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इंदिरा मैराथन 2022 : ओलंपियन भी नहीं तोड़ सके स्वरूप और सत्यभामा का रिकॉर्ड

Sat, 19 Nov 2022 08:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इंदिरा मैराथन की शुरुआत 1985 में हुई थी और पुरुष वर्ग में इसके विजेता स्वरूप सिंह रहे। स्वरूप सिंह 1986 में दो घंटे 13 मिनट 57 सेकेंड में दौड़ पूरी करके विजेता रहे, जो रिकॉर्ड है। इस बार मैराथन में शामिल ओलंपियन गोपी थानाकल से रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद थी लेकिन वह चौथे स्थान पर रहे।
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Prayagraj News : इंदिरा मैराथन में भाग लेते प्रतिभागी। - फोटो : अमर उजाला।
इंदिरा मैराथन में स्वरूप सिंह का 36 और सत्यभामा का 26 वर्ष पुराना रिकॉर्ड अब भी कायम है। दोनों ही वर्गों में अन्य वर्षों के विजेता इनके रिकॉर्ड से काफी पीछे रह गए। इस बार दो ओलंपियन भी दौड़ में शामिल हुए। ऐसे में रिकार्ड टूटने की उम्मीद थी लेकिन दोनों धावक इसके करीब भी नहीं पहुंच सके। इस वर्ष के विजेता अपने-अपने वर्ग में इंदिरा मैराथन के पांचवें सबसे तेज धावक हैं।


इंदिरा मैराथन की शुरुआत 1985 में हुई थी और पुरुष वर्ग में इसके विजेता स्वरूप सिंह रहे। स्वरूप सिंह 1986 में दो घंटे 13 मिनट 57 सेकेंड में दौड़ पूरी करके विजेता रहे, जो रिकॉर्ड है। इस बार मैराथन में शामिल ओलंपियन गोपी थानाकल से रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद थी लेकिन वह चौथे स्थान पर रहे।
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Prayagraj News : इंदिरा मैराथन में पुरुष वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले शेर सिंह 566 नंबर। - फोटो : अमर उजाला।
2007 के विजेता राम सिंह यादव ने दो घंटे 18 मिनट 20 सेकेंड में यह दौड़ पूरी की थी और इंदिरा मैराथन के वह दूसरे सबसे तेज खिलाड़ी हैं। 2018 के विजेता वीएस धोनी ने दो घंटे 19 मिनट 11.2 सेकेंड में दौड़ पूरी की थी और इंदिरा मैराथन में रिकॉर्ड के लिहाज से तीसरे स्थान पर हैं। 2008 के विजेता दीप चंद्र शारण ने दो घंटे 19 मिनट 34.9 सेकेंड में दौड़ पूरी करके विजेता बने थे और इंदिरा मैराथन के चौथे सबसे तेज धावक हैं। वहीं इस वर्ष के विजेता शेर सिंह ने दो घंटे 20 मिनट 11.3 सेकेंड में यह दौड़ पूरी कर जीत हासिल की।
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Prayagraj News : इंदिरा मैराथन में महिला वर्ग में चैंपियन सुधा सिंह 167 नंबर। - फोटो : अमर उजाला।
इंदिरा मैराथन के इतिहास में स्वरूप सिंह, राम सिंह, वीएस धोनी और दीप सिंह ही इनसे आगे हैं। इस तरह से शेर सिंह इंदिरा मैराथन के पांचवें सबसे तेज धावक हैं। वहीं महिलाओं के वर्ग में 1996 की विजेता सत्यभामा ने दो घंटे 44 मिनट 40 सेकेंड में दौड़ पूरी की थी। यह रिकॉर्ड अब भी कायम है। इस वर्ष ओलंपियन सुधा सिंह के आने से यह रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद थी। सुधा इस वर्ष की विजेता रहीं लेकिन सत्यभामा के रिकॉर्ड से काफी पीछे रह गईं।

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Prayagraj News : इंदिरा मैराथन में भाग लेते धावक। - फोटो : अमर उजाला।
2009 की विजेता सुकन्या मल्ल ने दो घंटे 49 मिनट 53 सेकेंड में दौड़ पूरी की थी। 1998 की विजेता शास्त्री देवी ने दो घंटे 50 मिनट 34 सेकेंड में दौड़ पूरी की थी और इंदिरा मैराथन की तीसरी सबसे तेज महिला खिलाड़ी हैं। पिछले वर्ष की विजेता निरमबेन भरतजी ने दो घंटे 50 मिनट 41 सेकेंड में दौड़ पूरक की थी और वह चौथी सबसे तेज धावक रहीं। वहीं 2022 की विजेता सुधा सिंह ने दो घंटे 51 मिनट 41 सेकेंड का समय लिया। इस तरह से 42.195 किमी की दूरी वाले इंदिरा मैराथन में सुधा पांचवीं सबसे तेज महिला धावक बन गई हैं।
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Prayagraj News : इंदिरा मैराथन में दौड़ लगातीं रायबरेली एक्सप्रेस पद्मश्री सुधा सिंह। - फोटो : अमर उजाला।
बच्चों, बुजुर्गों की खली कमी
इस वर्ष भी क्रास कंट्री की दौड़ नहीं हुई। पिछले वर्ष भी कोविड संक्रमण की वजह से क्रास कंट्री दौड़ नहीं हुई थी। ऐसे में बच्चों और बुजुर्गों की दौड़ नहीं हुई। हालांकि दो बुजुर्ग धावकों ने हिस्सा लिया।
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