अलीगढ़ के देहली गेट थाना इलाके में खिलौना पिस्तौल बनाने वाले कारखाने में हुए विस्फोट का नजारा देखकर प्रत्यक्षदर्शियों की रूह कांप गई। हवा में उड़ती ईंटें... धूल का गुबार, मानों ऐसा लगा कि जैसे भूचाल आ गया हो। उस खौफनाक मंजर को देखकर लोग सिहर उठे। घटना के बाद आसपास के लोगों के चेहरे पर घटना का खौफ साफ देखा जा सकता था।
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खिलौना फैक्टरी में धमाका
- फोटो : अमर उजाला
शहर के अत्यधिक घनी आबादी वाले इलाकों में से मोहल्ला खटीकान में मंगलवार शाम चार बजे तक सब सामान्य था। तंग रास्तों पर रोजमर्रा का आम जनजीवन सहजता के साथ आगे बढ़ रहा था। शाम के 4.20 बजे पर अचानक खिलौना पिस्तौल बनाने वाले कारखाने में तेज धमाके के साथ क्षेत्र के माहौल की फिजा ही बदल गई।
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मलवा हटाते हुए लोग
- फोटो : अमर उजाला
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पहले तो उनको समझ में ही नहीं आया कि आखिर क्या हुआ है। कुछ देर बाद देखा कि हवा में घटनास्थल के ऊपर ईंटें और मकान का मलबा उड़ रहा था। धूल का गुबार इतना था कि कुछ भी साफ-साफ देख पाना नामुमकिन हो रहा था। घटनास्थल के आसपास की आबादी के इलाके में चीख-पुकार मचनी शुरू हो गई थी।
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मलबा हटाती टीम
- फोटो : अमर उजाला
लोग स्वयं को सुरक्षित करने के लिए बदहवास होकर इधर से उधर भाग रहे थे। कुछ लोग सरायमियां की तरफ गलियों में दौड़ पड़े तो कुछ लोग थाना दिल्ली गेट क्षेत्र की तरफ भागने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घायलों के फटे कपड़े और क्षत-विक्षत अंग देखकर कांप उठे। आसपास के मकान भी क्षतिग्रस्त हो गए।
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मौके पर जमा लोग और पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
विस्फोट इतना जबरदस्त था कि गूलर रोड गली नंबर एक और चरक बालान तक से लोग फोन पर जानकारी करने में जुट गए कि आखिर इलाके में हुआ क्या है। हादसे के बाद जब गर्द गुबार थोड़ा सा छट गया तो देखा आसपास के मकानों की छतों पर धूल की मोटी चादर जम गई है। 100, 200, 300 मीटर पर ऐसे भी मकान थे जिनकी छतों पर लगे टिन शेड उखड़ गए थे।
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मौके पर जमा लोग और पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
छह दशक पुराना था कारखाना
देहली गेट क्षेत्र के मोहल्ला खटीकान में खिलौना पिस्तौल बनाने वाले कारखाने के मालिक सुरेंद्र भीलवारे के यहां पर यह काम पिछले 60 वर्षों से होता आ रहा है। लेकिन इससे पहले किसी हादसे की बात सामने नहीं आई।
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मौके पर जमा लोग और पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
स्थानीय लोगों के मुताबिक, पहले यहां पर खिलौना पिस्तौल बनाने का कारखाना था। बाद में कारखाने के चारों ओर बस्तियां बसती गईं। स्थानीय लोगों ने बताया कि खटीकान मोहल्ले में सरदार स्वरूप सिंह के अहाते के नाम से एक बहुत बड़ा भूखंड हुआ करता था। उनके चार बेटे थे जिनमें चुन्नीलाल, पाली भगत, मोतीलाल कबूतर बाज और चिमनलाल शामिल थे। सभी भाइयों ने अलग-अलग अपने पुश्तैनी काम को ही आगे बढ़ाया।
लोगों के मुताबिक, पहले यहां पर सिर्फ यह कारखाना हुआ करता था और बहुत कम संख्या में मकान थे। लेकिन वक्त गुजरने के साथ ही आसपास कैलाश गली, सराय मियां आदि क्षेत्र का विस्तार हो गया। साथ ही खैर रोड की तरफ खटीकान मोहल्ले का भी विस्तार हुआ। खिलौना पिस्तौल बनाने का यह कारखाना आसपास के सैकड़ों लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराता है। इसलिए इलाके में एक पहचान के तौर पर भी देखा जाता है। स्थानीय निवासी भगत सिंह कहते हैं कि इससे पहले इस कारखाने में कभी कोई हादसे की बात उनकी जानकारी में नहीं है।