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तस्वीरें: महामंडलेश्वरों संग जूना की छावनी पहुंचे संत, गोल्डन बाबा ने अलग निकाली पेशवाई

Wed, 26 Dec 2018 12:42 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क,अमर उजाला, प्रयागराज
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पंचदशनाम जूना अखाड़े की भव्य पेशवाई मंगलवार को हर-हर महादेव के जयघोष के साथ श्रद्धा एवं उल्लासपूर्वक पूरी भव्यता से निकली। अखाड़े के ध्वज, अखाड़े के देवता भगवान दत्तात्रेय की पालकी और भाला लेकर चले नागा संन्यासियों की अगुवाई में संतों का हुजूम उमड़ा। हाथी, घोड़ा, ऊंट सहित नागाओं की फौज, अखाड़े के पदाधिकारियों, संतों, श्रीमहंतों, महामंडलेश्वरों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी चले। प्रत्येक अखाड़े के साथ अलग-अलग बैंड पार्टियों ने भक्ति की धुन बजाई।
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जूना के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि की अगुवाई में संत-महंत, महामंडलेश्वर आगे बढ़े। आरती-पूजन के बाद मौजगिरि मंदिर से आरंभ हुई पेशवाई मिंटो पार्क, परेड मैदान, कुंभ मेला दफ्तर होते हुए त्रिवेणी मार्ग स्थित पांटून पुल पार करके सेक्टर 16 स्थित अखाड़े की छावनी पहुंचकर पूरी हुई।
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आचार्य सहित अन्य महामंडलेश्वरों ने जूना के ध्वज की परिक्रमा के बाद आराध्य भगवान दत्तात्रेय का पूजन किया और फिर कुंभ मेले की कुशलता के लिए कामना, प्रार्थना की। पेशवाई के साथ संतों का मेले की छावनी में विधिवत ठौर आरंभ हुआ। इस दौरान पेशवाई का जगह-जगह स्वागत किया गया।

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जूना के पीछे-पीछे पंच अग्नि अखाड़ा भी
परंपरा के अनुसार पंचदशनाम जूना अखाडे़ के साथ पंचअग्नि अखाड़े की भी पेशवाई धूमधाम से निकली। पंच अग्नि अखाड़े के ध्वज, देवता, निशान के साथ आचार्य महामंडलेश्वर, महामंडलेश्वरों संग अन्य संत, श्रीमहंत चले। 
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महामंडलेश्वरों संग जूना की छावनी पहुंचे संत
पहले धर्मध्वजा लहराने के बाद अब मंगलवार को पूरी भव्यता के साथ पंचदशनाम जूना अखाड़े के संतों ने शाही पेशवाई निकालकर कुंभ क्षेत्र की छावनी में प्रवेश किया। जूना के ध्वज के पास चौरे पर देवता की पालकी और निशान रखा गया। इसी के साथ संतों के शिविर बसना आरंभ हुए। देवता, निशान के साथ ट्रैक्टर की ट्रालियों पर रखे सोने-चांदी के रथों पर आचार्य महामंडलेश्वर सहित सभी महामंडलेश्वर विराजे। रथ पर ही छत्र, चंवर के साथ चांदी की छड़ियां लिए अखाड़े के कोतवाल भी रहे। आशीर्वाद देते चले महामंडलेश्वरों, श्रीमहंतों के  स्वागत में आरंभ से लेकर मेले की छावनी तक सड़क के दोनों ओर श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहा।
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इस बीच बैंडबाजा वालों, नागा संन्यासियों और श्रद्धालुओं ने मगन होकर नृत्य किया। प्रत्येक महामंडलेश्वर के रथ के आगे एक बैंड पार्टी भक्ति धुन बजाते हुए चली। घोड़े की पीठ पर रखे नगाड़े बजाते नागा संन्यासी के अतिरिक्त नागाओं ने हर हर महादेव का जयघोष भी किया। शरीर पर भभूत लगाए नागाओं ने हाथ में तलवार, फरसा आदि भी ले रखा था। पेशवाई की सुरक्षा के लिए अखाड़े के कोतवाल भी संग चले। पेशवाई मार्ग लंबा रहा लेकिन नागाओं, संतों के उत्साह से इसका पता ही नहीं चला। चतुरंगिणी सेना में शामिल हाथी, ऊंट आदि को पांटून पुल से पहले रोक दिया गया था।
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पेशवाई में अखाड़े के संरक्षक और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरिगिरि, अखाड़े के कुंभ मेला प्रभारी श्रीमहंत प्रेम गिरि, राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहंत विद्यानंद सरस्वती, रमता पंच की तेरह मढ़ी के श्रीमहंत बलराज पुरी, चौदह मढ़ी के श्रीमहंत आनंद गिरि, सोलह मढ़ी के श्रीमहंत केदारपुरी, चार मढ़ी के श्रीमहंत विश्वंभर भारती, श्रीमहंत नारायण गिरि, श्रीमहंत मोहन गिरि, तक्षक पीठाधीश्वर रविशंकर महाराज, थानापति अद्वैत भारती, विभूति जी के अतिरिक्त जूना के अनेक संत, महंत शामिल हुए।

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जो महामंडलेश्वर हुए शामिल
जूना की पेशवाई में काशी सुमेरू पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती,आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि के अतिरिक्त कामाख्या पीठाधीश्वर जगद्गुरु पंचानन गिरि, गोकर्ण पीठाधीश्वर स्वामी कपिलपुरी, वेणीमाधव पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर ओंकारदेव गिरि, महामंडलेश्वर स्वामी उमाकांत सरस्वती, महामंडलेश्वर स्वामी महेंद्रानंद गिरि, महामंडलेश्वर स्वामी रवि गिरि, महामंडलेश्वर स्वामी गणेशानंद गिरि, महामंडलेश्वर योगेश्वरी यति, महामंडलेश्वर स्वामी गोपालगिरि, महामंडलेश्वर स्वामी हरिरामानंद गिरि, महामंडलेश्वर स्वामी शैलेशानंद गिरि सहित तकरीबन दो दर्जन महामंडलेश्वर शामिल हुए।

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रेती पर बैंडबाजों संग बरेदी लोकनृत्य
पेशवाई में तरह-तरह के तकरीबन तीन दर्जन से ज्यादा बैंड पार्टियां अपनी खूबियों के साथ शामिल हुईं तो मध्य प्रदेश के महामंडलेश्वर के रथ के साथ वहां का बरेदी लोक नृत्य भी रहा। लोकरंगों ने पूरे उत्साह से नृत्य प्रस्तुत करते हुए सभी को मंत्रमुग्ध किया।

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पेशवाई संग पहुंचा रेती पर अग्नि अखाड़ा
परंपरा के अनुसार पंच दशनाम जूना अखाडे़ के साथ पंचअग्नि अखाड़ा ने भी धूमधाम से पेशवाई निकाली। देवता, निशान और आचार्य महामंडलेश्वर रामकृष्णानंद की अगुवाई में महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी, सचिव श्रीमहंत संपूर्णानंद ब्रह्मचारी सहित अनेक महामंडलेश्वर, संत, श्रीमहंत पेशवाई में शामिल हुए। आचार्य महामंडलेश्वुर, महामंडलेश्वर, संतों का कुंभ मेला अधिकारी और डीआईजी कुंभ मेला ने कुंभ मेला दफ्तर के सामने स्वागत किया।

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देवता, निशान, आचार्य ने की संतों, श्रीमहंतों की अगुवाई
सभापति मुक्तानंद की देखरेख में पेशवाई के बाद अग्नि अखाड़े की छावनी में पहुंचने आचार्य और महामंडलेश्वर ने ध्वजा का पूजन और उसकी परिक्रमा की। साथ ही मेले की कुशलता के लिए गंगा से प्रार्थना की। इसी क्रम में अब आवाहन अखाड़े की अलग पेशवाई 27 दिसंबर को निकलेगी।
 
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गोल्डन बाबा ने जूना से अलग निकाली पेशवाई
जमीन से जुड़े मामले और कुंभ के आला अधिकारियों के साथ दुर्व्यहार के आरोप में जूना अखाड़े के श्रीमहंत पद से बर्खास्त और निष्कासित गोल्डन बाबा मंगलवार को अपनी अकेली पेशवाई लेकर कुंभ मेले में पहुंचे। जूना की पेशवाई पूरी होने के बाद पहुंचे गोल्डन बाबा ने मेला क्षेत्र पहुंचकर संगम स्नान किया और कुंभ मेले की कुशलता तथा संतों को सद्बुद्धि के लिए गंगा से प्रार्थना की। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में बोले, अखाड़े के श्रीमहंतों को उनके दुर्व्यहार के लिए सजा दिलाकर रहूंगा। तथ्यों को उजागर करने पर उन्होंने मुझे अखाड़े से निकाल दिया, लेकिन मुझे सभी अखाड़े चाहते हैं, मैं किसी के भी साथ ठौर बना लूंगा। संगम की रेती तप और अनुष्ठान की है, यह जूना से इतर भी संभव है।
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