Maha Kumbh Mela: संगम में पुण्य की डुबकी लगाने आए थे, पर पुलिस ने पूरा शहर घुमा दिया। हरियाण, पंजाब, दिल्ली समेत दूर-दराज से लाखों श्रद्धालु पहुंचे थे। जगह-जगह बैरिकेडिंग से श्रद्धालुओं को लंबा चक्कर काटना पड़ा।
Maha Kumbh 2025: एक साल से महाकुंभ का इंतजार कर रहा था, ताकि संगम में आकर पुण्य की डुबकी लगाऊं। लेकिन, शहर में श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह किए गए डायवर्जन से सिर चकरा गया। घूमते-घूमाते 15 से 20 किमी शहरभर में चक्कर काटा, फिर जाकर संगम में डुबकी लगाने का मौका मिला।
यह कहना है पटना से आए रामनाथ का था। यही हाल कई श्रद्धालुओं का रहा।महाकुंभ का सकुशल आयोजन कराने को लेकर पुलिस की ओर से रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और शहरी सीमा से मेला क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बैरिकेडिंग अलग-अलग रूटों से मेला में प्रवेश दिया जा रहा है।
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स्नान पर्व पर संगम स्नान को सुबह तीन बजे उमड़ा आस्था का जन सैलाब
- फोटो : शिव त्रिपाठी
ऐसे में जगह-जगह घुमावदार रास्ते से श्रद्धालुओं को लंबा चक्कर काटना पड़ा। वहीं, उधमपुर से आए श्रीनाथ ने बताया कि वह सोमवार रात दो बजे प्रयागराज आ गए। जंक्शन पर उतरने के बाद लाखों की संख्या में भीड़ थी। स्टेशन के बाहर आते ही पुलिस वालों ने संगम के रास्ते जाने के लिए कहा।
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स्नान पर्व पर संगम स्नान को सुबह तीन बजे उमड़ा आस्था का जन सैलाब
- फोटो : शिव त्रिपाठी
तकरीबन 10 किमी का रास्ता पैदल तय किया। लेकिन, एक इस बीच एक भी ई-रिक्शा या फिर कोई अन्य वाहन की व्यवस्था नहीं थी। वहीं, अमृतसर से आए नीरज अहूजा ने बताया कि संगम में पुण्य की डुबकी लगानी है तो थोड़ी दिक्कत झेलनी पड़ेगी।
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स्नान पर्व नागा संतो की चरण रज लेते श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
संतों की चरण रज लेकर अभिभूत हुईं महिलाएं
उधर, अमृत स्नान के लिए निकले संतों की चरण रज लेने की होड़ श्रद्धालुओं में रही। खासतौर पर महिलाएं इसके लिए लालायित दिखीं। पुलिस बल के कई बार हटाने के बावजूद महिला श्रद्धालु अखाड़ा मार्ग के बीचो-बीच आकर झोली में चरण रज बटोरती दिखीं।
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स्नान के लिए उमड़ा सैलाब
- फोटो : PTI
महाकुंभ के पहले अमृत स्नान के लिए मंगलवार भोर से अखाड़ों को रवाना होना था। अखाड़ों में शामिल नागा संन्यासी, महामंडलेश्वर, आचार्य की चरण रज लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु देर-रात से डेरा डालकर बैठे थे।
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स्नान के लिए घाट पर उमड़ा सैलाब
- फोटो : PTI
मध्य प्रदेश के दतिया की राजकुमारी, बाराबंकी की कौशल्या, राजस्थान की नंदनी, सुधा, रितिका आदि परिवार के साथ महाकुंभ स्नान के लिए आई थीं। स्नान करके आधी रात को ही अखाड़ा मार्ग पहुुंच गईं।
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स्नान के लिए घाट पर उमड़ा सैलाब
- फोटो : PTI
सात घंटे इंतजार के बाद जब भोर में महानिर्वाणी अखाड़े केे संत गुजरे तब जाकर चरण रज मिल सकी। चरण रज अपने आंचल में बांधते समय राजकुमारी, कौशल्या समेत महिला श्रद्धालु अभिभूत नजर आईं। चरण रज अपने माथे पर लगाने के साथ परिजनों के माथे पर भी लगाई।
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स्नान के लिए उमड़ा सैलाब
- फोटो : PTI
देश के कोने-कोने तक पहुंचा कुंभ मंथन से निकला अमृत
मकर संक्रांति पर कुंभ मंथन से निकला अमृत देश के कोने-कोने तक पहुंचा। करोड़ों श्रद्धालुओं ने जहां गंगा में डुबकी लगाकर अमृत स्नान किया, वहीं जो नहीं आ सके, उनके लिए श्रद्धालु अमृत रूपी गंगाजल गैलन में भरकर साथ ले गए।
जम्मू से आए संजीव कुमार व उनकी पत्नी सुमन दो बड़े गैलन में गंगाजल भरकर ले गए। दंपती ने बताया कि यह गंगाजल अपने-अपने माता-पिता, दोनों बच्चों और मोहल्ले वालों को देंगे। कोई और भी मांगेगा तो उसे भी देंगे।
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महाकुंभ मेला क्षेत्र में पांटून पुल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़
- फोटो : संवाद
पहली बार महाकुंभ में आईं सुमन कहती हैं, गंगाजल मेरे लिए अमृत जैसा है। इसका कोई मोल नहीं है। इसे बहुत संभालकर रखेंगे। वहीं, टेलरिंग का काम करने वाले संजीव को विश्वास है कि संगम का यह जल उनके व्यवसाय के लिए अमृत साबित होगा। जम्मू पहुंचने पर पूरे घर और दुकान में गंगाजल छिड़केंगे।
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महाकुंभ मेला क्षेत्र में पांटून पुल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़
- फोटो : संवाद
शाहजहांपुर से आए जदुवीर सिंह, राम भरोसे व मुन्नी देवी भी पांच गैलन में गंगाजल भरकर ले गए। जदुवीर ने कहा कि गांव से जो लोग नहीं आ सके, उनको गंगाजल बांटेंगे।
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स्नान पर्व पर अमृत स्नान से पहले जयकारा लगाते श्रद्धालु
- फोटो : शिव त्रिपाठी
राम भरोसे का कहना था कि हर साल माघ में प्रयागराज आना नहीं हो पाता है। अगर किसी कारणवश भविष्य में नहीं आ पाते हैं तो संगम के इस जल से ही स्नान कर मान लेंगे कि पुण्य की डुबकी लगा ली है।
मुन्नी देवी बताती हैं, गांव में जब किसी का आखिरी वक्त आता है तो उसे गंगाजल दिया जाता है, ताकि मोक्ष प्राप्त हो सके। लोग एक-दूसरे के घरों में जाकर गंगाजल मांगते हैं। कभी-कभी रुद्राभिषेक के लिए गंगाजल नहीं मिलता है। यह गंगाजल सिर्फ मेरे परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे गांव के लिए है। सबको पुण्य मिले, इसी कामना से गंगाजल साथ ले जा रहे हैं।