हाथरस के रसगवां के डीएल पब्लिक स्कूल के छात्रावास में पढ़ने वाले कक्षा दो के 11 वर्षीय छात्र कृतार्थ की हत्या के मामले में नए-नए खुलासे हो रहे हैं। परिवार में बरक्कत की खातिर तांत्रिक क्रिया के जरिए बलि देने को पूरी भूमिका जसोदन ने बनाई थी। बलि दिए जाने के बाद बच्चे के शव को ठिकाने लगाने के लिए जसोदन ने अपने पुत्र दिनेश को अलर्ट मोड पर रखा था।
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Hathras Murder
- फोटो : अमर उजाला
बलि देने के बाद दिनेश को अपनी गाड़ी में शव को ले जाकर ठिकाने लगाना था, ताकि शव की पहचान न हो सके, लेकिन कृतार्थ की आंख खुलने से पूरा खेल बिगड़ गया। रात्रि में शव को ठिकाने लगाने के लिए कार में लेकर दिनेश और विद्यालय के प्रधानाचार्य लक्ष्मण सिंह विद्यालय से निकले, लेकिन शव को ठिकाने नहीं लगा सके।
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मजबूरन बच्चे को बुखार आने का बहाना बनाकर परिजनों को सूचित किया, लेकिन परिजनों ने तेजी दिखाते हुए गाड़ी को जलेसर मार्ग पर पकड़ लिया। इस दौरान गाड़ी में कृतार्थ के शव के साथ उसका स्कूल बैग भी रखा था। स्कूल बैग को देखकर कृतार्थ के पिता ने शव को ठिकाने लगाने का भी अंदेशा उसी समय जाहिर किया था। पिता श्रीकृष्ण ने कहा था कि मेरे बेटे की हत्या कर शव को ठिकाने लगाने के लिए प्रबंधक दौड़ रहा था।
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Hathras Murder Case
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विद्यालय स्टाफ लगातार बोलता रहा झूठ, करता रहा गुमराह
इस घटना में विद्यालय स्टाफ ने पुलिस व अन्य अभिभावकों को गुमराह करने के लिए लगातार झूठ पर झूठ बोले, लेकिन पुलिस की जांच ने इस स्टाफ के झूठ का पर्दाफाश कर दिया। स्कूल स्टाफ पूरी तरह से विद्यालय प्रबंधक के पिता जसोदन उर्फ भगत की बातों में फंस रहा था।
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कृतार्थ की हत्या तंत्र-मंत्र के लिए हुई थी। स्कूल प्रबंधक का पिता तांत्रिक है। उसने अपने प्रबंधक बेटे को बताया था कि बलि देने से न केवल स्कूल तरक्की करेगा बल्कि उनके परिवार पर भी कोई मुसीबत नहीं आएगी। एएसपी अशोक कुमार के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि जब हॉस्टल में सभी बच्चे सो गए तो स्कूल का शिक्षक राम प्रकाश सोलंकी रात को 12 बजे कृतार्थ के पास पहुंचा और सोते हुए उसे गोद में उठाकर बाहर आ गया।
इसी दौरान कृतार्थ की आंख खुल गई। वह रोने लगा। इस पर शिक्षक रामप्रकाश ने बच्चे के मुंह को दबा दिया और नीचे ले आए। इसी दौरान नीचे प्रधानाचार्य कक्ष के बाहर बिछे हुए तख्त पर लिटाकर गला दबा दिया, जिससे बच्चे की मौत हो गई।