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इस बार कुंभ में दिखेगा अद्भुत संयोग, ग्रह-नक्षत्रों की गति के साथ शनिदेव का है महत्वपूर्ण योगदान

Sat, 05 Jan 2019 04:18 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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Kumbh 2019
इस बार 15 जनवरी से 4 मार्च तक संगमनगरी में कुंभ मेला लगने जा रहा है। संगम की रेती पर संतो-महंतों ने आकर धुनी रमा दी है। अखाड़ों की रोज पेशवाई हो रही है। सरकार भी दिव्य कुंभ, भव्य कुंभ के संकल्पना को साकार करने में पूरी तरह जुटी हुई है। कहा जा रहा है कि इस बार कुंभ अद्भुत संयोग लेकर आया है। आगे की स्लाइड में पढ़ें क्या है ये संयोग...
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ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय के मुताबिक, ज्योतिष शास्त्र की गणनाएं नौ ग्रहों और बारह राशियों पर आधारित हैं। कुम्भ की अलौकिक घटना ग्रहराज सूर्य, ग्रहरानी चन्द्रमा, देवगुरु बृहस्पति और न्यायदाता शनि के योगदान का प्रतिफल है।
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Kumbh 2019
सूर्य ने कुम्भ कलश को फूटने से बचाया था, चंद्रमा ने अमृत को कुम्भ कलश से गिरने से रोका, गुरु ने असुरों से कुम्भ के अमृत की रक्षा की तथा शनि ने जयंत पर दृष्टि रखी कि कहीं वह स्वयं ही अमृत न पी जाए। पौराणिक कथा के अनुसार जयंत जब अमृत-कुम्भ की रक्षा हेतु उसे लेकर चले, तब जयंत और अमृत कलश की रक्षा में ग्रहों ने भी प्रमुख भूमिका निभाई।

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संगम तट - फोटो : अमर उजाला
आकाशमार्ग में विचरण करने वाले ग्रह-नक्षत्रों का विशेष राशि में योग अद्भुत संयोगों का सृजन करता है। कुम्भ, अर्द्धकुम्भ की गणना देवगुरु बृहस्पति के राशि संचार एवं माघ मास की अमावस्या के दिन सूर्य, चन्द्रमा के मिलन का अद्भुत संयोग है। वर्ष 2019 में माघ मास की अमावस्या के दिन सूर्य एवं चन्द्र मकर राशि में तथा बृहस्पति (गुरु) वृश्चिक राशि में संचार करने के कारण प्रयागराज में 15 जनवरी 2019 से 4 मार्च 2019 तक भव्य कुंभ का आयोजन किया जा रहा है।
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peshwai
इस अवसर पर प्रयागराज में स्नान-दानादि की महिमा अनन्त गुणा बढ़ जाती है, जो संगम के अक्षय क्षेत्र में अद्भुत संयोगों में स्नान, ध्यान, जप, तप, दान करता है, वह साक्षात् बृहस्पति और सूर्य के समान तेजस्वी होता है। मकर संक्रांति, पौष पूर्णिमा, मौनी सोमवती अमावस्या, बसंत पंचमी, माघी पूर्णिमा, महाशिवरात्रि स्नान पर्व पर ग्रह-नक्षत्रों की अद्भुत जुगलबन्दी प्रयागराज में संगम तट पर स्नान-दान करने वालों को मनोवांछित फल एवं अक्षय पुण्य प्रदान करेगी।
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ग्रह नक्षत्रम् ज्योतिष शोध संस्थान की ज्योतिषाचार्य गुंजन वार्ष्णेय के अनुसार इस बार 4 फरवरी को पड़ने वाली मौनी अमावस्या सोमवार के दिन पड़ने के कारण मौनी सोमवती अमावस्या दुर्लभ ग्रहीय संयोगों का सृजन कर रही है। मौनी अमावस्या के दिन सूर्य, चन्द्र, केतु, बुध मकर राशि में, मंगल मीन राशि में, राहु कर्क राशि में, बृहस्पति वृश्चिक राशि में एवं शुक्र, शनि का धनु राशि में संचार से अद्भुत प्राणदायनी उर्जा स्नान-दान करने वालों के जीवन में दुःख, दारिद्रय का नाश कर सकारात्मक सृजन शक्ति का प्रवाह करेगी।
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इस दिव्य पर्व पर स्नान करने के उपरान्त भगवान विष्णु, भगवान शिव एवं सूर्यादि देवों का ध्यान करते हुए तिल, पुष्प, अक्षत सहित तीर्थ जल से अर्घ्य देना चाहिए। यथासम्भव देवताओं के स्तोत्रों का पाठ, जप, पितरों का तर्पण तथा दानादि करना चाहिए। संत-महात्माओं का दर्शन एवं प्रवचन आदि का लाभ भी उठाना चाहिए। तिल, शक्कर, रजत, स्वर्ण, गर्म वस्त्र एवं फलादि का दान विशेष फलदायी माना गया है।
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