अलीगढ़ के मामू भांजा प्रकरण के मुख्य मुकदमे में भीड़ हिंसा शब्द के प्रयोग ने अफसरों की बेचैनी बढ़ा दी है। दिन भर बवाल थामने में लगे रहे अफसरान शायद इस शब्द को समझ ही नहीं पाए। जब मुकदमे की कॉपी थाने से बाहर आई और मीडिया तक पहुंची तो मुख्यालय तक हल्ला मच गया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बाद में अधिकारी और भाजपा के कुछ बड़े नेता इस शब्द को तरह तरह से परिभाषित करने लगे। कुछ ने तो यहां तक कहा कि भीड़ हिंसा जैसा कोई शब्द मुकदमे में है ही नहीं।
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Tension in Aligarh
- फोटो : अमर उजाला
सपा वालों ने खूब किया प्रचारित, अफसरों के छूटे पसीने
मंगलवार रात मामू भांजा इलाके में हुई घटना के बाद से सपा-बसपा के नेता पीड़ित परिवार के साथ सक्रिय हो गए थे। रात में ही मुकदमा, गिरफ्तारी की शर्त पुरजोर ढंग से रखी गई। पुलिस अधिकारी भी तत्काल तहरीर लेकर मुकदमे व गिरफ्तारी पर सहमत हो गए।
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बस फिर क्या था, सपा के वरिष्ठ नेताओं की निगरानी में मुकदमे की तहरीर लिखी गई और तहरीर में भीड़ हिंसा का जिक्र किया गया। पुलिस अधिकारी भी शायद जल्दबाजी में तहरीर को सही से नहीं पढ़ सके और सीसीटीएनएस पर मुकदमा दर्ज कर चढ़ा दिया गया। यही सपा का इस पूरे प्रकरण में तुरप का इक्का रहा।
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मुकदमे की तहरीर वायरल होते ही दंग रह गए भाजपाई
ये बात तो सुबह ही साफ हो गई थी कि इस घटना में शामिल नामजद आरोपियों में अंकित वार्ष्णेय का भाई हर्ष भाजपा महावीर गंज मंडल का उपाध्यक्ष है। खुद मंडल अध्यक्ष गौरी आर्य ने इस बात की पुष्टि की है। इससे पिछली मंडल कमेटी में भी हर्ष उपाध्यक्ष ही था। पहले तो भाजपाई इस बात पर जोर देते रहे कि वीडियो में हर्ष का भाई अंकित मारपीट करते नहीं दिख रहा है।
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वह सिर्फ खड़ा है। इसलिए उसे हत्या के अपराध में जेल भेजना मुनासिब नहीं है। इस पर दोपहर तक एसएसपी यही कहते रहे कि जांच के आधार पर जो तथ्य सामने आएगा, उसी अनुसार कार्रवाई होगी। मगर शाम को जब इस मुकदमे की तहरीर वायरल हुई तो भाजपाई दंग रह गए। इसके बाद मैनेजमेंट शुरू हुआ।
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सपा ने मांगा मुआवजा
रात में ही इस घटना में सपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष अज्जू इशहाक ने बयान दिया था कि यह भीड़ हिंसा है। प्रदेश में ये क्रम जारी है। इसमें परिवार को मुआवजा दिया जाए। पोस्टमार्टम केंद्र पर पहुंचे एएमयू के छात्र नेताओं ने भी इसी का जिक्र करते हुए मुआवजे की मांग रखी।
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नेताओं के बोल
इस मामले में भाजपा जिलाध्यक्ष कृष्ण पाल सिंह लाला का कहना है कि ये भीड़ हिंसा नहीं है। किसी के घर में कोई चोरी या लूट के इरादे से घुसेगा तो उसकी प्रतिक्रिया कम या ज्यादा इसी तरह होगी। पुराने समय में इसी तरह की घटनाएं जनता मुठभेड़ के तौर पर हुआ करती थीं।
जिनमें अपराधी मारे जाते थे। अपराधियों को मारने वालों को इनाम तक मिलता था। यहां अब जेल भेजा गया है। वहीं अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रवक्ता अशोक पांडेय ने इसे भीड़ हिंसा नहीं माना है। कहा है कि ये चोर के घर में घुसने पर पिटाई की घटना है। चोरों की संख्या भी चार बताई गई है।