आगरा में शुक्रवार को अवैध निर्माण हटाने गई राजस्व की टीम को महिला और उसके परिवार के विरोध का सामना करना पड़ा। महिला ने पहले तो तहसीलदार से विनती की, लेकिन जब उसकी कोई बात नहीं सुनी गई, तो वह बुलडोजर के आगे लेट गई। इस दौरान पुलिस टीम ने महिला को वहां से जबरन हटाने का प्रयास किया। महिला ने वहां से हटते ही ऐसा कदम उठाया कि अधिकारियों के होश उड़ गए।
आगरा की ब्लॉक पिनाहट क्षेत्र के अंतर्गत कस्बा भदरौली में कई वर्षों से किए गए अवैध कब्जे को ग्रामीणों की शिकायत के बाद तहसीलदार बाह ने राजस्व कर्मचारियों एवं पुलिस के साथ बुलडोजर से हटाया। वहीं पीड़ित ने प्रशासन पर मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए हैं। कस्बा भदरौली के आबादी के बीच बीते कई सालों से सरकारी ग्राम पंचायत की जमीन खाली पड़ी हुई थी। प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारियों के मुताबिक बीते 10 सालों से गांव के ही संतराम उर्फ पप्पू पुत्र खचेर मल जाटव ने टीन शेड की झोंपड़ी डालकर अपना सामान रखकर अवैध कब्जा कर लिया था, जिसकी शिकायत बीते कई महीनों पूर्व गांव के ही लोगों द्वारा जिलाधिकारी आगरा और तहसील में की थी।
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जमीन पर लेट गई महिला
- फोटो : अमर उजाला
संतराम ने भी तहसील के अधिकारियों के सामने अपना पक्ष रखा था। मगर जांच और लेखपाल के द्वारा प्रस्तुत पक्ष के बाद प्रशासन ने जमीन से अवैध कब्जा खाली कराने का आदेश दिया था। बताया गया है कि लेखपाल द्वारा प्रशासन की तरफ से अवैध कब्जा धारक संतराम को कई बार जमीन खाली कराने के लिए नोटिस दिए गए। मगर जमीन से कब्जा नहीं हटाया गया।
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कब्जा हटाता बुलडोजर
- फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार को तहसीलदार बाह सर्वेश कुमार, राजस्व कर्मचारियों एवं पुलिस फोर्स के साथ सरकारी जमीन से बुलडोजर द्वारा अवैध कब्जा हटवाने के लिए पहुंचे। यहां प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारियों द्वारा अवैध कब्जा हटाने की शुरुआत की गई, तो संतराम की पत्नी बुलडोजर के सामने लेट गई और आत्महत्या करने का भी प्रयास किया। ये देख प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ-पैर फूल गए और उन्होंने पुलिस की मदद से पूरे परिवार को मौके से हटाया।
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कब्जा हटाता बुलडोजर
- फोटो : अमर उजाला
संतराम ने और उसके परिवार ने प्रशासनिक अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि उनका परिवार 20 साल से अधिक समय से इसी जमीन पर निवास कर रहा है, जिसे गांव के ही कुछ राजनीतिक लोगों ने सांठगांठ कर झोपड़ी और सामान को तहस-नहस करवा दिया गया है।
तहसीलदार बाह सर्वेश कुमार के मुताबिक सरकारी जमीन पर संतराम द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया था। जिसकी ग्रामीणों द्वारा भी शिकायत की गई थी। लेखपाल द्वारा धारा 67 के तहत तहसीलदार न्यायालय में बेदखली बाद दाखिल किया गया था, जिसमें बेदखली आदेश पारित हुआ, जिसके बाद संतराम ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में अपना पक्ष रखा, जहां उन्हें कोई रिलीज नहीं मिला। कई बार लेखपाल द्वारा जमीन खाली कराने को नोटिस दिए गए मगर अवैध कब्जे को नहीं हटाया गया था। उसके बाद सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाकर कार्रवाई की गई है।