अजमेर शरीफ से आए करीब 80 हजार जायरीन मंगलवार को कोठी मीना बाजार मैदान में पहुंचे। सुबह से देर रात तक बसों के आने जाने का सिलसिला जारी रहा। पीने के पानी की किल्लत से आज भी जायरीन जूझते नजर आए। खानपान की सामग्री यहां खुले में बेची जा रही है।
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कोठी मीना बाजार में खरीदारी करते जायरीन
- फोटो : अमर उजाला
अजमेर में कुल शरीफ खत्म होने के बाद मंगलवार को बड़ी संख्या में जायरीन कोठी मीना बाजार और रामलीला के मैदान में पहुंचना शुरू हो गए। रामलीला मैदान में कोई शिविर नहीं लगा है, लेकिन यहां जायरीन मैदान में सुस्ताते हैं और बसें खड़ी करते हैं। कोठी मीना बाजार में लगे पंडालों में सुबह से ही पैर रखने को जगह नहीं मिली। कोलकाता, मिदनापुर, झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब से भी जायरीन की बसें यहां पहुंचीं।
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पानी के टैंकर पर जायरीन
- फोटो : अमर उजाला
यहां बच्चे सुबह से दोपहर तक पानी के लिए भटकते नजर आए। एक दो टैंकर पहुंच रहे थे मगर वह पर्याप्त नहीं थे। गंदगी भी पसरी हुई थी। हालांकि मंगलवार को नगर निगम की दो टीमों ने यहां सफाई की थी, लेकिन कुछ घंटे बाद फिर से गंदगी पसर गई। बज्मे खुद्दाम संस्था के हाजी इलियास अख्तर वारसी, करम इलाही ने बताया कि पानी की किल्लत बनी हुई है। लोग जायरीन को खाद्य सामग्री बांटने भी पहुंच रहे हैं। सफाई व्यवस्था बेहतर नहीं है। खानपान की सामग्री को ढक कर बेचने को कहा गया है।
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मोबाइल चार्ज करते जायरीन
- फोटो : अमर उजाला
मैदान में अस्थायी बाजार भी लगाया गया है। इसमें जायरीन खरीदारी कर रहे हैं। बच्चों की साइकिलें, खिलौने, जूते, चप्पल और कपड़ों के स्टॉल भी लगाए गए हैं। इसके अलावा आगरा का पेठा भी खूब बिक रहा है। उड़ती धूल के बीच खुले में पेठा, खानपान के सामान बेचे जा रहे हैं। पंडाल में मोबाइल चार्जिंग सिस्टम लगाए गए हैं। इन मोबाइल चार्जरों पर लोगों की भीड़ लगी रहती है। चार्जिंग प्वाइंट की कमी होने के कारण लोग आसपास के दुकानदारों से भी मोबाइल चार्ज करा रहे हैं। इसकी एवज में दुकानदार उनसे पैसे भी वसूल कर रहे हैं।
अजमेर से लौटने वाले जायरीन की मेडिकल कैंप पर भीड़ लगी हुई है। जिला अस्पताल के चिकित्सक यहां उपचार कर रहे हैं। मंगलवार को सुबह से शाम तक मरीजों की लाइनें लगी रहीं। उल्टी दस्त, बुखार, जुकाम, बदन दर्द और डायबिटीज के मरीज भी कैंप में पहुंचे। चिकित्सकों ने बताया कि गंदगी और थकान के कारण जायरीन बीमार पड़ रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में छोटे बच्चे शामिल हैं।