प्रतीकात्मक तस्वीर
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सात वर्ष पुराने प्रकरण में सामने आए यह तथ्य
सूत्रों के अनुसार, जांच में युवती के जिंदा रहने से संबंधित अहम तथ्य पुलिस के हाथ लगे हैं। फिलहाल, इस संबंध में इंस्पेक्टर गोंडा उमेश कुमार शर्मा ने इतना ही कहा कि सच सामने लाने पर काम किया जा रहा है। पहले यह साफ हो जाए कि यह लड़की वही है अथवा कोई और? उसके आधार पर न्यायालय में बयान दर्ज कराने, जेल गए युवक की रिहाई कराने आदि का काम होगा। अभी मामले में विधिक पहलुओं और साक्ष्यों पर काम हो रहा है। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी व घटनाक्रम के अनुसार, 17 फरवरी 2015 को गांव के एक किसान द्वारा पुलिस को दी गई गुमशुदगी की तहरीर में कहा गया कि उनकी दसवीं में पढ़ने वाली बड़ी बेटी लापता है। उसके लापता होने के पीछे परिवार ने गांव की विधवा महिला के इकलौते बेटे विष्णु पर संदेह जताया। कई माह तक चली जांच में पुलिस किशोरी का सुराग नहीं लगा सकी।