महाकुंभ में आए नागा संन्यासियों के मोबाइल को लेकर अपने- अपने तर्क हैं। किसी ने कहा कि मोबाइल सांसारिक मोहमाया की वस्तु नहीं है। किसी ने कहा कि इसके द्वारा हम अपने साधु परिवार से संपर्क करते हैं।
घर छूटा। परिवार छूटा। धन-दौलत छोड़ी। वस्त्र भी छोड़ा। लेकिन मोबाइल नहीं त्याग पाए। महाकुंभ में आए नागा-संन्यासी मोबाइल पर बात करते दिख जाएंगे। महाकुंभ में सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र अखाड़े और उनमें आए नागा संन्यासी हैं।
इन्हें देखने और उनके बारे में जानने के लिए लोग उत्सुक भी रहते हैं। इस बारे में जब उनसे बात की गई तो सबके अपने- अपने तर्क थे। किसी ने कहा कि मोबाइल सांसारिक मोहमाया की वस्तु नहीं है। किसी ने कहा कि इसके द्वारा हम अपने साधु परिवार से संपर्क करते हैं। एक संन्यासी ने तो कहा कि इससे हम अपने भक्तों की समस्या सुनकर उनका समाधान करते हैं।
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साधु आनंद गिरि
- फोटो : अमर उजाला
पंच दशनाम आवाहन आखाड़ा के नागा संन्यासी आनंद गिरि कहते हैं कि फोन का इस्तेमाल जरुरी है। इससे हम अपने साधु परिवार के संपर्क में रहते हैं। यदि गुरु जी के पास जाना संभव नहीं हुआ या गुरु जी कोई संदेश देते हैं तो फोन की मदद से संपर्क हो जाता है।
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नागा संन्यासी शंकरपुरी
- फोटो : अमर उजाला
श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी में पंजाब के मोहाली से आए नागा संन्यासी शंकर पुरी कहते हैं कि मोबाइल सांसारिक मोहमाया की वस्तु नहीं है। आज के समय में मोबाइल के बिना किसी का गुजारा नहीं है। कलयुग में टेक्नोलॉजी सब जगह आ चुकी है।
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स्नान करते साधु
- फोटो : PTI
बिना इसके कुछ भी संभव नहीं है। संन्यासियों के लिए भी कुछ जरूरी वस्तुएं होती है, जैसे गाड़ी और मोबाइल जिसका हम प्रयोग करते हैं। बिना गाड़ी के हम कैसे एक जगह से दूसरी जगह जाएंगे। उसी तरह मोबाइल भी हमारी सहायक होती है।
श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के नागा संन्यासी कुश पुरी कहते हैं कि फोन सुख-दुख का साथी है। हमारे भक्तों को अगर कोई समस्या है तो हम कई बार उसका समाधान फोन पर ही कर देते है। किसी भक्त को यदि बिच्छू या सांप काट ले तो मैं मोबाइल से ही झाड़-फूंक कर देता हूं, जिससे भक्त को राहत मिल जाती है।