mauni amavasya
न किसी को धक्का खाने की चिंता थी न मीलों पैदल चलने की। बहुएं सासू मां के आंचल का खूंट थामकर चल रही थीं, तो बच्चे माता-पिता के सिर पर सवार होकर संगम की अद्भुत आभा के बीच से गुजर रहे थे। शहर से कुंभ मेला के इंट्री प्वाइंट तक ही नहीं, फिर मेला क्षेत्र के अंदर तक सिर पर गठरी ही गठरी ही दिखाई दे रही है। बसों, ट्रैक्टर-ट्रालियों व निजी वाहनों को झूंसी, अंदावा, फाफामऊ, नेहरू पार्क के पास रोक दिए जाने से हर तरफ से पैदल कारवां उमड़ता रहा। बख्शीबांध, नागवासुकि, गंगोली शिवाला, ओल्ड जीटी, काली मार्ग, त्रिवेणी मार्ग, जगदीश रैंप, अरैल के पुलों पर देर रात तक लंबी कतारें लगी रहीं और लोग तिल-तिलकर रेंगते हुए शिविरों में पहुंचते रहे। हर्षवर्धन चौराहा, डीपीएस, देव प्रयाग के पास की पार्किंग दोपहर तक ही फुल हो गई।