वे दावा करते हैं कि वे ही शुद्ध आर्य हैं और आज भी उनमें सिंधु घाटी सभ्यता की झलक देखी जा सकती है। फिलहाल इनकी कुल जनसंख्या 4 हजार से भी कम है ये विलुप्त होने के कगार पर हैं। ये आर्यन लोग दर्दशिना भाषा बोलते हैं, साथ में ही आए लुंदुप दुरजु कहतें है कि यह भाषा कई भारतीय भाषाओं की जननी है, देव भाषा संस्कृत का जन्म भी इसी भाषा से हुआ हुआ है।