जियो फाइबर के मैनेजर अभिनव भारद्वाज ने बताया कि अपहरणकर्ताओं ने उनसे भी व्हाट्स कॉल पर वीडियो काल से बात कराई थी। उत्तराखंड में एक मकान में अपहरणकर्ताओं ने बंद करके रखा था।
जियो फाइबर के मैनेजर अभिनव भारद्वाज ने अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छूटने के बाद बताया कि एक जनवरी को चार लोगों ने सिकंदराराऊ से उनका अपहरण किया था, वो स्विफ्ट कार में डालकर अल्मोड़ा ले गए थे। वहां उनको एक मकान में बंद रखा था। मकान में इन चार लोगों के अलावा भी पांच लोग उनको बंधक बनाकर मारते-पीटते थे, घरवालों को फोन करके रुपये मांगते थे।
अपहरणकर्ताओं ने उनसे भी व्हाट्स कॉल पर वीडियो काल से बात कराई थी। मकान में उन्होंने चारों लोगों की आपसी बातचीत के दौरान एक-दूसरे की बातों में गोलू ठाकुर उर्फ यश, गौरव, गोलू उर्फ अंशुल और प्रशांत सुने थे।
विज्ञापन
2 of 9
अपहरणकर्ताओं से छुड़ाए गए अभिनव
- फोटो : अमर उजाला
'चलो आज तुम्हारे घर वाले पैसा देंगे...'
यह खुद को बुलंदशहर के छतारी का निवासी बता रहे थे। इनके अलावा पांच अन्य लोग विक्की, सूजल कुमार, करण बिष्ट, विशाल कुमार व वीरेंद्र निवासी अल्मोड़ा ने उन्हें बंधक बनाकर रखा हुआ था। बीती रात अपहरणकर्ता उनको गाड़ी में बैठाकर लाए।
अभिनव ने बताया कि उनको यह कहकर गाड़ी में बैठाया गया कि चलो आज तुम्हारे घर वाले पैसा देंगे। गाड़ी में उनके साथ गोलू ठाकुर उर्फ यश, गौरव, विक्की व विशाल कुमार उर्फ लाटा थे, जबकि सूजल कुमार और करण बिष्ट एक स्कूटी पर थे।
विज्ञापन
3 of 9
अभिनव को अगवा करने के आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
गोलू उर्फ अंशुल, प्रशांत और वीरेंद्र किसी अन्य वाहन पर थे। यह लोग उन्हें स्विफ्ट कार में बैठाकर रामपुर लेकर आए। वहां उनके एटीएम से रुपये निकालने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने एटीएम का पिन गलत बता दिया था तो रुपये नहीं निकल सके। आरोपियों ने इसके लिए उन्हें पीटा भी था। इसके बाद यह लोग मुरादाबाद में बस स्टैंड के पास आए। स्विफ्ट कार से गोलू ठाकुर उर्फ यश ने उतरकर वहां खड़े उनके परिजनों से रुपये लिए।
4 of 9
अभिनव को अगवा करने के आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
उसने गाड़ी में बैठकर अपने साथियों को रुपये देकर गिनने के लिए कहा। पूरे रास्ते यह लोग उनके ऊपर पिस्टल लगाकर रखते थे और कोई भी हरकत करने पर जान से मारने की धमकी देते थे। इस दौरान पुलिस की गाड़ी ने इनकी गाड़ी रोक ली थी, तब इन लोगों ने पुलिस पर फायर कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने भी गाड़ी पर फायरिंग की थी। पीछे बैठे विशाल की गर्दन के पास गोली लगी है।
विज्ञापन
5 of 9
अपहरणकर्ताओं से बरामद कार
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने अपहरणकर्ताओं को पकड़ा
इसके बाद यहां गली में गाड़ी खड़ी करके यह लोग गाड़ी से उतरकर भाग गए। यह लोग उनके फोन से ही उनके घर वालों से बात कर रहे थे। पुलिस के आने के बाद यह लोग फोन को गाड़ी में छोड़कर भाग गए थे। भागे हुए युवकों के बारे में पुलिस के पूछने पर उन्होंने उनकी लोकेशन भी बताई। पुलिस टीमों ने मुरादाबाद में पीली कोठी चौराहे के पास सड़क के किनारे से अभियुक्त सूजल कुमार व करण विष्ट को गिरफ्तार कर लिया। यह दोनों भागने की फिराक में थे।
विज्ञापन
6 of 9
अभिनव को अगवा करने के आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
टिल्लू ताजपुरिया गैंग का नाम लेकर की थी दहशत बढ़ाने की कोशिश
टिल्लू ताजपुरिया गैंग के नाम से दहशत बनाकर फिरौती मांगने के पीछे गैंग का मकसद यह था कि फिरौती की रकम आसानी से मिल जाएगी। परिवार को दहशत में लाने के लिए अपहरणकर्ताओं ने उनसे कहा था कि वह टिल्लू ताजपुरिया गिरोह के बारे में सोशल मीडिया पर भी सर्च कर सकते हैं। सोशल मीडिया पर उसका ब्योरा उपलब्ध है।
विज्ञापन
7 of 9
मैनेजर अभिनव भारद्वाज
- फोटो : परिजन
पार्टी में अभिनव बार-बार खुद को बता रहे थे जियो का मैनेजर
सिकंदराराऊ में पार्टी के दौरान मिश्री होटल पर अभिनव भारद्वाज खुद को बार-बार जियो मैनेजर बता रहे थे। यह सुनकर अपहरणकर्ताओं ने सोचा कि इस व्यक्ति के पास बहुत पैसा है। इधर, होटल पर दोनों पक्षों में झगड़ा भी हुआ। इसके बाद जब पार्टी समाप्त करने के बाद अभिनव बस पकड़ने के लिए पंत चौराहे पर खड़े थे, तभी अपहरणकर्ता गाड़ी में डालकर उनको अगवा कर ले गए।
8 of 9
अभिनव का परिवार
- फोटो : अमर उजाला
परिवार में लौटीं खुशियां, पुलिस भी राहत में
अभिनव के अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छूटने के बाद उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है। एक जनवरी की देर शाम से अभिनव के परिजन बेचैन थे। पत्नी स्वीटी भारद्वाज और सात वर्षीय बेटे हंस का रो-रोकर बुरा हाल था। बेटा अपने पिता के लौटने का इंतजार कर रहा था। इधर, पत्नी फिरौती की रकम एकत्रित करने के लिए अपने रिश्तेदारों से संपर्क करने में जुटी थी।
परिजनों ने वीडियो कॉल के जरिये अभिनव की उनकी पत्नी से बात कराई। जिसके बाद उनके चेहरे पर मुस्कान आई। हंस अपने दादा के साथ खेलने-कूदने में लग गया है। पुलिस के लिए भी यह घटना चुनौती बन गई थी। जैसे ही पुलिस को इस अपहरण की सूचना मिली, वैसे ही पुलिस के पैरों तले जमीन खिसक गई थी।