पहले शाही स्नान पर तड़के शुरू हुई अखाड़ों की तैयार शास्त्रों में वर्णित आदिदेव भोले शंकर की बारात जैसी ही रही। सुबह जैसे-जैसे जैसे अखाड़ों के स्नान का नंबर आता जा रहा था, उनके शिविरों में हलचल तेज होने लगती थी।
विज्ञापन
2 of 5
shahi snan
मंगलवार को अखाड़ों के नागा संन्यासियों के साथ उनके अनुयायी भी शाही स्नान की शोभायात्रा में शामिल होते रहे। एक अखाड़ा जब स्नान कर रहा था तो दूसरा लाइन में खड़ा था। इसी तरह तीसरे अखाड़े के सन्यासी और श्रद्धालु ट्रैक्टर टृाली पर गुरूजी का सिंहासन रखवाने और उसे फूल मालाओं से सजाने में लगे थे।
विज्ञापन
3 of 5
shahi snan
दूसरी तरफ जो संन्यासी नागा साधु के रूप में स्नान में शामिल होने वाले थे, वे अपने शरीर में धूने की राख लपेट रहे थे। ऐसे लग रहा था कि जैसे वे शिव की बारात में शामिल होने के लिए तैयार हो रहे थे। कोई तिलक लगाकर इतरा रहा था तो कोई अपनी जटाओं में रुद्राक्ष की मालाएं लपेटकर वहां खड़े वाहनों में लगे शीशे में निहार रहा था।
4 of 5
shahi snan
ज्यादातर श्रद्धालु महिलाएं वाहन ऊंचे होने की वजह से उस पर चढ़ नहीं पा रही थी। कुछ श्रद्धालु उन्हेें सहारा देकर वाहन में बैठा रहे थे। इसी तरह हर अखाड़े ने बैंड पार्टियों को भी बुला रखा था। कुछ अखाड़ों के वाहनों के आगे-आगे किन्नर भी नृत्य करते चल रहे थे। किसी संन्यासी के हाथ में डमरू तो किसी के हाथ में तलवार और त्रिशूल था।
इसी तरह किन्नर अखाड़े के शाही स्नान की तैयारी भी निराली थी। जिस- जिस के पास जितने गहने थे, इस दिन सभी ने पहन रखे थे। किसी ने बड़ी सी नथ पहनी थी तो किसी ने बड़ा सा झुमका। काजल, बिंदी लगाकर सभी तड़के ही तैयार हो गए थे।