विशेषज्ञ के अनुसार जिप लाइन हादसा कमजोर हुक, मेंटेनेंस की कमी और SOP का पालन न होने जैसी गंभीर लापरवाहियों का नतीजा हो सकता है। सुरक्षा बेल्ट, पुली सिस्टम और ट्रेनिंग में खामियों के कारण यह हादसा जानलेवा साबित हुआ।
जिप लाइन का हादसा कमजोर हुक, वार्षिक मेंटेनेंस के नाम पर खानापूर्ति और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) का पालन न होने की वजह से हो सकती है। एडवेंचर के लिए कंपनी एक बार निवेश करती हैं। इसके बाद भूल जाती हैं। कर्मचारियों को भी नियमों का पालन करने के लिए प्रशिक्षित नहीं किया जाता है। इस कारण जान का खतरा बना रहता है। ये बातें एमजी जैन इंटर काॅलेज के गणित और भाैतिक विज्ञान के शिक्षक प्रशांत पाठक ने कही। उन्होंने जिप लाइन हादसे के संभावित कारण भी बताए।
माथे की हड्डी टूटने से मौत
आगरा चौपाटी में जिप लाइन से 45 फीट नीचे गिरकर कुनाल की दर्दनाक मौत हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसकी पुष्टि भी हो गई। गिरने पर कुनाल का माथा फर्श पर टकराया था, जिससे दाहिनी तरफ उसके माथे की हड्डी टूट गई थी। मस्तिष्क में अचानक सूजन आने से वह कोमा में चला गया और समय पर इलाज नहीं मिलने से मौत हो गई।
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ये वही हुक है जो टूट गया
- फोटो : अमर उजाला
कारण-1
जिप लाइन में उपयोग होने वाला लॉकिंग हुक यदि सही प्रकार से लॉक न हो, उसकी धातु कमजोर हो जाए या लोड क्षमता से अधिक दबाव आए तो वह खुल या टूट सकता है। कंपनी अधिक टिकट बेचने के चक्कर में क्षमता से अधिक वजन के व्यक्ति को उस पर बैठा देती है जबकि हर वजन वाले व्यक्ति के लिए अलग-अलग हुक होना चाहिए। इसी के साथ यह विशेष धातु का होता है जिससे यह आसानी से टेढ़ा न हो।
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हेलमेट
- फोटो : अमर उजाला
कारण-2
यदि सुरक्षा बेल्ट को मुख्य ट्राॅली, पुली सिस्टम से सही तरीके से जोड़ा नहीं गया हो तो जो सवार है वो सुरक्षा तंत्र से अलग हो सकता है। दुर्घटना की आशंका पैदा हो जाती है। सुरक्षा बेल्ट का उपयोग आपात स्थिति के लिए होता है। यह जिप लाइन के साथ लगाई जाती है। अगर हुक टूट भी जाए तो बेल्ट के साथ सवार व्यक्ति लटक सकता है। इससे जान बच जाती है।
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सुरक्षा मानकों का लगा बोर्ड
- फोटो : अमर उजाला
कारण-3
इसके अलावा जिप लाइन ट्राॅली के बैरिंग जाम होने, पुली में चटक आ जाने से या व्हील का एलाइनमेंट प्रॉपर न होने से एकदम झटका लगने पर लॉकिंग मैकेनिज्म (प्रणाली) फेल हो जाता है। इससे बैलेंस बिगड़ जाता है। इसमें सवार व्यक्ति तेज झटका लगने पर गिर सकता है।
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चौपाटी
- फोटो : अमर उजाला
कारण-4
जिप लाइन प्रणाली केवल स्थिर भार ही नहीं, बल्कि गतिशील बल भी सहन करती है। राइड के दौरान अचानक गति बढ़ने या ब्रेक लगने की स्थिति में व्यक्ति के शरीर के वास्तविक वजन से लगभग 2 से 3 गुना अधिक बल उत्पन्न हो सकता है। ऐसे में यदि जिप लाइन में प्रयुक्त उपकरणों जैसे हुक, हार्नेस, पुली या केबल की भार वहन क्षमता, इस अतिरिक्त बल के अनुरूप न हो तो भी उपकरण के विफल होने या टूटने की संभावना बढ़ जाती है।
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आगरा चौपाटी
- फोटो : अमर उजाला
कारण-5
एडवेंचर गतिविधि में अधिकांश हादसे मानवीय त्रुटि के कारण भी हो जाते हैं, जैसे सुरक्षा हुक या कैराबीनर का सही प्रकार से न लगाया जाना, लॉकिंग सिस्टम का पूरी तरह बंद या सुरक्षित न होना और निर्धारित भार सीमा से अधिक वजन या क्षमता के साथ राइड का संचालन भी हादसे का कारण बनते हैं।
कारण-6
हुक आईएसआई मार्क का होना चाहिए। अगर ऐसा नहीं है तो वो मानक के अनुरूप नहीं है। कंपनी एक बार उपकरण करने पर निवेश करती हैं। इनका वार्षिक मेंटेनेंस कराना आवश्यक होता है। इसका खर्च अलग से वहन करना पड़ता है। कई बार कंपनी इसे बचाने के लिए वार्षिक मेंटेनेंस नहीं कराती हैं। कमियों को दूर नहीं कराया जाता है। कई बार नए-नए कर्मचारी रखे जाते हैं। हर बार कर्मचारी प्रशिक्षण नहीं दिया जाता है।