गुरु कुम्हार शिष कुंब है गढ़ि-गढ़ि काढ़ै खोट...। गुरु पूर्णिमा पर ज्ञान के प्रतीक गुरुओं की पीठों, आश्रमों, मठों, मंदिरों में तन-मन के अंधकार रूपी विकारों को दूर करने के लिए शिष्यों की भीड़ लग गई। कहीं आस्था पूर्वक पादुका पूजन हुआ तो कहीं अभिषेक और आरती उतारी गई। गुरुओं के दर्शन तक शिष्य निहाल हुए।
मठ बांघबरी गद्दी में बृहस्पतिवार को सुबह ब्रह्ममुहूर्त में चार बजे पूजन शुरू हुआ। भगवान बांघबरेश्वर महादेव का पूजन 101 ब्राह्माचार्यों ने किया। मठ के महंत बलबीर गिरि महाराज से शिष्यों ने गुरु दीक्षा ली। सुबह सात बजे गुरुदेव महंत नरेंद्र गिरि महाराज की समाधि पर अभिषेक व गुरु पूजन किया गया। दीक्षा के लिए मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, दक्षिण समेत अन्य राज्यों से शिष्यमंडली आई। दोपहर 12 बजे लगभग दस हजार भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। मठ की भव्य सजावट की गई।
यमुना तट स्थित मनकामेश्वर मंदिर में महंत श्रीधरानंद ब्रह्मचारी महाराज ने पादुका पूजन किया। 11 आचार्य ने पूजन कराया। महापौर गणेश केसरवानी, भाजपा नेता रईस चंद्र शुक्ला, रघुनाथ द्विवेदी, मनीष त्रिपाठी, अवधेश त्रिपाठी, अनूप त्रिपाठी, आलोक पांडे, कृष्णानंद पांडे, प्रणव त्रिपाठी ने शंकराचार्य महाराज की पादुकाओं का पूजन किया। आचार्य विद्याकांत पांडे और आचार्य रामचंद्र शुक्ल के नेतृत्व में संपन्न हुआ।