संगम पर वर्ष भर पहले जिन पांच सफाई कर्मियों के पांव पखारकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व पटल पर मानवता का संदेश दिया था, शनिवार को सामाजिक सहकारिता शिविर में उनको पूछा तक नहीं गया। इससे वे निराश ही नहीं, बेहद आहत भी हुए हैं। हालांकि पीएम के जेहन में वे अब भी बने हुए हैं, लेकिन आयोजकों की उपेक्षा को लेकर देर शाम उनकी नाराजगी सामने आ गई। उन्हें इस बात का मलाल है कि मंच स्थल से महज सौ मीटर की दूरी पर वह स्वच्छता की अपनी ड्यूटी निभाते रहे, लेकिन पीएम के याद करने के बाद भी उनके करीब जाने का मौका तक नहीं दिया गया।
हालांकि प्रशासन भले ही उन सफाई कर्मियों को भूल गया हो, लेकिन पीएम मोदी के जेहनोदिल में वे अब भी बने हुए हैं। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह था कि पीएम ने अपने भाषण की शुरुआत ही कुंभ की उन्हीं स्मृतियों को साझा करते हुए किया, जब उन्होंने उसी परेड मैदान में सफाई दूतों के पांव पखारे थे। पीएम ने प्रयागराज की अध्यात्मिक महिमा का भी बखान करते हुए कहा कि इस धरा पर आकर उन्हें हमेशा ही एक अलग पवित्रता और ऊर्जा का एहसास होता है।