माघ मेला केपांचवें व अंतिम स्नान पर्व माघी पूर्णिमा पर रविवार को संगम पर आस्था की लहरें उमड़ पड़ीं। आधी रात को ही संगम जाने वाले मार्गों से लेकर घाटों की
सर्क्युलेटिंग एरिया तक भीड़ केचलते तिल रखने की जगह तक नहीं बची। रेती पर जप तप, ध्यान के साथ अन्न-वस्त्र का दान करने की होड़ मची है।