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रेलमंत्री जी, सौ करोड़ के स्टेशन पर यात्रियों को चाय तक नसीब नहीं

Sun, 23 Feb 2020 02:52 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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prayagraj news - फोटो : prayagraj
 कुंभ मेले के पूर्व दारागंज में उत्तर रेलवे की ओर से करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए प्रयागघाट (अब प्रयागराज संगम) स्टेशन पर यात्रियों को एक कप चाय के लिए भी भटकना पड़ता है। रेलवे ने इस स्टेशन को टर्मिनल के रूप में विकसित किया है। यहां से हर रोज गंगा गोमती, नौचंदी एक्सप्रेस समेत 16 ट्रेनों की शुरूआत भी हो रही है लेकिन, सौ करोड़ की लागत वाले इस स्टेशन पर खानपान का एक भी स्टॉल नहीं है। पिछले वर्ष सितंबर माह में डीआरएम लखनऊ ने शीघ्र ही खानपान के स्टॉल खोलने की बात कही थी लेकिन अब उस बात को हुए भी छह माह से ज्यादा का वक्त बीत गया है।

कुंभ मेले के पूर्व ही प्रयागराज संगम स्टेशन को टर्मिनल के रूप में विकसित किया गया। तब इस कार्य में 95.28 करोड़ रुपये खर्च हुए। कुंभ संपन्न होने के बाद ही यहां एक और तल का निर्माण किया। इस तरह से स्टेशन को विकसित करने में सौ करोड़ से ज्यादा का खर्च हुआ। प्रयागराज संगम स्टेशन पर प्रतीक्षालय, अनारक्षित काउंटर, आरक्षित काउंटर आदि की सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां से नियमित रूप से नौचंदी, गंगा गोमती समेत 16 ट्रेनों की शुरूआत होती है। हजारों यात्रियों की आवाजाही होने के बावजूद यहां खानपान का एक भी स्टॉल नहीं है। स्टॉल न होने की वजह से हरिद्वार एक्सप्रेस, ऊंचाहार , लखनऊ इंटरसिटी आदि एक्सप्रेस ट्रेनों से सफर करने वाले यात्रियों को पानी, चाय आदि के लिए स्टेशन परिसर से बाहर आना पड़ता है। इस आपाधापी में कभी कभार यात्रियों की ट्रेन भी छूट जाती है।
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prayagraj news - फोटो : prayagraj
सितंबर 2019 में यह मामला अमर उजाला ने उठाया तो डीआरएम लखनऊ संजय त्रिपाठी ने शीघ्र ही स्टॉल खोले जाने का आश्वासन दिया। लेकिन उनके द्वारा दिए गए आश्वासन का छह माह से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। इस बीच हर रोज यात्रियों को यहां खानपान के लिए परेशानी होती है। कुंडा जाने वाले दैनिक यात्री नागेंद्र सिंह, वरुण केसरवानी ने कहा कि रेलमंत्री रविवार को आ रहे हैं। अब उन्हीं से उम्मीद है कि इस स्टेशन पर खानपान का स्टॉल खोेले जाने का वह निर्देश दें। 

एनसीआर में होता प्रयागराज संगम तो खुल गए होते स्टाल

प्रयागराज संगम स्टेशन उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के अधीन है। इस वजह से यहां सभी दिशा निर्देश एवं कागजी कार्रवाई लखनऊ से ही होती है। बताया जा रहा है कि अगर यह स्टेशन उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज मंडल के अधीन होता तो इस समस्या का कुंभ के बाद ही समाधान हो जाता। क्योंकि जीएम एनसीआर, डीआरएम प्रयागराज आदि वरिष्ठ अफसर के कार्यालय प्रयागराज में ही है। ऐेसे में स्टेशन की मॉनीटरिंग भी बेहतर होती। यही हाल प्रयागराज रामबाग का भी है। प्रयाग जंक्शन पर भी कई वर्ष तक खानपान के स्टॉल नहीं थे। 
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