Mahila Sanyasini
संस्कार और अनुष्ठान के दौरान अखाड़े के कोतवालों ने धर्मदंड लेकर व्यवस्था संभाली। इस दौरान अखाड़े से इतर लोगों का अनुष्ठान स्थल पर प्रवेश वर्जित रहा। संन्यासिनी बनाने की प्रक्रिया के तहत सबसे पहले उनका मुंडन संस्कार कराया गया। फिर गंगा स्नान, भस्म स्नान, गोमूूत्र, गाय के गोबर, पंचगव्य, पंचामृत स्नान, गंगा स्नान के बाद श्वेत वस्त्र दिए गए।