शिक्षक छोटेलाल की पत्नी वीरांगना ने अपने नाम को सार्थक किया और साहस दिखाया। वह लहूलुहान हालत में छोटी बेटी को गोद में लिए हमलावरों से बचने को घर में इधर-उधर दौड़ती रही। शोर मचाती रही। इसी बीच मकान के ऊपरी हिस्से में रहने वाले किरायेदार राम इनके लिए भगवान बनकर आए और उन्हें आता देख, हमलावर भागने को मजबूर हो गए। वीरांगना और उसके पति की जान तो बच गई, लेकिन बेटियों की जान नहीं बचा पाई।