अघोरी बाबा
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जब उनसे पूछा गया कि सुना है अघोरी चिता में जलने वाली लाश का कच्चा मांस खाते हैं, तो इस पर उनका कहना था कि ऐसा तो बिल्कुल भी नहीं है। एक बार मेरे गुरु ने मुझसे कहां कि हमें नरबलि का प्रसाद देना है। इसके बाद मैं तुम्हें मंत्र दूंगा और फिर तुम रातभर साधना करना। उनके इस आदेश पर मैं चिंतित हो गया। मैं सोचने लगा कि गुरू जी ने मुझे यह किस भवर में फंसा दिया। पूरी रात सोचा, फिर मुझे याद आया कि मेरा एक दोस्त डॉक्टर है, मैं उसके पास गया और उससे कहा कि मेरा एक पैकेट खून निकाल दो। उसने कहा कि क्या करना है गुरू जी इसका, मैंने कहा मुझे दे दो। मैं गुरु के पास गया तो उनसे कहा कि व्यवस्था हो गई है। नरबलि का मतलब यह नहीं होता कि किसी व्यक्ति को मारा जाए, पूजा में खून लगता है और उसकी व्यवस्था हो गई। इसका थोड़ा ही प्रयोग होता है, हमारे संप्रदाय में किसी को हानी पहुंचना नहीं है। उन्होंने यह भी साफ किया कि अघोरी बलि नहीं देते हैं।