाठी ने बताया कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा छात्रों के जीवन की पहली बड़ी परीक्षा होती है। लेकिन इसके अंक भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं या कॅरिअर में निर्णायक नहीं होते है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि नौकरी के दौरान 10वीं-12वीं के अंक अधिक महत्व नहीं रखते है। ऐसे में कम नंबर या असफलता को लेकर तनाव लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि कई बार कुछ विषय छात्रों की रुचि के नहीं होते है। इस वजह से अंक प्रभावित होते हैं। ऐसे में हताश होने के बजाय अपनी कमजोरियों को पहचान कर सुधार की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। असफलता को सफलता की पहली सीढ़ी बताते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से हौसला बनाए रखने की अपील की।
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जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) पीएन सिंह ने भी विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए बताया कि कम अंक आने या असफल होने पर निराशा स्वाभाविक है, लेकिन यही समय खुद का आकलन करने का होता है। उन्होंने बताया कि हर सफल व्यक्ति ने जीवन में असफलता का सामना किया है। जरूरी यह है कि छात्र अपनी कमियों को पहचानें और उनमें सुधार करें। उन्होंने यह भी कहा कि जीवन में केवल अंकों का नहीं बल्कि प्रतिभा, कौशल और शिक्षा का महत्व अधिक होता है। सफलता और असफलता दोनों ही जीवन के अभिन्न अंग हैं, इसलिए इन्हें स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना ही सफलता का सही मार्ग है।
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