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Mahakumbh 2025: कई तरह के होते हैं नागा साधु, जानिए नागा और खूनी नागा में अंतर; अफगान सेना देख चुकी रौद्र रूप

सार

महाकुंभ नगरी से नागाओं के जाने का सिलसिला जारी है लेकिन इनसे जुड़ी बातों अभी भी लोगों को आकर्षित कर रही हैं। नागा अखाड़ों की व्यवस्था और इनके बारे में जानने के लिए एक बार फिर से नागाओं के शिविरों में भ्रमण किया। जब आप इनको बहुत करीब से देखते और महसूस करते हैं तो आपको पता चलता है कि हर नागा साधु का भाव अलग-अलग होता है। कोई आपको शांत और गंभीर नजर आएगा तो कोई आपको बेहद आक्रामक। आखिर क्या है इनके इन भावों का रहस्य? 
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नागा साधुओं का इतिहास - फोटो : PTI
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नागा साधुओं के भावों को जानने के लिए सेक्टर 19 में एक नागा संन्यासी से संपर्क किया गया। उनका कहना था कि नागाओं की आक्रामक होना तो बहुत ही स्वभाविक है, क्योंकि वो एक योद्धा होते हैं। आदिगुरु शंकराचार्य ने उन्हें बनाया ही इसी लिए है कि वो सनातन की रक्षा करें। आदिगुरु ने तो कहा ही था कि जब तक एक हाथ में शास्त्र और दूसरे हाथ में शस्त्र न हो तो धर्म की रक्षा करना मुश्किल है, फिर भी आप जो नागाओं के स्वरूपों में बदलाव देखते हैं वो उनके दीक्षा के कारण भी होता है। कौन-सा नागा किस तरह का भाव में रखेगा यह उसकी दीक्षा पर निर्भर करता है। 
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नागा साधु - फोटो : PTI
सभी का एक ही लक्ष्य, सनातन की रक्षा
हम आपको बता दें कि प्रयागराज के महाकुंभ में दीक्षा लेने वालों को राजेश्वर नागा कहा जाता है। वहीं उज्जैन में दीक्षा लेने वालों को खूनी नागा। हरिद्वार में दीक्षा लेने वालों को बर्फानी व नासिक में दीक्षा लेने वालों  खिचड़िया नागा के नाम से जाना जाता है। इन सभी का एक ही लक्ष्य होता है और वह है सनातन की रक्षा करना। माना जाता है कि इन सभी में खूनी नागा साधुओं का स्वभाव सबसे अधिक उग्र होता है। ये सैनिक का भाव रखते हैं और धर्म की रक्षा के लिए खून भी बहा सकते हैं।
 
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नागा साधु - फोटो : PTI
कइयों को दी जाती है अहम जिम्मेदारियां
अखाड़ों की ओर से नागा साधुओं में कुछ का चुनाव कर कुछ अहम जिम्मेदारियां दी जाती हैं। कौन-सा नागा किस जिम्मेदारी को निभाएगा उसके लिए पद भी निर्धारित होते हैं। वो कुछ इस प्रकार से होते हैं। इनमें अखाड़े के हिसाब से बदलाव भी हो सकता है।

- आचार्य महामंडलेश्वर
- महामंडलेश्वर
- श्रीमहंत
- मंहत
- थाना पति
- अष्ट कौशल
- श्री पंच
-श्री शंभू पंच
- पंच परमेश्वर
- मुखिया महंत
- कारोबारी 
- कोठारी 
- नागा सैनिक

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नागा साधु - फोटो : PTI
अफगान सेना देख चुकी रौद्र रूप
नागाओं की युद्ध शैली बहुत ही घातक होती है, इतिहास इस बात का गवाह रहा है। इनके पराक्रम की गाधाओं में सबसे ज्यादा चर्चा 1757 में मथुरा के गोकुल में इनकी अफगान सेना से भिड़त  की होती है। जब अहमद शाह अब्दाली के नेतृत्व में मंदिरों को नष्ट करने पहुंची अफगान सेना को कुछ नागाओं ने ऐसा रूप दिखाया था कि हर कोई कांप उठा था। पूरे शरीर पर भभूत, लाल आंखें और दिगंबर नागाओं को देखकर ही अफगानी सेना डर महसूस करने लगी थी।

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