अलीगढ़ में होली से पहले छात्र गुटों की रंजिश में खूनी खेल खेला गया। युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। जबकि साथी छात्र घायल हो गया। वार्ष्णेय कालेज के बाहर होली खेल रहे गुट को निशाना बनाया गया।
अलीगढ़ में धर्म समाज व वार्ष्णेय कॉलेज के छात्र गुटों में चल रही रंजिश में शनिवार दोपहर साढ़े 12 बजे छर्रा अड्डा पुल के नीचे कारखाना श्रमिक अंशू तोमर (20) की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उसका साथी वार्ष्णेय कॉलेज का छात्र पृथ्वीराज चौहान गोली लगने से घायल हुआ है।
पिछले वर्ष अक्तूबर माह में धीरज पर तलवार से हमला हुआ था। इसमें पृथ्वीराज व मृतक अंशू तोमर के गांव का विजेंद्र तोमर जेल गए थे। इसी रंजिश में घटना होने की बात सामने आ रही है। पुलिस के अनुसार, एक गुट से धीरज ठाकुर अपने साथियों संग इन दिनों डीएस कालेज में दबंगई करता रहता है। दूसरे गुट से पृथ्वी व उसके साथी वार्ष्णेय कॉलेज में दबंगई करते हैं। लड़की और रैगिंग के विवाद की बात भी सामने आ रही है।
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अंशू तोमर की हत्या के बाद विलाप करते परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दोनों गुटों में एक दूसरे के कालेज में आने को लेकर तनातनी रहती है। जानकारी में यह भी है कि पृथ्वी के संपर्क डीएस कालेज की किसी लड़की से हैं। वह अक्सर डीएस कालेज आता है। इसी बात पर दोनों में तनातनी बढ़ गई। विरोध के बीच अक्तूबर माह में धीरज पर हमला हुआ। हमले में उसके सिर में चोट आने के साथ-साथ दो उंगली तक कट गईं।
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अंशू तोमर की हत्या के बाद मौके पर पहुंची पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इस घटना में पृथ्वी के साथ-साथ न्हौटी गांव के विजेंद्र तोमर नामजद किए गए। दिसंबर माह में पुलिस ने दोनों को जेल भेज दिया था, पिछले दिनों दोनों जमानत पर बाहर आ गए। इसके बाद से फिर दोनों में तनातनी बन गई। बीते पखवाड़े में भी शनिवार को हुए घटनास्थल पर दोनों में आमना-सामना हुआ था, लेकिन बात किसी तरह टल गई। पुलिस पूछताछ में पृथ्वी ने कहा है कि धीरज दोनों कालेजों में रैगिंग करता है। इसी बात पर विवाद हुआ था। उस समय हमले का झूठा मामला दर्ज कराया था।
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हमले में घायल युवक
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पिता बोले- बेटे की बुलाकर पृथ्वी ने ही कराई हत्या
अंशू तोमर के माता-पिता शिवकुमार व रूपम फरीदाबाद में छोटी बेटी नव्या को लेकर रहते हैं। अंशू यहां अपनी दादी के साथ रहकर जयगंज के एक पीतल की मूर्ति बनाने के कारखाने में काम करता था। सुबह आठ बजे करीब वह काम पर आया था। उसकी पृथ्वी से अपने परिवार की ही विजेंद्र तोमर के जरिये दोस्ती थी।
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घायल पृथ्वीराज चौहान को अस्पताल लेकर जाते हुए
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
घटना से चंद घंटे पहले पृथ्वी उसे कारखाने से बुलाकर लाया। इसके बाद घटना हो गई। शुरूआत में चाचा ने सीसीटीवी जांच के आधार पर धीरज, प्रशांत उर्फ गोलू व राजा को नामजद कर तहरीर देते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई। फरीदाबाद से लौटे पिता ने पृथ्वी पर ही बुलाकर लाने व हत्या कराने का आरोप लगाया। सीओ के अनुसार परिवार ने पृथ्वी को भी आरोपी माना है। इसे भी जांच में शामिल किया जाएगा। फिलहाल तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। पृथ्वी का पुलिस निगरानी में उपचार चल रहा है।
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घटनास्थल पर खड़ी बाइक
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सीसीटीवी में कैद हुआ दो मिनट का घटनाक्रम, 100 मीटर दौड़ा घायल
पुलिस ने वार्ष्णेय मंदिर के बाहर लगे सीसीटीवी देखे हैं, जिसमें स्पष्ट हुआ है कि घटना सही 12:37 बजे की है। घटना से पहले तीन-चार युवकों संग पृथ्वी खड़ा है, कुछ छात्राएं भी खड़ी हैं। छात्राओं के जाने के कुछ मिनट बाद दो बाइकों पर हमलावर आए हैं। उनमें से सिर्फ धीरज ने तमंचे से पृथ्वी पर फायर किया, जो गोली उसके पांव में लगी है।
फिर उसने पीछे हटकर दूसरी गोली चलाई है, जो अंशू के लगी है। पृथ्वी करीब 100 मीटर दौड़ा है, फिर लड़खड़ा कर गिर गया। पुलिस को घटनास्थल पर एक बाइक, दो खोखे व खून के थक्के मिले हैं। सीसीटीवी साक्ष्य के साथ-साथ इन साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया है।
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अंशू तोमर की हत्या के बाद मौके पर पड़ा कारतूस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पोस्टमार्टम के बाद शाम को परिजन ले गए शव
अंशू के शव का पोस्टमार्टम दोपहर बाद हो सका। पोस्टमार्टम में पीठ के हिस्से से घुसी गोली पसलियों में जाकर फंस गई। कई पसलियां टूटने, फेफड़े क्षतिग्रस्त होने व अत्यधिक रक्तस्राव से उसकी मृत्यु होना माना गया है। पोस्टमार्टम में गोली भी फंसी मिली है। पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव को साथ ले गए, जहां कोहराम मचा रहा।
गोलियां चलते ही मची भगदड़
छर्रा पुल के नीचे काफी आवाजाही रहती है, रामघाट रोड पर जाम लगने पर पुलिस भी इस ओर ट्रैफिक को मोड़ देती है। वार्ष्णेय कॉलेज के बाहर होली खेल रहे छात्रों के अलावा उनके परिचित भी थे। हालांकि घटना के समय काफी लोग वहां से चले गए थे। अचानक गोलियां चलने से मौके पर भगदड़ मच गई। लोगों की आवाजाही भी रुक गई। हमलावरों के फरार होने के बाद लोग मौके पर पहुंचे और इसी किसी ने पुलिस को भी सूचना दी। करीब 20 साल बाद छात्र गुटों के बीच रंजिश और टकराव का यह मामला सामने आया है। इससे पहले 2004 और 2006 में जीतू और उमेश गौतम की हत्या हुई थी।