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कुंभ 2019: संगम तट का बढ़ा दायरा, मेला प्रशासन ने नए सिरे से किया निर्धारण, ये है बड़ी वजह

Wed, 09 Jan 2019 11:08 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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Kumbh 2019
विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक आयोजन के रूप में कुंभ में इस बार 12 करोड़ से अधिक संतों-भक्तों के आने के अनुमान को देखते हुए मेला प्रशासन ने बुधवार को प्रथम शाही स्नान से पहले धर्माचार्यों के मार्गदर्शन में संगम तट का नए सिरे से निर्धारण कर दिया। शास्त्रों-पुराणों को आधार मानते हुए दशाश्वमेध घाट से सोमेश्वर महादेव के बीच तीन किमी दायरे में आने वाले गंगा तट को चिह्नित कर संगम घोषित किया गया। गंगा पार के तट को संगम की मान्यता दिए जाने के बाद सभी 13 अखाड़ों के महंतों, संन्यासियों, वैरागियों और नागाओं ने डुबकी लगाकर पूजा-आरती की। इस परिधि के सभी घाटों का संगम के तौर पर नामकरण करने का एलान किया गया। अब इस तीन किमी के दायरे में आने वाले किसी भी घाट पर किया जाने वाला स्नान संगम स्नान माना जाएगा।
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बुधवार को पहली बार संगम के दायरे को लेकर ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। इसके लिए दशाश्वमेध घाट से लेकर अरैल में सोमेश्वर महादेव के बीच गंगा के तटों को भी संगम की मान्यता दे दी गई। कुंभ मेला प्रशासन की मौजूदगी में धर्माचार्यों ने पुराणों के आधार पर संगम तट की व्याख्या की और अनेक उदाहरण प्रस्तुत किए । स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, काशी सुमेरू पीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि, परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि के समक्ष संगम तट के विस्तार पर सहमति बनाई गई। 
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संतों ने बताया कि यमुना की धारा गंगा में काफी दूर तक जाकर मिलती है। इसलिए तीन किमी तक का किनारा संगम माना जाएगा। धर्माचार्यों की सहमति मिलने के बाद मेला प्रशासन ने संगम तट के नए विस्तार पर अपनी मुहर लगा दी। इसके बाद अखाड़ों के संतों ने गंगा पार नए संगम में डुबकी लगाई। नए संगम तट का दुग्धाभिषेक कर पूजा-आरती की गई। अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि ने बताया कि पुराणों के आधार पर नए सिरे से संगम तट का निर्धारण किया गया है। अब तीन किमी लंबा संगम तट उपलब्ध हो गया है। इससे देश-दुनिया के हर कोने के संत और श्रद्धालु संगम स्नान का पुण्य अर्जित कर सकेंगे। इस मौके पर कुंभ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद, डीआईजी मेला केपी सिंह के अलावा कई अफसर मौजूद थे।
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संगम नोज पर ही अखाड़े करेंगे शाही स्नान : महंत नरेंद्र गिरि
मकर संक्रांति पर अखाड़े संगम नोज पर ही शाही स्नान करेंगे। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने बुधवार को इसका एलान किया। उन्होंने कहा कि संगम नोज पर ही शाही स्नान की परंपरा रही है। ऐसे में अखाड़ों के संत शाही स्नान संगम नोज पर ही करेंगे। सभी 13 अखाड़े शाही स्नान के लिए बग्घियों, रथों, घोड़ों की सवारी के साथ आएंगे। इसके लिए मेला प्रशासन ने अक्षयवट मार्ग के पास पार्किंग बनाई है। शाही स्नान के लिए कांसापुला मार्ग भी बना लिया गया है।
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