बिटिया के मामले में पुलिस और प्रशासन की लापरवाही लगातार उजागर हो रही है। अब पता चला है कि पुलिस बिटिया को घायल अवस्था में ही जिला अस्पताल छोड़ आई थी और उसके साथ अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज नहीं गई थी।
विज्ञापन
2 of 5
पीड़िता के परिवार से बात करते अपर मुख्य सचिव
- फोटो : अमर उजाला
14 सितंबर को धारा 307 व एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे में बिटिया को घायल अवस्था में जब उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया तो उसके साथ एक महिला कांस्टेबल थी। जिला अस्पताल में उसे 35 मिनट रोका गया। वहां से अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया।
विज्ञापन
3 of 5
Hathras Gang Rape Case
- फोटो : अमर उजाला
तब कोई भी पुलिसकर्मी बिटिया के साथ नहीं थी। बिटिया को उसके परिजन ही एंबुलेंस में लेकर चले गए। रेफर स्लिप पर भी किसी पुलिसकर्मी के हस्ताक्षर नहीं हैं, इसका खुलासा एक चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में भी हुआ है। इसमें खुद यह महिला पुलिसकर्मी का कहना है कि परिजनों ने खुद ही यह कह दिया था कि वह खुद ही उसे मेडिकल कॉलेज ले जाएंगे। इस महिला पुलिसकर्मी का कहना है कि वह अपने साहब यानि तत्कालीन कोतवाली निरीक्षक चंदपा को यह बात बताकर वापस लौट आई थी।
4 of 5
Hathras Gang Rape Case
- फोटो : अमर उजाला
बिटिया, आरोपी पक्ष के घर पहुंचे सामाजिक संगठनों के लोग
बिटिया के गांव में कुछ सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग शुक्रवार को भी पहुंचे। सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटेकर, संदीप पांडेय ने बिटिया के घर पहुंचकर परिजनों से दुख दर्द पूछा। पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। परिवार वालों ने इन्हें विस्तार से पूरी दास्तां बताई और अधिकारियों की कारगुजारी भी बताई।
इन सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें हरसंभव मदद दिलाने का आश्वासन दिया। वहीं अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय पदाधिकारी भी गांव पहुंचे। राजा राजेंद्र सिंह की अगुवाई में इन लोगों ने आरोपी पक्ष के परिवार वालों से मुलाकात की और कहा कि इस मामले में दोषी बचने नहीं पाए और निर्दोष को सजा नहीं हो। इस तरह की घटना में मुआवजे का प्रचलन बंद होना चाहिए।