यमुना नदी में गिर रहे 91 बड़े नालों में से 63 नालों के जरिए शहर का सीवर प्रदूषण बढ़ा रहा है। निपटने के लिए प्रदेश सरकार ने हाइब्रिड एन्यूटी मोड पर आधारित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण को मंजूरी दी है। 583 करोड़ रुपये की लागत से यमुना नदी के किनारे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाएंगे जो यमुना में गिर रहे 177.6 एमएलडी सीवर का ट्रीटमेंट (शोधन) करेंगे। दिल्ली में एनएमसीजी उत्तर प्रदेश जल निगम और विश्वराज एनवायरमेंट प्राइवेट लिमिटेड के बीच एमओयू (समझौता ज्ञापन) साइन किया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीवर समस्याओं के समाधान के लिए तीन नए एसटीपी के निर्माण के साथ इंटरसेप्शन, डायवर्जन स्ट्रक्चर, आईएंडडी नेटवर्क बिछाने, 15 साल के लिए ऑपरेशन एंड मेंटीनेंस को भी शामिल किया है। करार पर जलनिगम के अधीक्षण अभियंता राजकुमार शर्मा, विश्वराज एनवायरमेंट के सत्यजीत राउत और एनएमसीजी प्रोजेक्ट डायरेक्टर विनोद कुमार ने हस्ताक्षर किए।
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ताजमहल के पार्श्व में बहती यमुना
- फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) महानिदेशक जी अशोक कुमार ने बताया कि नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण से यमुना में बिना ट्रीटमेंट के सीवर का गिरना बंद हो जाएगा।
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एसटीपी
- फोटो : अमर उजाला
ये है शहर में सीवर नेटवर्क का हाल
शहर में 91 बड़े नाले हैं, जिनमें से 29 टेप्ड हैं। 27 नालों पर जालियां लगी हैं। 38 नालों को टेप किया जाना है। शहर में सात एसटीपी हैं, जबकि 28 सीवेज पंपिंग स्टेशन हैं।
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सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
- फोटो : अमर उजाला
शहर में 286 एमएलडी सीवर निकलता है, जिसमें से 130 एमएलडी ट्रीट हो रहा है। धांधूपुरा में 100 एमएलडी, 31 एमएलडी का जगनपुर में, 10 एमएलडी का ट्रांसयमुना में एसटीपी प्रस्तावित है।
यमुना में नाले के पानी के कारण उपजे दलदल से ताज पर गोल्डी काइरोनोमस कीड़ों का हमला हो रहा है। हर सप्ताह शुक्रवार को एएसआई ताज के पीछे की संगमरमरी दीवार की धुलाई करने को मजबूर है। बीते चार साल से ताजमहल पर कीड़ों का हमला बढ़ा है। सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के स्वत: संज्ञान लेने के बाद भी यमुना नदी में सीवर गिरना बंद नहीं हुआ। सीवेज को लेकर नीरी और सीपीसीबी की रिपोर्ट भी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होनी है।