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तस्वीरें: जूना अखाड़े की पहल पर 1500 महिलाओं ने किया पिंडदान, मोह माया से मुक्त हो बनीं संन्यासिनी

Thu, 31 Jan 2019 08:37 PM IST
kapil kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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प्रयागराज कुंभपर्व में बुधवार को पंचदशनाम जूना अखाड़े की पहल पर तकरीबन डेढ़ हजार महिलाओं ने संन्यास की दीक्षा ली। गंगा किनारे जुटीं महिला साध्वियों ने खुद के लिए सत्रहवां पिंडदान किया। संस्कार के बाद सभी दशनामी संन्यासिनी महिला अखाड़े में शामिल हो गईं।
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संस्कार और अनुष्ठान के दौरान अखाड़े के कोतवालों ने धर्मदंड लेकर व्यवस्था संभाली। इस दौरान अखाड़े से इतर लोगों का अनुष्ठान स्थल पर प्रवेश वर्जित रहा। संन्यासिनी बनाने की प्रक्रिया के तहत सबसे पहले उनका मुंडन संस्कार कराया गया। फिर गंगा स्नान, भस्म स्नान, गोमूूत्र, गाय के गोबर, पंचगव्य, पंचामृत स्नान, गंगा स्नान के बाद श्वेत वस्त्र दिए गए।
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पुरुषों की तरह उन्हें भी परंपरानुसार पलाश का दंड और कुल्हड़ का कमंडल दिया गया। काशी, उज्जैन, नासिक और प्रयागराज के पुरोहितों के आचार्यत्व में पिंडदान के बाद उन्होंने गंगा में पिंडों को विसर्जित किया।

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आधी रात के बाद जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि की देखरेख में अखाड़े की छावनी में विजयाहवन संस्कार किया गया। इस बीच ओम नम:शिवाय का जाप भोर तक जारी रहा। कार्यक्रम में जूना के संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरि, उपाध्यक्ष श्रीमहंत प्रेमगिरि, राष्ट्रीय महामंत्री नारायण गिरि, महामंडलेश्वर हेमा गिरि, तक्षक पीठाधीश्वर रविशंकर सहित अनेक संत, संन्यासी मौजूद थे।
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दीक्षा में नेपाल की डेढ़ सौ महिलाएं भी
दशनामी संन्यासिनी महिला अखाड़े में शामिल होने वालों में नेपाल से आईं महिलाएं भी शामिल रहीं। महंत हरिगिरि के मुताबिक नेपाल की माताएं अखाड़े से जुड़ी हैं। इस बार भी वहां के तकरीबन सभी जिलों की महिलाएं संन्यासिनी बनने के लिए आईं।

 
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पंचदशनाम जूना अखाड़ा के संरक्षक महंत हरि गिरि ने बताया कि, संन्यासिनियों के लिए भी बाबा विश्वनाथ मंदिर की भभूत और दंड बनाने के लिए पलाश सहित अन्य पूजा सामग्री काशी से लाई गई। खास यह कि यहां किसी भी तरह का जाति बंधन नहीं रहा। इसमें विदेशी, वाल्मीकि समाज की माताएं भी शामिल रहीं।
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