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CoronaVirus: जेलों से छोड़े जाएंगे कैदी, अधिकतम सात साल की सजा पाने वालों को ही मिलेगी राहत

Sat, 28 Mar 2020 09:14 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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प्रतीकात्मक तस्वीर
कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण राज्य सरकार ने सात साल तक की सजा पाने वाले विचाराधीन कैदियों की रिहाई का फैसला लिया है। इस मामले को लेकर गठित हाई पावर कमेटी ने यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी समादेश के पालन में लिया है।  
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जेल
उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने प्रदेश के सभी जिला न्यायाधीशों /जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्षों से अनुरोध किया है कि विचाराधीन कैदियों को अंतरिम जमानत या पैरोल पर रिहाई की व्यवस्था करें। हाई पावर कमेटी का गठन सुप्रीम कोर्ट के आदेश से किया गया है। कमेटी में उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष, अपर मुख्य सचिव गृह एवं डीजीपी कारागार उत्तर प्रदेश शामिल हैं।
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जेल
27 मार्च 2020 को हाई पावर कमेटी द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार (विदेशी नागरिकों को छोड़कर) उन सभी विचाराधीन कैदियों, जिन्हें अधिकतम 7 वर्ष तक की सजा के अपराध में जेलों में रखा  गया है, सभी को 8 सप्ताह के लिए अंतरिम जमानत या पैरोल पर रिहा किया जायेगा।

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jail - फोटो : amar ujala
इस कार्य के लिए सत्र न्यायाधीश, अपर सत्र न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेटों सहित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जेलों में जाकर बंदियों का व्यक्तिगत बांड लेंगे कि वे 8 सप्ताह की अवधि पूरी होने के बाद अदालतों में समर्पण करेंगे और उनसे जमानत अर्जी प्राप्त कर जमानत पर रिहा करने की व्यवस्था करेंगे। 
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Jail
कमेटी ने यह भी निर्णय लिया कि अंतरिम जमानत देने के लिए जेल स्टाफ, जेल पैरा लीगल वालंटियर, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिवक्ता  पैनल की मदद ली जाएगी। प्रदेश स्तरीय अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी सप्ताह में एक बैठक कर इस संबंध में जिला अथॉरिटी को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत दिशानिर्देश जारी करती रहेगी। संबंधित जेल अधीक्षक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव के संपर्क में रहेंगे।

यह भी कहा गया है कि स्टेट लीगल मॉनिटरिंग टीम को अंतरिम जमानत या पैरोल पर रिहा होने वालों की प्रतिदिन सूचना भेजी जाए, जो कि मामले की मानीटरिंग कर रही है। यह आदेश उ. प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सुदीप कुमार जायसवाल ने जारी किया है।
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