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पटाखा फैक्टरी धमाका: दिवाली से पहले रिहायशी इलाकों में बारूद का खेल, अवैध कारोबार रोकने में पुलिस क्यों नाकाम?

Mon, 31 Aug 2026 10:00 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज

सार

कौशाम्बी और प्रयागराज में अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण के खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई होती रही है। इसके बावजूद रिहायशी इलाकों में इस तरह का कारोबार पूरी तरह बंद नहीं हो सका। वर्ष 2024 में भी कौशाम्बी के भरवारी में पटाखा फैक्टरी में भीषण विस्फोट हुआ था। उस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे।
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कौशांबी पटाखा फैक्टरी हादसा - फोटो : अमर उजाला
दिवाली करीब आते ही पटाखों का कारोबार तेज हो जाता है। इसी के साथ रिहायशी इलाकों में चोरी-छिपे पटाखे बनाने और भंडारण का खतरा भी बढ़ जाता है। कौशाम्बी में सोमवार को हुए भीषण विस्फोट इसी खतरे की भयावह तस्वीर सामने ले आया।
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चारपाई पर पड़ी लाशें - फोटो : अमर उजाला
खुफिया तंत्र को क्यों नहीं लगी भनक
बड़ा सवाल यह है कि रिहायशी इलाके में इतने बड़े स्तर पर पटाखों का काम चल रहा था तो पुलिस और खुफिया तंत्र को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। जिस घर में पटाखों का कारोबार चल रहा था वहां बारूद और पटाखों का स्टॉक कैसे पहुंचता रहा। कच्चा माल कहां से आया और तैयार पटाखे कहां भेजे जा रहे थे। इन सवालों के जवाब अब जांच के केंद्र में होने चाहिए।
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विस्फोट के बाद राहत कार्य में लगे बचावकर्मी - फोटो : अमर उजाला
कार्रवाई होती रही, फिर भी नहीं थमा बारूद का कारोबार
कौशाम्बी और प्रयागराज में अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण के खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई होती रही है। इसके बावजूद रिहायशी इलाकों में इस तरह का कारोबार पूरी तरह बंद नहीं हो सका। वर्ष 2024 में भी कौशाम्बी के भरवारी में पटाखा फैक्टरी में भीषण विस्फोट हुआ था। उस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। दो साल के भीतर फिर इसी तरह का हादसा होना व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। सवाल सिर्फ कार्रवाई का नहीं, बल्कि कार्रवाई के बाद उस कारोबार को दोबारा शुरू होने से रोकने का भी है।

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विलाप करता पीड़ित - फोटो : अमर उजाला
चार घायलों की हालत गंभीर, वेंटिलेटर सपोर्ट पर
स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल में कौशाम्बी से पहुंचे घायलों का बिना समय गंवाए उपचार शुरू किया गया। कुल पांच घायल अस्पताल पहुंचे। इनमें से सविता, उर्वशी, राजेश कुमार और अनीता की हालत गंभीर बनी हुई है। चारों को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। वहीं, घायल माला देवी खतरे से बाहर हैं।

घायलों की सूचना मिलने के साथ ही मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एके वर्मा, एसआरएन अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक डॉ. नीलम सिंह, डॉ. जितेंद्र सिंह व डॉ. अमित सिंह टीम के साथ ट्रॉमा सेंटर के ट्रायज रूम पहुंच गए। प्राचार्य डॉ. वर्मा ने इलाज व्यवस्था की कमान संभाली और घायलों का परीक्षण किया।

गंभीर घायलों के लिए ट्रामा, सर्जरी और क्रिटिकल केयर से जुड़ी टीमों को सक्रिय किया गया। क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ अनिल सिंह व ट्रामा सेंटर प्रभारी राजकुमार चौधरी भी मौजूद रहे। सर्जरी विभागाध्यक्ष वैभव श्रीवास्तव और सूर्यभान कुशवाहा सहित अन्य चिकित्सकों ने उपचार किया। पैरामेडिकल स्टाफ ने भी मरीजों की स्थिति का आकलन कर आवश्यक इलाज उपलब्ध कराया।

आठ घायलों को अस्पताल लाया गया। इनमें से तीन की अस्पताल पहुंचने से पहले मौत हो गई। चार की हालत गंभीर बनी हुई है। जिनका उपचार चल रहा है। एक घायल खतरे से बाहर हैं। - डॉ. एके वर्मा, प्राचार्य, एमएलएन मेडिकल कॉलेज
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घायल को चारपाई से लेकर जाते लोग - फोटो : अमर उजाला
छोटे वाहन से चारपाई पर लादकर घायलों को पहुंचाया अस्पताल
कौशाम्बी से घायलों को प्रयागराज के स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस तक नसीब नहीं हुई। ऐसे में उन्हें पिकअप वाहन से चारपाई पर लादकर अस्पताल पहुंचाया गया।

एक घंटे किया एंबुलेंस का इंतजार
पीड़ित अरविंद कुमार बताते हैं कि हादसे के बाद करीब एक घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार करते रहे। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से मदद भी मांगी गई मगर कोई सहायता नहीं मिली। ऐसे में पिकअप वाहन से घायलों को अस्पताल पहुंचाने का निर्णय लिया गया। स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं होने से घायलों को चारपाई पर लादकर अस्पताल पहुंचाया गया।

पिकअप वाहन से चार घायलों को एसआरएन अस्पताल लाया गया। इनमें प्रवीण सिंह (13) और पांच वर्षीय प्रांजली की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो गई। वहीं, पीड़ित रूपा ने पटाखा स्टोरेज संचालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

घायलों के परिजनों के साथ सफाई कर्मी ढो रहे थे स्ट्रेचर
घायलों के एसआरएन अस्पताल पहुंचने पर स्ट्रेचर को सफाई कर्मी ढोते नजर आए। ट्रॉमा सेंटर के बाहर 10 सफाई कर्मियों को स्ट्रेचर ढोने के लिए लगाया गया था। ट्रॉमा सेंटर के ट्रायज रूम में भी ड्रेसिंग का सामान पहुंचाने के लिए कई सफाई कर्मी तैनात किए गए, जबकि एसआरएन अस्पताल में 185 वार्ड बॉय कार्यरत हैं।
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