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प्रियंका गांधी के पहुंचने पर छलका मछुआरों का दर्द, बोले- बुझे चूल्हे, न बच्चों की फीस न दवाई का पैसा

Sun, 21 Feb 2021 07:44 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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prayagraj news : बसवार गांव में मछुआरों से बातचीत करतीं कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी। - फोटो : prayagraj
बालू खनन पर 24 जून 2019 को रोक लगने के बाद से ही बसवार गांव के मछुआरों के घरों की चूल्हे की आग भी बुझ गई। बच्चों की फीस की पढ़ाई और बीमारी में उपचार कराने तक के लिए पैसा भी नहीं रहा। रविवार को जब प्रियंका गांधी बसवार गांव के उत्तर पट्टी पुरवा में पहुंची तो लोगों का दर्द उनके सामने झलक उठा। कहा कि खनन पर रोक लगने के बाद से उनका जीवन पर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने प्रियंका गांधी से नाव से बालू खनन पर फिर चालू कराने की मांग की। 
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prayagraj news : बसवार गांव में मछुआरों से बातचीत करतीं कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी। - फोटो : prayagraj
उत्तर पट्टी पुरवा के विनोद निषाद के मकान के  दरवाजे के सामने लगी चौपाल के दौरान न केवल पुरुषों ने बल्कि महिलाओं के आंसू झलक आए। बोला, दीदी जबसे बालू खनन पर रोक लगी है, तबसे घर का खर्चा चलना मुश्किल हो गया है। शिवलोचन निषाद ने कहा कि यमुना किनारे बालू की खुदाई ही उनके जीवन का स्रोत है। सरकार ने नाव से बालू की खुदाई पर रोक लगाकर उनके पेट पर लात मारी है। भइया लाल निषाद, उदयराज निषाद ने कहा कि अगर उन्हें बालू खनन करने का अधिकारी नहीं दिया जाएगा तो उनके जीवन पर ही खतरा खड़ा हो जाएगा।
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prayagraj news : बसवार गांव में मछुआरों से बातचीत करतीं कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी। - फोटो : prayagraj
उनकी आमदनी का यही जरिया है। प्रियंका गांधी के करीब में बैठी वंदना निषाद ने कहा कि सरकार ने उनकी तरफ उनके द्वारा किए जा रहे खनन पर तो रोक लगा दी है लेकिन उनके गांव के किनारे से दूसरी तरफ मशीन द्वारा बालू खनन का कार्य कराया जा रहा है। उनके लिए एनजीटी और हाईकोर्ट दोनों ने रोक लगा दी है। सरकार भी उनके खिलाफ खड़ी हो गई है। उनका बात और उनका दर्द कोई सुनने वाला नहीं है।

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prayagraj news : बसवार गांव में मछुआरों से बातचीत करतीं कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी। - फोटो : prayagraj
कोई यह नहीं देख रहा है कि बालू खनन मछुआरों का पुश्तैनी काम है। जब उनका पुश्तैनी काम ही छीन लिया जाएगा तो वे करेंगे क्या? कोई इस बात पर ध्यान नहीं दे रहा है। प्रियंका गांधी के सामने गांव की महिलाओं और पुरूषों ने इस तरह से न केवल अपनी तकलीफें बताई बल्कि गुहार लगाई कि उनके इस अधिकार को फिर से बहाल कराएं। प्रियंका गांधी ने उन्हें आश्वासन दिया कि सरकार बनी तो बालू खनन का अधिकार मछुआरों के लिए बहाल किया जाएगा। 
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prayagraj news : बसवार गांव में मछुआरों से बातचीत करतीं कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी। - फोटो : prayagraj

बसवार गांव में न तो अस्पताल है और न ही आने जाने के लिए सड़क

यमुना किनारे बसा बसवार गांव आजादी के सात दशक बाद ही विकास की राह का इंतजार कर रहा है। आठ हजार की आबादी के साथ 12 पुरवों में बसे बसवार गांव के लोगों के आने-जाने के लिए ठीक से न तो सड़कें हैं और न ही पीने के लिए साफ पानी। यहां तक कि उनके लिए कोई अस्पताल का इंतजाम भी नहीं है। पढ़ाई के लिए एक प्राथमिक एवं एक जूनियर हाईस्कूल है। लेकिन, इसमें शिक्षकों की कमी है। इससे लोगों के सामने जीविका का संकट तो है बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल सकीं हैं। रविवार को प्रियंका गांधी के पहुंचने पर लोगों के आंखों में नई रोशनी देखने को मिली। लोगों ने कहा कि प्रियंका जी आई हैं तो गांव की हालत में कुछ न कुछ तो बदलाव होगा। बिजली आपूर्ति व्यवस्था में भी सुधार होगा।

कार्यक्रम स्थल पर प्रियंका गांधी तकरीबन साढ़े बारह बजे पहुंची थीं। गांव की सड़कों को देखकर उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं। सही तरीके से सड़कों के न होने से उनके वाहन को कार्यक्रम स्थल से तकरीबन दो सौ मीटर पहले ही रोक दिया गया। वह कार्यक्रम स्थल तक पैदल चलकर पहुंची। पैदल कच्चा था और उसमें जगह-जगह गड्ढे थे।

कई बार खुद प्रियंका और उनके सुरक्षा कर्मी गिरते-गिरते बचे। कच्ची सड़कों की चौड़ाई भी कम थी। लिहाजा, कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने में सुरक्षा कर्मियों के पसीने छूट गए। जहां उनकी गाड़ी खड़ी हुई, वहां महीनों से सड़क बनाने के लिए गिट्टी बिछाई गई है लेकिन वह भी सही तरीके से नहीं है। उत्तर पट्टी टोला के बरखंडी, बबलू निषाद, सुग्गा निषाद, शकुंतला देवी, उदय राजय निषाद कहते हैं कि प्रियंका जी पहली बार उनके गांव आईं हैं। इससे पहले कोई और बड़ा नेता उनका दुख दर्द सुनने नहीं आया। उनके यहां आने से गांव की तस्वीर जरूर बदलने की संभावना बढ़ गई है।  
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