कुंभ मेले के पूर्व दारागंज में उत्तर रेलवे की ओर से करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए प्रयागघाट (अब प्रयागराज संगम) स्टेशन पर यात्रियों को एक कप चाय के लिए भी भटकना पड़ता है। रेलवे ने इस स्टेशन को टर्मिनल के रूप में विकसित किया है। यहां से हर रोज गंगा गोमती, नौचंदी एक्सप्रेस समेत 16 ट्रेनों की शुरूआत भी हो रही है लेकिन, सौ करोड़ की लागत वाले इस स्टेशन पर खानपान का एक भी स्टॉल नहीं है। पिछले वर्ष सितंबर माह में डीआरएम लखनऊ ने शीघ्र ही खानपान के स्टॉल खोलने की बात कही थी लेकिन अब उस बात को हुए भी छह माह से ज्यादा का वक्त बीत गया है।
कुंभ मेले के पूर्व ही प्रयागराज संगम स्टेशन को टर्मिनल के रूप में विकसित किया गया। तब इस कार्य में 95.28 करोड़ रुपये खर्च हुए। कुंभ संपन्न होने के बाद ही यहां एक और तल का निर्माण किया। इस तरह से स्टेशन को विकसित करने में सौ करोड़ से ज्यादा का खर्च हुआ। प्रयागराज संगम स्टेशन पर प्रतीक्षालय, अनारक्षित काउंटर, आरक्षित काउंटर आदि की सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां से नियमित रूप से नौचंदी, गंगा गोमती समेत 16 ट्रेनों की शुरूआत होती है। हजारों यात्रियों की आवाजाही होने के बावजूद यहां खानपान का एक भी स्टॉल नहीं है। स्टॉल न होने की वजह से हरिद्वार एक्सप्रेस, ऊंचाहार , लखनऊ इंटरसिटी आदि एक्सप्रेस ट्रेनों से सफर करने वाले यात्रियों को पानी, चाय आदि के लिए स्टेशन परिसर से बाहर आना पड़ता है। इस आपाधापी में कभी कभार यात्रियों की ट्रेन भी छूट जाती है।