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diwali : संगम पर दीप ज्योति से जगमगाया गाजा युद्ध विराम का संदेश, चहुंदिश छाई आतिशबाजी की सतरंगी छटा

Sun, 12 Nov 2023 06:41 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

संगमनगरी में दीपावली इस बार गाजा युद्ध विराम की अपील के बीच शांति के पैगाम पर केंद्रित रही। जय त्रिवेणी जय प्रयाग गंगा आरती समिति की ओर से संगम पर युद्ध विराम का संदेश दीपमालाओं में पिरोया गया। पतित पावनी मां गंगा की महाआरती हुई और मानवता की रक्षा के लिए कतारबद्ध दीप जलाए गए।
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मिंटो पार्क में अशोक स्तम्भ के सामने बुद्ध को दीपप्रज्वलित करते कुशवाहा बंधु के पदाधिकारी। - फोटो : अमर उजाला

ज्योति पर्व पर रविवार की शाम गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर मानवता की रक्षा की कामना से युद्ध विराम के दीप जलाए गए। संगम तट से यह संदेश वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शंखध्वनि के बीच दिया गया। इसी के साथ त्रिवेणी तट पर पंक्तिबद्ध दीपमालाओं की आभा जगमगा उठी। शहर का हर कोना दीपों की लडि़यों और आतिशी नजारों से सतरंगी हो गया।

संगमनगरी में दीपावली इस बार गाजा युद्ध विराम की अपील के बीच शांति के पैगाम पर केंद्रित रही। जय त्रिवेणी जय प्रयाग गंगा आरती समिति की ओर से संगम पर युद्ध विराम का संदेश दीपमालाओं में पिरोया गया। पतित पावनी मां गंगा की महाआरती हुई और मानवता की रक्षा के लिए कतारबद्ध दीप जलाए गए। इसी तरह संगम से लेकर शहर की हर गलियों, चौराहों, भवनों, इमारतों और सरकारी, गैर सरकारी प्रतिष्ठानों पर की गई भव्य सजावट से पूरा शहर जगमग ज्योति से दमक उठा।

सांझ ढलते ही एक तरफ दीपमालाओं की आभा से धरा प्रकाशित हो उठी तो दूसरी ओर आतिशी नजारों से आसमान इंद्रधनुषी नजर आने लगा। त्रिवेणी तट से लेकर शहर तक घर-घर में दीपमालाओं की कतारें हर किसी का मन मोहती रहीं। शाम होते ही घर-घर से बच्चे-महिलाएं थालियों में दीप सलाकर देवस्थानों पर पहुंचने लगे। संगम पर दीप जलाने की होड़ मच गई।

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संगम क्षेत्र में मोर पंख के साथ मन्नत पूरी करने पहुंचे झारखंड के लोग। - फोटो : अमर उजाला

घरों से लेकर मंदिरों, तीर्थों तक लोग मंगल कामना के दीप जलाकर धन्य होते रहे। आवासीय परिसरों को सोसाइटी के पदाधिकारियों ने दीपों से और भी भव्यता प्रदान की। यहां समूहों में रंगोलियां बनाकर खुशी का इजहार किया जाता रहा। चाहे सिविल लाइंस हो या कटरा, चौक, अतरसुइया, बहादुरगंज, मुट्ठीगंज, खुल्दाबाद, सुलेमसराय, हर तरफ दिवाली की जगमग छटा देखते बन रही थी। पटाखों की गूंज के साथ खुशियों के फव्वारे हर तरफ फूट रहे थे। आधी रात के बाद तक यह सिलसिला चलता रहा।

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लूकरगंज में दिवाली मनाते अपार्टमेंट के लोग। - फोटो : अमर उजाला

गंगा-यमुना की लहरों पर इतराईं दीपों की कतारें


त्रिवेणी तट पर दीपमालाओं की कतारें गंगा-यमुना की लहरों पर खूब इतराईं। लोग तटों के साथ लहरों पर भी दीप जलाते रहे। नावों पर भी दीप सजाए गए। शहर के पार्कों, तिराहों, चौराहों, ऊंची इमारतों की दीवारों से लेकर छतों-बारजों तक दीपों की ज्योति जगमगाती रही।

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दिवाली पर रंगोली सजातीं महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला

खुशियों की आतिशबाजी, आसमान हुआ सतरंगी
 

दीपावली पर रविवार को बच्चों से लेकर बड़ों तक की खुशी देखते बनी। दीपदान के साथ ही आतिशबाजी की हर तरफ होड़ मची रही। बच्चे ही नहीं बड़े भी, छतों से लेकर तिराहों, चौराहों पर चकरी, अनार, राकेट, आकाशदीप समेत तरह-तरह के पटाखे और फुलझड़ियां छोड़ते रहे। आतिशबाजी पर करोड़ों रुपये बहाए गए। अंधाधुंध पटाखे फोड़े जाने से शहर के तमाम मोहल्लों में गहरी धुंध भी छाई रही।

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दिवाली पर खुल्दाबाद में मां महाकाली का पूजन करते भक्त। - फोटो : अमर उजाला

पंडालों में महाकाली की आराधना, विश्व शांति की पुकार

दीपावली पर शहर में दर्जनभर से अधिक स्थानों पर पंडालों में मां काली की प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा कर विश्व शांति के लिए आराधना की गई। पुष्पांजलि के बाद धुनुचि नृत्य और शंखध्वनि से मां काली की स्तुति की गई। मां काली की झांकियों के दर्शन के लिए शाम को भीड़ लगी रही।

दुर्गा पूजा बारवारियों की ओर से पंडालों में मां काली की प्रतिमाएं प्रतिष्ठापित की गईं। कटरा स्थित मनमोहन पार्क के पास मां काली के मंदिर में काली की झांकी के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ लगी रही। महाकाली मंदिर समिति की ओर से भव्य सजावट की गई। बादशाही मंडी स्थित नारायण सिंह नगर में मां सिद्धेश्वरी काली मंदिर में भव्य काली पूजनोत्सव में भक्त शामिल हुए।

राजरूपपुर स्थित सर्व सिद्ध पुरातन कालीबाड़ी ट्रस्ट की ओर से शाम 7:30 बजे संध्या आरती से काली पूजा आरंभ हुई। रात एक बजे 106 दीप जलाए गए। आधी रात के बाद पुष्पांजलि के बाद महाआरती हुई। सिटी बारवारी, जानसेनगंज, दारागंज, राजरूपुर, बैरहना, मुट्ठीगंज कालीबाड़ी में काली पूजा की गई।

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दिवाली पर फुलझड़ी जलाते बच्चे। - फोटो : अमर उजाला
कुशवाहा बंधु ने 557 दीप जलाए

कुशवाहा बंधु की ओर से मिंटो पार्क में रविवार को धर्म ज्योति पर्व पर पंचशील त्रिशरण पाठ कराकर 557 दीप जलाए गए। बौध धर्म के प्रवर्तक बुद्ध के राजगीर से कपिलवस्तु नगर आगमन पर नगर वासियों की ओर से प्रसन्नता व्यक्त करने के लिए दीप प्रज्ज्वलन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। संस्था के अध्यक्ष प्रियतम सिंह ने कहा कि कुशवाहा ने भगवान बुद्ध के संदेशों को बताया और समाज को सही दिशा में ले जाने के लिए भगवान बुद्ध के दिखाए मार्ग पर चलने की बात कही। धन्यवाद ज्ञापन विनय कुमार कुशवाहा ने किया। इस अवसर पर रामेश्वेर सिंह, अरुण कुमार मौर्य, श्याम प्रजापति, मानस कुशवाहा, नन्हे भूचालू आदि रहे।
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दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश जी की पूजा करतीं युवतियां। - फोटो : अमर उजाला
कालीबाड़ी में जले दीप, महाकाली की विशेष आराधना


इलाहाबाद कालीबाड़ी मेंटेनेंस सोसाइटी की ओर से मुट्ठीगंज स्थित काली मंदिर में रविवार को उत्सव जैसे माहौल रहा। सविधि मंत्रोच्चर के साथ महाकाली की पूजा की गई। मंदिर में उमड़े सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु झूमते-नाचते रहे। 164 वर्ष पुरानी इस कालीबाड़ी मंदिर की सजावट देखते बनी। मंदिर को झालरों और फूलों से सजाया गया। शाम को आरती के बाद छप्पन भोग लगाया गया। इस दौरान मां को पुलाव, पनीर, पंचभाजा, खीर, दूध, पूरी, पंचमेवा आदि का भोग लगाया गया। सुबह से देर रात तक भक्तों की भीड़ लगी रही। आतिशबाजी से खुशी का इजहार किया गया।

मंदिर के अध्यक्ष संदीप मुखर्जी, सचिव अनुपम मुखर्जी, कोषाध्यक्ष गौतम कुमार बनर्जी की देखरेख में किया गया। वहीं, राजरूपपुर स्थित सर्व सिद्ध पुरातन कालीबाड़ी ट्रस्ट की ओर से संध्या आरती के साथ काली पूजा आरंभ हुई। रात 10 बजे महापूजा के साथ विशेष आराधना की गई। इसके बाद शत्रु बलिदान कर दीप जलाए गए। फिर पुष्पांजलि के बाद महाभोग अर्पित किया गया। आरती के साथ ही हवन कर पूर्णाहुति की गई।भरद्वाज कालीबाड़ी में मां का भव्य शृंगार किया गया। यहां के अध्यक्ष तपन भट्टाचार्य ने बताया कि महाआरती की गई। इस दौरान खिचड़ी, पकौड़ी, खीर, दूध, लड्डू आदि का भोग लगाया गया। 
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