मेले का अंतिम स्नान माघी पूर्णिमा के साथ ही बाबा, कल्पवासियों और धार्मिक पंडालों के कथाकारों का पलायन हो गया। इनके जाते ही कुंभ के भीतर चार पहिया वाहनों के आने का सिलसिला शुरु हो गया। शहरियों के साथ-साथ आस-पास जिले जैसे प्रतापगढ़, फतेहपुर, रायबरेली से श्रद्धालु आकर संगम में आस्था की डुबकी लगाने लगे।