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कुंभ मेला 2019: अलबेले संतों के माथे पर निराले तिलक, इससे होती है उनके अराध्य देव की पहचान

Tue, 15 Jan 2019 07:11 PM IST
vivek shukla पंकज प्रसून, अमर उजाला, प्रयागराज
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कुंभ नगरी में देश-दुनिया के तमाम जगहों से आए संतों का निराला संसार देखने को मिल रहा है। इससे ज्यादा अनोखा है उनके माथे पर अलग-अलग रंग और आकार में लगा तिलक। आदि शंकराचार्य की स्थापित की हुई सनातन संंस्कृति जितनी पुरानी है, माथे पर तिलक लगाने की परंपरा भी तभी से चली आ रही है। हर संप्रदाय से जुड़े संन्यासियों के माथे का तिलक भी अलग होता है। इसका साक्षात दर्शन कुंभ में किया जा सकता है।
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संतों के दो संप्रदाय हैं शैव और वैष्णव। शैव यानि आदिदेव भगवान शंकर को पूजने वाले संत त्रिपुंड आकर का तिलक लगाते हैं। इसी तरह वैष्णव संप्रदाय से जड़े संत भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण और भगवान विष्णु के उपासक होते हैं। वैष्णव संत उर्ध्व पुंड तिलक लगाते हैं।
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इसी तरह रामानुजाचार्यों में माथे के बीच में श्री का तिलक और किनारे किनारे सफेद रंग की तिलक लगाते हैं। श्यामनंदी और निम्बार्कचार्य संप्रदाय के संत लाल श्री की जगह काली बिंदी लगाते हैं।  इसमें कुछ संत सिर्फ काली बिंदी लगाते हैं तो कुछ बिंदी के साथ चंदन की धारियों को भी मस्तक पर सजाते हैं। स्वामी नारायण संप्रदाय से जुड़े संत सिर्फ लाल बिंदी लगाते है।

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इसी तरह इस्कान और योगदा सत्संग सोसाइटी से जुड़े संतों और श्रद्धालुओं के माथे पर लगाया जाने वाले तिलक का प्रकार भी अनोखा है। इस्कान से जुड़े श्रद्धालु दीपक रायजादा ने बताया कि उनकी परंपरा में माथे के साथ गले में भी तिलक लगाया जाएगा।
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तिलक राम का पूजन शिव का
वैष्णव और शैव संप्रदाय के लोगो के देवताऔं और तिलक में अजीब से विरोधाभास है। शैव लोग अपना आराध्य देव शिव को मानते हैं, लेकिन अपने माथे पर जो तिलक लगाते हैं, वह राम के धनुष के आकार की तरह होता है। इसी तरह वैष्णव संप्रदाय के लोग अपना आराध्य श्रीराम, श्रीकृष्ण और विष्णु को मानते हैं लेकिन इनके माथे पर जो तिलक होता है उसका आकार शिव के त्रिशूल की तरह होता है। रामानुजाचार्य हंसदेवाचार्य ने बताया कि तिलक की परंपरा सनातन से चली आ रही है। शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि राम ने शिव की आराधना की थी और शिव ने राम की। यही वजह है कि दोनों संप्रदायों के आराध्य भले अलग हो लेकिन तिलक से वे एक हो जाते हैं।

 
तिलक के यह भी रंग
संंन्यासी लोग भस्म का तिलक लगाते हैं,
सामान्य संत चंदन और मलयागिरी का तिलक लगाते हैँ
तिलक शत, रज और तम तीनों का प्रतीक माना जाता है।
 
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