हाथरस में सत्संग के बाद मची भगदड़ में 121 लोगों की मौत के मामले में पहली बड़ी कार्रवाई हुई है। सरकार ने सिकंदराराऊ के एसडीएम समेत छह अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। मामले की जांच के लिए बनी एसआईटी की रिपोर्ट में एसडीएम रविंद्र कुमार, सीओ आनंद कुमार, थाना प्रभारी आशीष कुमार, तहसीलदार सुशील कुमार, चौकी इंचार्ज कचौरा मनवीर सिंह एवं चौकी इंचार्ज पोरा बृजेश पांडेय को लापरवाही बरतने का दोषी माना है।
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Hathras Stampede
- फोटो : अमर उजाला
रिपोर्ट में भगदड़ के लिए कार्यक्रम के आयोजकों को जिम्मेदार ठहराते हुए हादसे के पीछे साजिश की आशंका जताई है और गहन जांच की संस्तुति की है। एसआईटी ने सोमवार देर रात विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेज दी थी, जिसे मंगलवार को मुख्यमंत्री के सामने पेश किया गया।
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रिपोर्ट में कार्यक्रम आयोजक तथा तहसील स्तरीय पुलिस व प्रशासन के छह अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दोषी बताया गया। सभी ने दायित्वों का निर्वहन करने में लापरवाही बरती। एसआईटी ने पाया, एसडीएम रविंद्र ने गंभीरता न दिखाते हुए बिना मौका-मुआयना किए आयोजन की अनुमति दे दी। वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत नहीं कराया।
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सीएम योगी ने दो जुलाई को हादसे के बाद एसआईटी बनाई थी, जिसमें एडीजी जोन आगरा अनुपमा कुलश्रेष्ठ और मंडलायुक्त अलीगढ़ चैत्रा वी. शामिल थीं। एसआईटी ने हादसे के 24 घंटे बाद अपनी रिपोर्ट हाथरस पहुंचे सीएम योगी को सौंपी थी, तब उन्हें विस्तृत जांच कर दोबारा रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था। हादसे की जांच के लिए तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग भी बनाया गया है, जो हाथरस का दौरा कर चुका है।
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125 लोगों के बयान
एसआईटी ने तीन बार मौके का निरीक्षण किया। अफसरों, आम जनता एवं प्रत्यक्षदर्शियों सहित 125 लोगों का बयान दर्ज किया। फोटोग्राफ, वीडियो फुटेज का भी संज्ञान लिया गया। रिपोर्ट न्यायिक आयोग के साथ साझा की जा सकती है।
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तथ्य को छिपाकर ली आयोजन की अनुमति
एसआईटी ने चश्मदीद गवाहों व साक्ष्यों के आधार पर हादसे के लिए आयोजकों को जिम्मेदार ठहराया। आयोजकों ने तथ्यों को छिपाकर कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति ली। स्थानीय प्रशासन की शर्तों का अनुपालन नहीं किया। बिना पर्याप्त व्यवस्था तय संख्या से ज्यादा भीड़ आमंत्रित की।
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ये हैं खास तथ्य
दो सदस्यीय जांच समिति ने सौंपी जांच रिपोर्ट, कहा, साजिश से इंकार नहीं, गहन जांच की जरूरत
आयोजकों की लापरवाही से हुई हाथरस हादसा, भीड़ को आमंत्रण देकर नहीं किया पर्याप्त इंतज़ाम
स्थानीय पुलिस-प्रशासन ने आयोजन को गंभीरता से नहीं लिया, वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी सही सूचना
आयोजकों ने बिना पुलिस से सत्यापन कराए जिन लोगों को अपने साथ जोड़ा, उनसे फैली अव्यवस्था
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जांच आख्या में प्रमुख बिंदु
-चश्मदीदों व अन्य साक्ष्यों के आधार पर कार्यक्रम आयोजक को मुख्य रूप से जिम्मेदार माना है।
-हादसे के पीछे किसी बड़ी साजिश से भी इंकार नहीं किया है और गहन जांच की जरूरत है।
-तहसील पुलिस-प्रशासन को दोषी पाया है। एसडीएम, सीओ, तहसीलदार, इंस्पेक्टर, चौकी इंचार्ज ने दायित्व निर्वहन में लापरवाही बरती।
-एसडीएम ने बिना कार्यक्रम स्थल का मुआयना किए आयोजन की अनुमति दी और वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत भी नहीं कराया।
-उक्त अधिकारियों ने कार्यक्रम को गंभीरता से नहीं लिया गया। एसआईटी ने संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति की।
-आयोजकों ने तथ्यों को छिपाकर अनुमति ली। अनुमति की शर्तों का पालन नहीं किया गया। अप्रत्याशित भीड़ को आमंत्रित कर पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई।
-आयोजक मंडल से जुड़े लोग अव्यवस्था फैलाने के दोषी पाए गए हैं। इनके द्वारा जिन लोगों को बिना विधिवत पुलिस वेरिफिकेशन के जोड़ा गया, उनसे अव्यवस्था फैली।
-आयोजक मंडल ने पुलिस के साथ दुर्व्यवहार किया। स्थानीय पुलिस को कार्यक्रम स्थल पर निरीक्षण से रोकने का प्रयास किया गया।
-सत्संगकर्ता और भीड़ को बिना सुरक्षा प्रबंध के आपस में मिलने की छूट दी गई। भारी भीड़ के दृष्टिगत यहां किसी प्रकार की बैरीकेडिंग अथवा पैसेज की व्यवस्था नहीं बनाई गई थी और दुर्घटना घटित होने पर आयोजक मंडल के सदस्य घटना स्थल से भाग गए।
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हाथरस हादसे में इस तरह तय की गई जिम्मेददारी
रवेंद्र कुमार एसडीएम : एसडीएम ने 80 हजार लोगों की अनुमति दी थी, लेकिन मौके पर खुद मौजूद होने के बावजूद भीड़ बढ़ती देखकर कोई कदम नहीं उठाया। आयोजकों से भी किसी प्रकार की वार्ता नहीं की।
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आनंद कुमार सीओ सिकंदराराऊ : खुफिया तंत्र द्वारा भीड़ बढ़ने के बारे में जानकारी दी गई थी। इसके बाद भी महज एक थाने कस पुलिस बल ही तैनात किया गया। यहां तक कि उच्चाधिकारियों के संज्ञान में न लाकर फोर्स भी नहीं बढ़ाई।
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सुशील कुमार, तहसीलदार सिकंदराराऊ : क्षेत्र में होने वाले बड़े कार्यक्रम को लेकर बिल्कुल सजग नहीं थे। यहां तक कि कार्यक्रम की भीड़ का अंदाजा तक नहीं था। हादसे के बाद भी सक्रिय नहीं हो सके।
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आशीष कुमार, थानाध्यक्ष सिकंदराराऊ : थाना क्षेत्र में सत्संग होने के बाद भी आयोजकों से कोई जानकारी नहीं ली गई। उच्चाधिकारियों को भी इसकी जानकारी देरी से दी गई। भीड़ बढ़ने के बाद भी कोई संसाधन नहीं जुटाए।
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मनवीर सिंह , चौकी इंचार्ज कचौरा : कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहने के बावजूद सिर्फ कार्यक्रम को देखने में रहे। आयोजकों से कोई वार्ता नहीं की। भीड़ की उच्चाधिकारियों को जानकारी नहीं दी गई। सेवादारों के भरोसे कार्यक्रमों को छोड़ दिया गया।
ब्रजेश पांडे, चौकी इंचार्ज, पोरा : कार्यक्रम में तैनात होने के बाद भी आयोजकों से वार्ता नहीं की। भीड़ को बढ़ते हुए देखते रहे। यही वजह रही कि हादसे के काफी देर बाद भी लोग अस्पताल तक नहीं पहुंच सके।