आज विश्व पर्यटन दिवस है। सैलानी ताजमहल, लाल किला और फतेहपुर सीकरी के स्मारक देखने के लिए आ रहे हैं। लेकिन, पर्यटन विभाग की अनदेखी के चलते करीब डेढ़ सौ स्मारक आज भी पर्यटकों के इंतजार में हैं। न तो यहां पर्यटक पहुंच रहे हैं और न ही शहरवासी। कई स्मारक तो बदहाली का भी शिकार हो गए हैं, अवैध निर्माणों से घिर गए हैं। इनमें से कुछ तो ऐसे भी स्मारक हैं जहां पहुंचने तक का आसान रास्ता नहीं है।
विज्ञापन
2 of 5
सादिक खां-सलावत खां की बारहदरी
- फोटो : अमर उजाला
सलावत खां का मकबरा 30 साल पहले दूर से नजर आता था, अब नहीं आता। कारण इसके आस पास अवैध निर्माण होते चले गए। सिर्फ एक ही नहीं। सिकंदरा स्मारक भी धीरे धीरे घिरता जा रहा है। यहां 810 अवैध निर्माण हो चुके हैं। एएसआई केस तो दर्ज करा रही है लेकिन इसका कोई असर नहीं। 50 अवैध निर्माण भी ध्वस्त नहीं किए गए हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने अब तक 2903 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। स्मारकों में सबसे अधिक अवैध निर्माण सिकंदरा अकबर टूम के आसपास हुआ है, यहां 810 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई जा चुकी है। इसके अलावा दूसरे नंबर मथुरा में 456 और तीसरे स्थान पर कन्नौज में 412 एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है।
विज्ञापन
3 of 5
लाल ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
लाल ताजमहल: यह कर्नल जॉन विलियम हैसिंग का मकबरा है। भगवान टाकीज चौराहे के पास स्थित ताजमहल की तर्ज पर रोमन कैथोलिक कब्रिस्तान के बीचोंबीच बना ये स्मारक सन् 1803 में बना। वह 1784 में मराठा सरकार महादजी सिंधिया की सेना में उच्च पद पर था। महादजी की मृत्यु के बाद वह आगरा आ गया था। इस स्मारक में भी ताजमहल की तरह से भूमिगत कक्ष हैं। ताज की मीनारों की तरह से ही इसके चारों ओर भी मीनारें हैं।
4 of 5
चीनी का रोजा एत्मादउद्दौला
- फोटो : अमर उजाला
चीनी का रोजा: यमुनापार स्थित यह इमारत चीनी टाइल्स जड़ी विश्व में अपने किस्म की एक ही है। वस्तुत: इसमें शाहजहां का वजीर अफजल खां (शुक्रुल्लाह खान शिराजी) सपत्नीक दफन है। वजीर का इंतकाल सन् 1638 ई. में लाहौर के पास हुआ था। इस इमारत पर जड़ी नीले रंग की टाइल्स कभी बहुत दूर से चमका करती थीं।
मऊ रोड पर लाडली बेगम का मकबरा है लेकिन यह ढूंढने से भी नहीं मिलेगा, क्योंकि यह जमीन में दफन हो चुका है। पहले इसके चारों ओर अवैध निर्माण हुआ। इसके बाद इसके ऊपर भी हुआ। अब केवल बोर्ड लगा है, लाडली बेगम का मकबरा, एक टीला है, और कुछ नहीं। लाडली बेगम आइन-ए-अकबरी के लेखक और बादशाह जलालुददीन मौहम्मद अकबर के वजीर-ए-आजम अबुल फजल की बहन थीं।