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तस्वीरें: नागा संन्यासियों के पास हैं कई राज, ऐसे ही नहीं लगाते भभूति

Sat, 19 Jan 2019 04:22 PM IST
shubham न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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Naga Sadhu
प्रयागराज के कुंभ मेले में अगर कोई सबसे अधिक ध्यान श्रद्धालुओं की अपनी ओर खींच रहा है, तो वे हैं संन्यासी। इनमें भी लोग नागा संन्यासियों की तरफ ज्यादा खिंचे चले आ रहे हैं। इनके श्रृंगार और इनके शरीर पर लगी हुई भभूति चर्चा का बिषय बने रहते हैं। लोग जानना चाहते हैं कि ये कैसे रहते हैं, कैसे अपना जीवन निर्वाह करते हैं। हम आपको इनके भभूति बनाने के प्रक्रिया को बताने जा रहे हैं।
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Naga Sadhu
नागा संन्यासी पूरे शरीर पर भभूति लपटने के बाद और भी रहस्यमयी नजर आने लगते हैं लेकिन, यह कोई सामान्य भभूति नहीं होती। बल्कि लंबी क्रिया के बाद तैयार होने वाली एक खास तरह की भभूति होती है। इसे तैयार करने में घंटों लगते हैं।
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female naga sadhu - फोटो : Social Media
इसे तैयार करने के लिए नागाओं को खासा अभ्यास करना पड़ता है। उसके बाद ही वह इसमें दक्ष हो पाते हैं। भभूति नागा संन्यासियों के सामने हमेशा प्रज्ज्वलित रहने वाली धूना से बनती है लेकिन, वहां से निकालकर इसे सीधे धारण नहीं किया जाता बल्कि उसे कई विधियों से तैयार किया जाता है।

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Naga sadhu - फोटो : Twitter
धूने में सिर्फ बड़, आंवले, बेल, मदार की लकड़ियां ही इस्तेमाल में आती हैं। इससे निकली भभूति में चंदन मिलाकर गाय के उपले में जलाया जाता है। इसके पूरी तरह भस्म हो जाने पर इसे छानकर अलग किया जाता है। उसके बाद इसमें गाय का कच्चा दूध और चंदन मिलाकर इसके लड्डू बनाए जाते हैं। इसके बाद इसको फिर से जलाते हैं।
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Naga Sadhu
जितना बचता है, उसे छानकर फिर अलग करते हैं। एक हिस्से में गंगा जल मिलाकर अलग कर दिया जाता है, उसे गंग भभूति कहते हैं जबकि दूसरे हिस्से को देव भभूति कहते हैं। उसमें कच्चा दूध मिलाकर उसे ही नागा शरीर पर धारण करते हैं। शाही स्नान से पहले सभी नागा अपनी परंपरा के मुताबिक अपने शरीर में इसे लपेटकर स्नान को जाते हैं।
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